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Sawan Somwar: मध्य प्रदेश के अद्भुत शिव मंदिर, सौभाग्य से मिलते हैं इनके दर्शन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 08 Aug 2022 12:34 PM IST
सार
Sawan Somwar: मध्य प्रदेश के अद्भुत शिव मंदिर, सौभाग्य से मिलते हैं इनके दर्शन Sawan Somwar: Wonderful Shiva temples of Madhya Pradesh, fortunately meet them
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मध्य प्रदेश के अद्भुत शिव मंदिर
- फोटो : सोशल मीडिया
सावन महीने का आखिरी सोमवार है। प्रदेश भर के शिव मंदिरों में सुबह से ही भीड़ है। कई जगह कतारें लग रही हैं। आज आपको प्रदेश के कुछ खास शिव मंदिरों के दर्शन कराते हैं
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उज्जैन के महाकाल
- फोटो : सोशल मीडिया
उज्जैन के महाकालेश्वर
प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग है। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर का मंदिर उज्जैन में स्थित है। यहां वर्षभर भक्तों का सैलाब उमड़ता है। सावन के चार सोमवार और भादौ के दो सोमवार को बाबा की सवारी निकाली जाती है। जिसमें प्रदेशभर के साथ ही देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि से पहले यहां शिवनवरात्रि पर्व मनाया जाता है।
प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग है। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर का मंदिर उज्जैन में स्थित है। यहां वर्षभर भक्तों का सैलाब उमड़ता है। सावन के चार सोमवार और भादौ के दो सोमवार को बाबा की सवारी निकाली जाती है। जिसमें प्रदेशभर के साथ ही देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं। महाशिवरात्रि से पहले यहां शिवनवरात्रि पर्व मनाया जाता है।
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मंदसौर के पशुपतिनाथ महादेव
- फोटो : सोशल मीडिया
मंदसौर के पशुपति नाथ
मंदसौर जिले में भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर है। भगवान शिव की अष्टमुखी प्रतिमा के आठ मुखों को शर्व, भव, रुद्र, उग्र, भीम, पशुपतिनाथ और महादेव हैं। मूर्ति के ऊपर के चार मुख में भगवान शिव बाल्यावस्था, युवावस्था, अधेड़ावस्था और वृद्धावस्था के रूप में हैं। पशुपतिनाथ मंदिर में मौजूद प्रतिमा 1940 में शिवना नदी से निकली है। शिवनी नदी के तट पर स्थापित 7वीं सदी के इस प्राचीन शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है। मंदिर में स्थित सातवीं शताब्दी की ये प्रतिमा सात फीट ऊंची और सात टन वजनी है।
मंदसौर जिले में भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर है। भगवान शिव की अष्टमुखी प्रतिमा के आठ मुखों को शर्व, भव, रुद्र, उग्र, भीम, पशुपतिनाथ और महादेव हैं। मूर्ति के ऊपर के चार मुख में भगवान शिव बाल्यावस्था, युवावस्था, अधेड़ावस्था और वृद्धावस्था के रूप में हैं। पशुपतिनाथ मंदिर में मौजूद प्रतिमा 1940 में शिवना नदी से निकली है। शिवनी नदी के तट पर स्थापित 7वीं सदी के इस प्राचीन शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है। मंदिर में स्थित सातवीं शताब्दी की ये प्रतिमा सात फीट ऊंची और सात टन वजनी है।
ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग
- फोटो : सोशल मीडिया
ओंकारेश्वर महादेव
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा के तट पर ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर स्थित हैं। यहां भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर स्वरूप में विराजित हैं। सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वत विश्राम करते हैं। इसलिए मंदिर में रात में चौसर-पांसे, पालना और सेज सजाए जाते हैं। सावन के अंतिम सोमवार को दोपहर में भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर की महासवारी निकलती है। भगवान ओंकारेश्वर चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं।
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा के तट पर ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर स्थित हैं। यहां भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर स्वरूप में विराजित हैं। सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां रात्रि में भगवान शिव और माता पार्वत विश्राम करते हैं। इसलिए मंदिर में रात में चौसर-पांसे, पालना और सेज सजाए जाते हैं। सावन के अंतिम सोमवार को दोपहर में भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर की महासवारी निकलती है। भगवान ओंकारेश्वर चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण करते हैं।
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भोजपुर का भोजेश्वर मंदिर
- फोटो : सोशल मीडिया
भोजपुर के भोजेश्वर महादेव
रायसेन जिले का भोजपुर शिव मंदिर मध्य प्रदेश के सोमनाथ के रूप में प्रसिद्ध है। 11वीं सदी का यह मंदिर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां के शिवलिंग को एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है, जो एक ही पत्थर से निर्मित है। इस मंदिर को देखने के लिए सिर्फ मध्य प्रदेश के ही नहीं बल्कि देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। मंदिर की वास्तुकला बेहद अद्भुत है। बालकनियों को विशाल कोष्ठक और खंभों का सहारा दिया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों और ढांचे को बनाया नहीं गया।
रायसेन जिले का भोजपुर शिव मंदिर मध्य प्रदेश के सोमनाथ के रूप में प्रसिद्ध है। 11वीं सदी का यह मंदिर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां के शिवलिंग को एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है, जो एक ही पत्थर से निर्मित है। इस मंदिर को देखने के लिए सिर्फ मध्य प्रदेश के ही नहीं बल्कि देशभर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। मंदिर की वास्तुकला बेहद अद्भुत है। बालकनियों को विशाल कोष्ठक और खंभों का सहारा दिया गया है। मंदिर की बाहरी दीवारों और ढांचे को बनाया नहीं गया।

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