जयपुर पटाखा फैक्टरी विस्फोट: 8 लोगों की मौत का आरोपी याकूब खाकी की पकड़ से दूर, दो पुलिसकर्मी निलंबित
जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जांच तेज हो गई है। इस हादसे में आठ लोगों की मौत हुई, जिनमें एक बच्चा और दो सगे भाई शामिल हैं। पुलिस ने फैक्ट्री संचालक फिरोज और मकान मालिक याकूब की तलाश तेज कर दी है और दिल्ली व फर्रुखाबाद समेत कई जगहों पर छापेमारी की जा रही है।
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विस्तार
जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे में एक बच्चे और दो सगे भाइयों समेत आठ लोगों की मौत हो चुकी है। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी है। मामले में फैक्ट्री संचालक फिरोज और मकान मालिक याकूब की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस की टीमें दिल्ली, फर्रुखाबाद और अन्य संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
लापरवाही पर दो पुलिसकर्मी निलंबित
मामले में पुलिस विभाग ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। डीसीपी ईस्ट रंजिता शर्मा ने बताया कि लापरवाही के आरोप में खोह नागोरियान थाने के एक एएसआई और एक हेड कांस्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
दिल्ली से आता था विस्फोटक सामान
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी फिरोज दिल्ली से पटाखों और विस्फोटक सामग्री का माल मंगवाता था। इसके बाद जयपुर में उसकी पैकेजिंग और अन्य काम करवाए जाते थे। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि फिरोज सिर्फ एक ही नहीं, बल्कि एक से अधिक अवैध इकाइयों का संचालन कर रहा था। उसके दिल्ली स्थित ठिकानों पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है।
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छह साल से किराए पर लिया हुआ था मकान
जांच में सामने आया है कि जिस भवन में यह हादसा हुआ, वह घाटगेट निवासी दो भाइयों याकूब और कय्यूम का है। पुलिस के अनुसार यह मकान करीब छह साल पहले दिल्ली निवासी फिरोज को किराए पर दिया गया था। जांच के दौरान यह भी पता चला है कि फैक्ट्री संचालन के लिए अनियमित तरीके से बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा था।
जयपुर को बना लिया था नया संचालन केंद्र
स्थानीय लोगों के मुताबिक फिरोज और उसका सहयोगी वसीम यहां पटाखा निर्माण और पैकेजिंग का काम करते थे। बताया जा रहा है कि दिल्ली में कार्रवाई होने के बाद उन्होंने जयपुर को अपना नया संचालन केंद्र बना लिया था। यहीं से अवैध तरीके से पटाखों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था।
आग लगने के कारणों की जांच जारी
घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम ने कई नमूने और महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। प्रारंभिक स्तर पर आशंका जताई जा रही है कि किसी चिंगारी, धूम्रपान या अन्य गतिविधि के कारण बारूद ने आग पकड़ ली होगी। हालांकि आग लगने की वास्तविक वजह एफएसएल की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
थाने से सिर्फ एक किलोमीटर दूर चल रही थी फैक्ट्री
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि खोह नागोरियान थाने से महज एक किलोमीटर की दूरी पर यह अवैध फैक्ट्री पिछले दो वर्षों से कैसे संचालित हो रही थी। करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बने मकान में बड़े पैमाने पर पटाखों का निर्माण और भंडारण किया जा रहा था। हादसे के समय भी वहां भारी मात्रा में बारूद और विस्फोटक सामग्री मौजूद होने की बात सामने आई है।
एक और अवैध फैक्ट्री पर कार्रवाई
जांच के दौरान घटनास्थल के पास संचालित एक अन्य फैक्ट्री की भी पहचान की गई है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए उस फैक्ट्री को भी बंद करवा दिया है। इसके साथ ही पूरे इलाके में अवैध पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री के भंडारण की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है।
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प्रशासनिक लापरवाही भी जांच के घेरे में
पुलिस की जांच अब केवल आग लगने के कारणों तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर यह अवैध फैक्ट्री इतने लंबे समय तक कैसे संचालित होती रही। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि निगरानी में किस स्तर पर चूक हुई, क्या किसी स्थानीय अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत थी और प्रशासनिक स्तर पर किसकी जिम्मेदारी बनती है।
कई बड़े खुलासों की उम्मीद
आठ लोगों की जान लेने वाले इस हादसे ने शहर में अवैध पटाखा निर्माण के नेटवर्क, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुलिस लगातार फरार आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।