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किलकारियों के बीच मातम का डर: पीबीएम अस्पताल में 6 प्रसूताओं की हालत गंभीर, जांच के लिए जोधपुर से पहुंची टीम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर Published by: बीकानेर ब्यूरो Updated Wed, 10 Jun 2026 10:34 AM IST
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सार

जिस अस्पताल में नवजातों की किलकारियां गूंजनी थीं, वहां इन दिनों छह माताओं की जिंदगी बचाने की जंग चल रही है। पीबीएम अस्पताल में छह प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के मामले में जोधपुर से पहुंची विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम पड़ताल में जुटी है।

English Headline/Slug : Rajasthan News Postpartum Women Critical at PBM Hospital Expert Team from Jodhpur Laun
अस्पताल में भर्ती प्रसूताएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद छह महिलाओं की अचानक तबीयत बिगड़ने और किडनी फेल होने के मामले ने न सिर्फ अस्पताल प्रशासन बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इन महिलाओं के परिजन पिछले कई दिनों से आईसीयू और वार्डों के बाहर बेचैनी से अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं। किसी की गोद में नवजात है तो किसी की आंखों में अपनी पत्नी को स्वस्थ देखने की उम्मीद। परिजनों का आरोप है कि डिलीवरी के बाद सब कुछ सामान्य था लेकिन अचानक हालात बिगड़ते चले गए और अब डायलिसिस के सहारे मरीजों का जीवन बचाने की कोशिश की जा रही है।





मामले की खबर सामने आते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। आमजन लगातार सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक साथ छह प्रसूताओं की हालत इतनी गंभीर कैसे हो गई? क्या यह किसी बड़ी लापरवाही का परिणाम है या फिर किसी तकनीकी खामी का?
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मंगलवार को पूरे दिन पीबीएम अस्पताल में हलचल बनी रही। मरीजों के परिजनों ने प्रशासन और चिकित्सकीय व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। बढ़ते दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए जोधपुर से छह विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बीकानेर पहुंची। टीम ने गायनी विभाग, ब्लड बैंक और आईसीयू का गहन निरीक्षण किया तथा मरीजों के उपचार और अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

विशेषज्ञ टीम में बायोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. प्रभुत प्रकाश, मेडिसिन विंग के प्रोफेसर डॉ. प्रभात कंवरिया, डॉ. कल्पना मेहता, डॉ. एसएस राठौड़, डॉ. मनोज वर्मा और डॉ. प्रवीण राठौड़ शामिल रहे। टीम ने चिकित्सकीय रिकॉर्ड, उपचार प्रक्रिया और अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई है। फिलहाल जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम के पीछे के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

उधर स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों के भी बीकानेर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन छह माताओं की इस हालत का जिम्मेदार कौन है, जो अपने नवजातों के साथ खुशियां मनाने की जगह जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। उनके परिवारों को अब जांच रिपोर्ट से ज्यादा अपनी बेटियों, बहुओं और पत्नियों के सुरक्षित घर लौटने का इंतजार है।

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