शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिक्षा विभाग के अफसरों की सार्वजनिक तौर पर जमकर क्लास ली। सोमवार को हिमाचल राजभवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने अति दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले शिक्षकों को अवार्ड सूची में शामिल नहीं करने पर एतराज जताया। सीएम ने शिक्षा विभाग के अफसरों को फटकार लगाते हुए कहा यदि वो दुर्गम क्षेत्रों में गए होते तो उन्हें पता होता कि वहां शिक्षक किन परिस्थितियों में सेवाएं दे रहे हैं।
तस्वीरें: अफसरों पर भड़के सीएम, पूछा इन शिक्षकों को क्यों नहीं देते अवॉर्ड
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उन्होंने भविष्य में अवार्ड की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए। राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकतर शिक्षक दुर्गम क्षेत्रों में जाने से बचने के लिए फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट और एड़ी चोटी का जोर लगा देते हैं। ऐसे में जो सेवाएं दे रहे उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए
प्राय: देखा गया है कि गत वर्षों से जनजातीय क्षेत्रों में समर्पण भाव से विद्यार्थियों को पढ़ा रहे शिक्षकों का नाम पुरस्कार प्राप्त करने वालों की सूची में नहीं होता। मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि दुर्गम क्षेत्रों में कार्य कर रहे शिक्षकों और जो वास्तव में अपने व्यवसाय के प्रति समर्पित हैं उनका ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों लाहौल-स्पीति, किन्नौर, शिमला और सिरमौर के कुछ ऊपरी क्षेत्रों से कोई अध्यापक पुरस्कार सूची में शामिल नहीं है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका और शिक्षण के प्रति उनके योगदान के विश्लेषण की आवश्यकता पर बल दिया।