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देश की सियासत में केजरी: अब कोई नहीं कहेगा कि दिल्ली के बाहर AAP कुछ नहीं; पंजाब में सिक्का, गोवा में मौजूदगी
सार
उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद अब कोई नहीं कहेगा कि अरविंद केजरीवाल सिर्फ दिल्ली के नेता हैं। पंजाब में बम्पर जीत और गोवा में मौजूदगी दर्ज कराने में आप कामयाब रही है।
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उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के नतीजों ने अरविंद केजरीवाल से जुड़े सवाल का जवाब दे दिया है। अब उन्हें कोई भी सिर्फ दिल्ली का नेता नहीं कह सकता। उनकी पार्टी ने पंजाब की 117 विधानसभा सीटों में से 90 से अधिक पर जीत हासिल कर रही है। गोवा की दो सीटों पर भी पार्टी का कब्जा हो रहा है। मौजूदा स्थिति में लग रहा है कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के मुकाबले केजरीवाल की आप जल्दी राष्ट्रीय पार्टी होने का तमगा हासिल कर लेगी।
नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल।
- फोटो : सोशल मीडिया
दिल्ली के बाहर भी गंभीरता से लेना होगा
राजनीति में केजरीवाल की इंट्री दिल्ली की तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराने से शुरू हुई थी। जितना जबरदस्त आगाज था, उतना ही अब तक का सफर रहा है। उसके बाद भी दिल्ली के बाहर उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था। उत्तराखंड में आप का खाता नहीं खुला, पर 8 प्रतिशत वोट्स के साथ प्रभावी उपस्थिति जरूर पार्टी दर्ज कराने में कामयाब हुई है। गोवा में तो पार्टी के दो विधायक भी भाजपा सरकार को विधानसभा में चुनौती देते नजर आने वाले हैं। इसका मतलब है कि भाजपा का मुकाबला धीरे-धीरे खत्म हो रही कांग्रेस से ही नहीं, बल्कि केजरीवाल की आप से भी होगी।
राजनीति में केजरीवाल की इंट्री दिल्ली की तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराने से शुरू हुई थी। जितना जबरदस्त आगाज था, उतना ही अब तक का सफर रहा है। उसके बाद भी दिल्ली के बाहर उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था। उत्तराखंड में आप का खाता नहीं खुला, पर 8 प्रतिशत वोट्स के साथ प्रभावी उपस्थिति जरूर पार्टी दर्ज कराने में कामयाब हुई है। गोवा में तो पार्टी के दो विधायक भी भाजपा सरकार को विधानसभा में चुनौती देते नजर आने वाले हैं। इसका मतलब है कि भाजपा का मुकाबला धीरे-धीरे खत्म हो रही कांग्रेस से ही नहीं, बल्कि केजरीवाल की आप से भी होगी।
अरविंद केजरीवाल पंजाब में चुनाव प्रचार के दौरान।
- फोटो : सोशल मीडिया
2022 के कैम्पेन में केजरी ही रहे निशाने पर
हालिया विधानसभा चुनावों में केजरीवाल न केवल भाजपा के बल्कि कांग्रेस के भी निशाने पर रहे। कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केजरीवाल को छोटा मोदी कहा तो चरणजीत सिंह चन्नी ने दावा किया कि केजरीवाल कुछ भी हो सकते हैं, पर आम आदमी नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सोशल मीडिया पर केजरीवाल पर आरोप लगा रहे थे। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत कह रहे थे कि केजरीवाल को दिल्ली में कोई काम नहीं है, इसलिए वह गोवा में घूमने आए हैं।
हालिया विधानसभा चुनावों में केजरीवाल न केवल भाजपा के बल्कि कांग्रेस के भी निशाने पर रहे। कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केजरीवाल को छोटा मोदी कहा तो चरणजीत सिंह चन्नी ने दावा किया कि केजरीवाल कुछ भी हो सकते हैं, पर आम आदमी नहीं हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सोशल मीडिया पर केजरीवाल पर आरोप लगा रहे थे। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत कह रहे थे कि केजरीवाल को दिल्ली में कोई काम नहीं है, इसलिए वह गोवा में घूमने आए हैं।
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2029 में हो सकता है मोदी और केजरीवाल का आमना-सामना।
- फोटो : सोशल मीडिया
कुछ-कुछ मोदी से भी मिलते हैं केजरीवाल
