गहलोत-पायलट अनबन: सचिन पायलट के किसान सम्मेलन से गायब अशोक गहलोत का चेहरा; कांग्रेस की फूट उजागर!
राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की दूरियां कम नहीं हो रही हैं। इसका ताजा उदाहरण बुधवार को देखने को मिला है। करौली में सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट की मूर्ति का अनावरण हो रहा है। यहां किसान सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन के पोस्टर में कांग्रेस के सभी वरिष्ठ नेताओं के चेहरे हैं पर अशोक गहलोत का चेहरा गायब है।
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राजस्थान कांग्रेस में फिर से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खाई का प्रमाण सामने आया है। करौली में आयोजित किए जा रहे किसान सम्मेलन के पोस्टर में सचिन पायलट का चेहरा बड़े रूप में नजर आ रहा है लेकिन पूर्व सीएम अशोक गहलोत की तस्वीर पोस्टर में नहीं दिख रही है। अब इसको लेकर फिर से चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
सम्मेलन के प्रचार-प्रसार के लिए जारी पोस्टर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और के.सी. वेणुगोपाल की तस्वीरें प्रमुखता से लगाई गई हैं। इसके अलावा राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को भी पोस्टर में स्थान दिया गया है।
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अशोक गहलोत की तस्वीर नहीं होने का क्या है कारण ?
राजस्थान में पिछले कुछ समय से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच पुराने राजनीतिक विवादों को लेकर बयानबाजी की जा रही है। इसमें खास तौर पर कांग्रेस नेता अशोक गहलोत बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं। वे मानेसर प्रकरण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं। इन बयानों को सचिन पायलट के खिलाफ माना जा रहा है और कांग्रेस की भीतरी खींचतान को लेकर देखा जा रहा है। इस मुद्दे पर भाजपा के नेता भी अपने विचार रख रहे हैं। भाजपा का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस के अन्य नेताओं को आगे बढ़ने देना नहीं चाहते हैं। इस वजह से वे बार-बार सचिन पायलट से जुड़े मानेसर प्रकरण को उठा रहे हैं। ऐसे में किसान सम्मेलन के पोस्टर से गहलोत की तस्वीर का गायब होना पायलट खेमे की तरफ से अशोक गहलोत को एक राजनीतिक संकेत देने के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह केवल पोस्टर डिजाइन का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठनात्मक और नेतृत्व से जुड़े संदेश भी हो सकते हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस विषय पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सभी की नजरें करौली में होने वाले किसान सम्मेलन पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सचिन पायलट अपने संबोधन में किसानों के मुद्दों, संगठनात्मक रणनीति और प्रदेश की राजनीति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर बात कर सकते हैं। ऐसे में यह सम्मेलन राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और आगामी सियासी समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।