जिले के भदेसर उपखंड के धीरजी खेड़ा गांव में उस वक्त गम और गर्व का माहौल एक साथ देखने को मिला, जब भारतीय सेना के जवान पहलवान गुर्जर का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। जैसे ही उनका शव गांव में पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई और हर कोई अपने लाल के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा।
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Chittorgarh News: मासूम बेटी की सलामी ने रुलाया गांव, तिरंगे में लिपटे जवान को नम आंखों से दी अंतिम विदाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्तौड़गढ़
Published by: चित्तौड़गढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Apr 2026 08:44 PM IST
सार
तीन साल की बेटी की अपने पिता को दी गई सलामी ने हर आंख नम कर दी। चित्तौड़गढ़ के वीर सपूत को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
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वीर सपूत को अंतिम विदाई
- फोटो : अमर उजाला
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परिवार ने भरे दिल से दी विदाई
- फोटो : अमर उजाला
परिवार का दर्द देख पसीजा हर दिल
जवान की पत्नी विद्या अपने पति के पार्थिव शरीर को देखकर बिलख उठीं और खुद को संभाल नहीं पाईं। सेना के जवानों ने उन्हें तिरंगा सौंपा। मां उदी बाई ने आंसुओं को रोकते हुए बेटे के अंतिम दर्शन किए, जबकि पिता रामलाल गुर्जर अपने बेटे को देखकर फूट-फूटकर रो पड़े। इस दृश्य ने हर किसी को भावुक कर दिया।
जवान की पत्नी विद्या अपने पति के पार्थिव शरीर को देखकर बिलख उठीं और खुद को संभाल नहीं पाईं। सेना के जवानों ने उन्हें तिरंगा सौंपा। मां उदी बाई ने आंसुओं को रोकते हुए बेटे के अंतिम दर्शन किए, जबकि पिता रामलाल गुर्जर अपने बेटे को देखकर फूट-फूटकर रो पड़े। इस दृश्य ने हर किसी को भावुक कर दिया।
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मासूम का पिता को अंतिम सलाम
- फोटो : अमर उजाला
3 साल की बेटी की सलामी ने रुलाया
इस बीच सबसे भावुक पल तब आया, जब जवान की 3 साल की मासूम बेटी कृतिका ने अपने पिता को अंतिम सलामी दी। नाना के साथ पहुंची बच्ची ने पहले पुष्प अर्पित किए और फिर मासूम आवाज में जय हिंद बोलकर सलामी दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू बह निकले।
ये भी पढ़ें: Rajasthan News: सवाई माधोपुर में बेटी बृजेश ने दी पिता को मुखाग्नि, परंपराओं को चुनौती देती संवेदनशील मिसाल
इस बीच सबसे भावुक पल तब आया, जब जवान की 3 साल की मासूम बेटी कृतिका ने अपने पिता को अंतिम सलामी दी। नाना के साथ पहुंची बच्ची ने पहले पुष्प अर्पित किए और फिर मासूम आवाज में जय हिंद बोलकर सलामी दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों से आंसू बह निकले।
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दिल्ली से गांव तक उमड़ा जनसैलाब
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली से गांव तक उमड़ा जनसैलाब
जवान का पार्थिव शरीर दिल्ली से उदयपुर लाया गया, जहां से सड़क मार्ग के जरिए उनके गांव पहुंचाया गया। रास्ते में गंगरार, चंदेरिया, रोलहेड़ा बाईपास सहित कई स्थानों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प अर्पित करते रहे और नम आंखों से अपने वीर को अंतिम विदाई दी।
जानकारी के अनुसार गुरुवार सुबह ड्यूटी के दौरान दिल्ली में हार्ट अटैक से पहलवान गुर्जर का निधन हो गया था। पहलवान गुर्जर का सपना बचपन से ही सेना में जाने का था। पहली बार असफलता मिलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरी कोशिश में सफलता हासिल की। 20 मार्च 2017 को वे भारतीय सेना में भर्ती हुए और वर्तमान में नई दिल्ली में तैनात थे।
जवान का पार्थिव शरीर दिल्ली से उदयपुर लाया गया, जहां से सड़क मार्ग के जरिए उनके गांव पहुंचाया गया। रास्ते में गंगरार, चंदेरिया, रोलहेड़ा बाईपास सहित कई स्थानों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग सड़क किनारे खड़े होकर पुष्प अर्पित करते रहे और नम आंखों से अपने वीर को अंतिम विदाई दी।
जानकारी के अनुसार गुरुवार सुबह ड्यूटी के दौरान दिल्ली में हार्ट अटैक से पहलवान गुर्जर का निधन हो गया था। पहलवान गुर्जर का सपना बचपन से ही सेना में जाने का था। पहली बार असफलता मिलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरी कोशिश में सफलता हासिल की। 20 मार्च 2017 को वे भारतीय सेना में भर्ती हुए और वर्तमान में नई दिल्ली में तैनात थे।
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पंचतत्व में विलीन हुआ वीर सपूत
- फोटो : अमर उजाला
पंचतत्व में विलीन हुआ गांव का लाल
धीरजी खेड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने सलामी दी और पूरा गांव नम आंखों से अपने बेटे को विदाई देता रहा। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ, हर आंख नम थी और हर दिल अपने वीर सपूत पर गर्व के साथ शोक मना रहा था।
धीरजी खेड़ा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने सलामी दी और पूरा गांव नम आंखों से अपने बेटे को विदाई देता रहा। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ, हर आंख नम थी और हर दिल अपने वीर सपूत पर गर्व के साथ शोक मना रहा था।

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