2014 में जब मोदी भारतीय राजनीति पर छाए, तब उन्हें सत्ता-विरोधी बाहरी व्यक्ति के तौर पर देखा गया। केजरीवाल भी इससे जुदा नहीं हैं। राहुल गांधी के मुकाबले वे हिंदुत्व के ज्यादा करीब है। हनुमान चालीसा उन्हें रटा हुआ है। शहरी मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। केजरीवाल पर परिवारवार का बोझ भी नहीं है। इसके अलावा जिस तरह लोग मोदी के नाम पर बंट जाते हैं, वैसे ही हाल केजरीवाल के साथ भी है। केजरीवाल इसके बावजूद खुद को हिंदू लेफ्टिस्ट या राइटविंग नेशनलिस्ट की छवि में बंधने से बचते हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मोदी पर केजरी हमले नहीं करते। एक रिपोर्ट कहती है कि 38 भाषणों में केजरीवाल ने मोदी का नाम इक्का-दुक्का अवसरों पर लिया। दिल्ली मॉडल की बात करते हैं। वे अब गुजरात के मुसलमानों, गोवा के कैथोलिक्स, पंजाब के दलितों और उत्तराखंड की ऊंची जातियों में घुसपैठ कर कांग्रेस के वोट काट रहे हैं। खुद को भ्रष्ट कांग्रेस का विकल्प बताते हैं।
2014 में जब मोदी भारतीय राजनीति पर छाए, तब उन्हें सत्ता-विरोधी बाहरी व्यक्ति के तौर पर देखा गया। केजरीवाल भी इससे जुदा नहीं हैं। राहुल गांधी के मुकाबले वे हिंदुत्व के ज्यादा करीब है। हनुमान चालीसा उन्हें रटा हुआ है। शहरी मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। केजरीवाल पर परिवारवार का बोझ भी नहीं है। इसके अलावा जिस तरह लोग मोदी के नाम पर बंट जाते हैं, वैसे ही हाल केजरीवाल के साथ भी है। केजरीवाल इसके बावजूद खुद को हिंदू लेफ्टिस्ट या राइटविंग नेशनलिस्ट की छवि में बंधने से बचते हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि मोदी पर केजरी हमले नहीं करते। एक रिपोर्ट कहती है कि 38 भाषणों में केजरीवाल ने मोदी का नाम इक्का-दुक्का अवसरों पर लिया। दिल्ली मॉडल की बात करते हैं। वे अब गुजरात के मुसलमानों, गोवा के कैथोलिक्स, पंजाब के दलितों और उत्तराखंड की ऊंची जातियों में घुसपैठ कर कांग्रेस के वोट काट रहे हैं। खुद को भ्रष्ट कांग्रेस का विकल्प बताते हैं।
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अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय राजनीति के हाईवे पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
- फोटो : सोशल मीडिया
केजरीवाल का भविष्य क्या?
आम आदमी पार्टी तेजी से राष्ट्रीय पार्टी की पहचान हासिल करने की कोशिश कर रही है। आज उसके तीन राज्यों में विधायक हैं। पिछले दस साल में पार्टी की ताकत कई गुना बढ़ गई है। अब पार्टी की दो राज्यों में सरकारें हैं। भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरी कोई पार्टी नहीं है, जिसकी देश के दो या अधिक राज्यों में सरकारें हैं। ममता बनर्जी भी राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए जुगत लगा रही है, पर राष्ट्रीय स्तर पर जाने में केजरीवाल पछाड़ने ही वाले हैं। कुछ आलोचक केजरीवाल को मुफ्तखोरी बढ़ाने वाला सीएम कहते हैं। सही भी है, मुफ्त बिजली-पानी का वादा उन्होंने पंजाब में भी किया। पर जिस रफ्तार से उनकी लोकप्रियता बढ़ रही है और दिल्ली मॉडल चर्चा में आ रहा है, 2024 में तो नहीं, 2029 में जरूर केजरीवाल भाजपा के लिए चुनौती बन जाएंगे।
आम आदमी पार्टी तेजी से राष्ट्रीय पार्टी की पहचान हासिल करने की कोशिश कर रही है। आज उसके तीन राज्यों में विधायक हैं। पिछले दस साल में पार्टी की ताकत कई गुना बढ़ गई है। अब पार्टी की दो राज्यों में सरकारें हैं। भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरी कोई पार्टी नहीं है, जिसकी देश के दो या अधिक राज्यों में सरकारें हैं। ममता बनर्जी भी राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए जुगत लगा रही है, पर राष्ट्रीय स्तर पर जाने में केजरीवाल पछाड़ने ही वाले हैं। कुछ आलोचक केजरीवाल को मुफ्तखोरी बढ़ाने वाला सीएम कहते हैं। सही भी है, मुफ्त बिजली-पानी का वादा उन्होंने पंजाब में भी किया। पर जिस रफ्तार से उनकी लोकप्रियता बढ़ रही है और दिल्ली मॉडल चर्चा में आ रहा है, 2024 में तो नहीं, 2029 में जरूर केजरीवाल भाजपा के लिए चुनौती बन जाएंगे।