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चैत्र नवरात्रि: सिरोही का यह मंदिर 5 हजार साल से अधिक पुराना, अरावली की गोद में है बसा; शिव पुराण में भी जिक्र

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: सिरोही ब्यूरो Updated Sat, 21 Mar 2026 06:00 AM IST
सार

Chaitra Navratri 2026: सिरोही के आबूरोड स्थित भद्रकाली मंदिर 5 हजार साल से अधिक प्राचीन माना जाता है। शिव पुराण में इसका उल्लेख मिलता है। अरावली में स्थित यह मंदिर नवरात्रि में श्रद्धालुओं का प्रमुख आस्था केंद्र बन जाता है।

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Sirohi's Bhadrakali Temple is Over 5,000 Years Old; Goddess Resides Here in Her Kalyani Form
अरावली की गोद में बसा है सिरोही का भद्रकाली मंदिर - फोटो : अमर उजाला

सिरोही जिले के आबूरोड के समीप ऋषिकेश स्थित भद्रकाली माता मंदिर अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के कारण विशेष पहचान रखता है। अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर 5 हजार साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है। यहां माता भद्रकाली कल्याणी रूप में विराजमान हैं और इस स्थल का उल्लेख शिव पुराण में भी मिलता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।


 

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Sirohi's Bhadrakali Temple is Over 5,000 Years Old; Goddess Resides Here in Her Kalyani Form
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा है मंदिर - फोटो : अमर उजाला

प्राकृतिक सौंदर्य के बीच स्थित मंदिर का विशेष महत्व
यह मंदिर आबूरोड शहर के रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए ऑटो या टैक्सी की सुविधा उपलब्ध है, जबकि निजी वाहन से आने वाले श्रद्धालु मानपुर सर्किल होते हुए मंदिर पहुंच सकते हैं।
 

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Sirohi's Bhadrakali Temple is Over 5,000 Years Old; Goddess Resides Here in Her Kalyani Form
अरावली पहाड़ियों से घिरा है मां का धाम - फोटो : अमर उजाला

मंदिर चारों ओर से अरावली की पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इसके सामने से एक प्राकृतिक नाला गुजरता है। बारिश के समय श्रद्धालुओं को पानी के बीच से होकर मंदिर तक पहुंचना पड़ता है, जो इस स्थान की विशिष्टता को दर्शाता है।
 

Sirohi's Bhadrakali Temple is Over 5,000 Years Old; Goddess Resides Here in Her Kalyani Form
चैत्र नवरात्रि के मौके पर की गई मंदिर की सजावट - फोटो : अमर उजाला

राजा अंबरीश की तपस्या से जुड़ी मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरावती नगरी के राजा अंबरीश ने यहां वर्षों तक मां भद्रकाली की कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ऋषिकेश, कर्णिकेश्वर महादेव और मां काली प्रकट हुए थे।
 

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Sirohi's Bhadrakali Temple is Over 5,000 Years Old; Goddess Resides Here in Her Kalyani Form
पांच हजार साल से भी ज्यादा पुराना है मंदिर - फोटो : अमर उजाला

राजा अंबरीश ने मां से इसी स्वरूप में यहां विराजमान रहने का वरदान मांगा, जिसके बाद से माता भद्रकाली कल्याणी रूप में यहां विराजमान होकर भक्तों का कल्याण कर रही हैं। इस मंदिर की विशेषता यह भी बताई जाती है कि यहां माता दो शेरों पर सवार हैं, जिसे अद्वितीय माना जाता है।
 

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