{"_id":"6a29164a0c62f5f1e5041172","slug":"jaipur-blast-who-is-responsible-for-8-deaths-illegal-firecracker-unit-ran-for-2-years-system-under-scrutiny-2026-06-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"खो नागोरियान ब्लास्ट: 8 मौतों का जिम्मेदार कौन? 2 साल से चल रहा था मौत का कारोबार, सवालों के घेरे में सिस्टम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खो नागोरियान ब्लास्ट: 8 मौतों का जिम्मेदार कौन? 2 साल से चल रहा था मौत का कारोबार, सवालों के घेरे में सिस्टम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Priya Verma
Updated Wed, 10 Jun 2026 01:24 PM IST
विज्ञापन
सार
खो नागोरियान की पटाखा फैक्टरी में हुआ धमाका सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि कई स्तरों पर हुई कथित लापरवाही की कहानी भी बयां कर रहा है। रिहायशी इलाके में अवैध रूप से चल रही फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने 8 लोगों की जान ले ली, जबकि अब जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।
पटाखा फैक्टरी ब्लास्ट में आठ लोगों की मौत
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
जयपुर के खो नागोरियान इलाके में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी ने 8 लोगों की जान ले ली, लेकिन हादसे के बाद सामने आ रही जानकारियां इस त्रासदी को और भी गंभीर बना रही हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि रिहायशी इलाके के एक छोटे से मकान में पिछले करीब दो वर्षों से बिना किसी वैध अनुमति के पटाखों का निर्माण और पैकिंग का काम चल रहा था। अब इस मामले में पुलिस, प्रशासन और अन्य जिम्मेदार विभागों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
जांच में सामने आया है कि जिस मकान में विस्फोट हुआ, वह याकूब नामक व्यक्ति का था, जिसने यह मकान दिल्ली निवासी फिरोज को किराये पर दे रखा था। पुलिस के अनुसार फिरोज अपने सहयोगी वसीम के साथ वहां अवैध रूप से पटाखा निर्माण और पैकिंग का काम कर रहा था। खो नागोरियान थानाधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि प्रारंभिक जांच में फैक्टरी के अवैध रूप से संचालित होने की पुष्टि हुई है। हादसे के बाद से मकान मालिक याकूब और फैक्टरी संचालक फिरोज दोनों फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
सूत्रों के अनुसार घटना वाले दिन मकान के भीतर पटाखों का निर्माण और पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान बाहर जलाए गए कचरे से उठी चिंगारी बारूद तक पहुंच गई, जिससे अचानक विस्फोट हो गया। बताया जा रहा है कि मुख्य गेट के पास धमाका होने के कारण अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। आग और धुएं के बीच फंसे मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: खो नागोरियान अग्निकांड के बाद बड़ा एक्शन: कई गोदामों पर छापे, भारी मात्रा में बारूद और पटाखा सामग्री जब्त
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के अनुसार अस्पताल में भर्ती सभी गंभीर घायलों की उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतकों में अजीम, समीर, बिलाल, मोहम्मद रब्बिल, अब्दुल वाहिद और नासिर समेत 8 लोग शामिल हैं, जबकि दो शवों की पहचान प्रारंभिक स्तर पर नहीं हो सकी थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अवैध फैक्टरी करीब दो वर्षों से रिहायशी इलाके में संचालित हो रही थी और इसकी जानकारी पुलिस व संबंधित विभागों को भी थी। बावजूद इसके कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्टरी के पास स्थित दूसरे मकान में भी उसी बिजली मीटर से कनेक्शन लिया गया था। वहीं मकान मालिक याकूब के खिलाफ पहले से जमीन और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामले भी दर्ज बताए जा रहे हैं। फायर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पटाखों के निर्माण या भंडारण के लिए पुलिस और फायर विभाग की अनिवार्य अनुमति आवश्यक होती है। बिना एनओसी संचालित होने वाली ऐसी इकाइयां पूरी तरह अवैध होती हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
हादसे के बाद अब पुलिस फैक्टरी के संचालन, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, लाइसेंस और संभावित लापरवाही के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं इस पूरे मामले ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रही खतरनाक इकाइयों और उन पर निगरानी रखने वाले विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में सामने आया है कि जिस मकान में विस्फोट हुआ, वह याकूब नामक व्यक्ति का था, जिसने यह मकान दिल्ली निवासी फिरोज को किराये पर दे रखा था। पुलिस के अनुसार फिरोज अपने सहयोगी वसीम के साथ वहां अवैध रूप से पटाखा निर्माण और पैकिंग का काम कर रहा था। खो नागोरियान थानाधिकारी ओमप्रकाश ने बताया कि प्रारंभिक जांच में फैक्टरी के अवैध रूप से संचालित होने की पुष्टि हुई है। हादसे के बाद से मकान मालिक याकूब और फैक्टरी संचालक फिरोज दोनों फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार घटना वाले दिन मकान के भीतर पटाखों का निर्माण और पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान बाहर जलाए गए कचरे से उठी चिंगारी बारूद तक पहुंच गई, जिससे अचानक विस्फोट हो गया। बताया जा रहा है कि मुख्य गेट के पास धमाका होने के कारण अंदर मौजूद मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। आग और धुएं के बीच फंसे मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए।
ये भी पढ़ें: खो नागोरियान अग्निकांड के बाद बड़ा एक्शन: कई गोदामों पर छापे, भारी मात्रा में बारूद और पटाखा सामग्री जब्त
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी के अनुसार अस्पताल में भर्ती सभी गंभीर घायलों की उपचार के दौरान मौत हो गई। मृतकों में अजीम, समीर, बिलाल, मोहम्मद रब्बिल, अब्दुल वाहिद और नासिर समेत 8 लोग शामिल हैं, जबकि दो शवों की पहचान प्रारंभिक स्तर पर नहीं हो सकी थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अवैध फैक्टरी करीब दो वर्षों से रिहायशी इलाके में संचालित हो रही थी और इसकी जानकारी पुलिस व संबंधित विभागों को भी थी। बावजूद इसके कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो इतना बड़ा हादसा टाला जा सकता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि फैक्टरी के पास स्थित दूसरे मकान में भी उसी बिजली मीटर से कनेक्शन लिया गया था। वहीं मकान मालिक याकूब के खिलाफ पहले से जमीन और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामले भी दर्ज बताए जा रहे हैं। फायर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पटाखों के निर्माण या भंडारण के लिए पुलिस और फायर विभाग की अनिवार्य अनुमति आवश्यक होती है। बिना एनओसी संचालित होने वाली ऐसी इकाइयां पूरी तरह अवैध होती हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
हादसे के बाद अब पुलिस फैक्टरी के संचालन, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, लाइसेंस और संभावित लापरवाही के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं इस पूरे मामले ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रही खतरनाक इकाइयों और उन पर निगरानी रखने वाले विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।