क्या इंसान जानवरों का मांस कच्चा खा सकता है?
शाकाहार को लेकर कई तरह के मिथक आम हैं। काफी समय से ये माना जा रहा है कि शाकाहार से शरीर को बहुत सारे जरुरी चीजें नहीं मिल पाती, लेकिन ऐसा नहीं है।
क्या इंसान जानवरों का मांस कच्चा खा सकता है?
मिथक- शाकाहारी होने से कई बार जरुरी प्रोटीन नहीं मिल पाता है।
कई तरह के डॉयटीशन भी ये मानते थे कि मांसाहारी भोजन लेने से काफी प्रोटीन मिलता है जो साग-सब्जियों को खाने वाले मिस कर जाते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है अगर आप कई तरह की सब्जियां और फल खाते हैं तो प्रोटीन कोई बड़ी समस्या नहीं रह जाती। सब्जियों में मटर और ब्रोकली में सबसे ज्यादा प्रोटीन होता है। जबकि फलों में संतरे और केले खाने से पर्याप्त प्रोटीन मिल जाता है।
क्या इंसान जानवरों का मांस कच्चा खा सकता है?
मिथक- शाकाहारी होने से कैल्शियम नहीं मिलता।
ये मिथक उन लोगों में ज्यादा आम है जो दूध और पनीर से दूरी बनाकर रखते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से काफी कैल्शियम मिलता है।
क्या इंसान जानवरों का मांस कच्चा खा सकता है?
मिथक- शाकाहारी भोजन करनेवाले अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करते हैं क्योंकि ये एक संतुलित आहार नहीं होता है। ये पूरी तरह से गलत है। वास्तव में साग-सब्जियों से भरे आहार में प्रोटीन, कार्बोहाईड्रेट, फैट सभी कुछ पर्याप्त मात्रा में होता है। वैसे भी शाकाहारी भोजन पेड़ो पर आधारित है जिसमें कई तरह के सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं।
क्या इंसान जानवरों का मांस कच्चा खा सकता है?
मिथक- शाकाहार को लेकर एक और मिथक आम है कि ऐसा भोजन वयस्कों के लिए तो ठीक है लेकिन बच्चों को कई तरह के पोषक तत्वों का आवश्यकता होती है ऐसे में साग-सब्जियां उसे पूरा नहीं कर पाती हैं।
वास्तव में इसके पीछे की वजह ये है कि बढ़ते बच्चों को प्रोटीन की सबसे ज्यादा आवश्कता होती है लेकिन मांस की अपेक्षा सब्जियों में ये सबसे कम पाया जाता है। वास्तव में प्रोटीन अमीनो एसिड से बनता है जोकि मांस के साथ-साथ पेड़ों में भी पर्याप्त मात्रा में होता है।