सब्सक्राइब करें

गणतंत्र के प्रहरी: कोई नशे के खिलाफ लड़ रहा जंग, कोई बेसहारा गोवंश व बच्चों का बना मददगार, तो किसी ने...

न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/बिलासपुर/कुल्लू/मंडी/हमीरपुर। Published by: अंकेश डोगरा Updated Mon, 26 Jan 2026 10:41 AM IST
सार

भारत इस साल अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। आज हम गणतंत्र दिवस पर कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताएंगे जिनसे आप प्रेरणा ले सकते हैं और देश और प्रदेश के लिए कुछ कर सकते हैं। जानें विस्तार से...

विज्ञापन
Guardians of the Republic Some are fighting war against drugs others are helping abandoned cattle and children
डिजाइन फोटो। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

सरहद ही नहीं...समाज में रहकर भी आम आदमी गणतंत्र के प्रहरी बन सकते हैं। हमीरपुर के डॉक्टर कंवर ने न केवल अपनी करोड़ों की संपत्ति, बल्कि देह भी दान कर दी है। हिमाचल में ऐसे कई लोगों ने समाज सेवा की मिसाल पेश की है। गणतंत्र दिवस पर इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। आप जज्बे, हुनर और हौसले से समाज को बेहतर बनाने में अहम योगदान दे सकते हैं।

Trending Videos
Guardians of the Republic Some are fighting war against drugs others are helping abandoned cattle and children
779 को दी आवास सुविधा और आर्थिक मदद - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
जिन्हें अपनों ने छोड़ दिया प्रकाश ने उन्हें अपना लिया
उपमंडल सुंदरनगर के खरीहड़ी के सत्य प्रकाश शर्मा ने उन जिंदगियों को राह दिखाई, जिन्हें अपने बीच में ही छोड़ कर चले गए। तीन बच्चों से एक किराये के कमरे में दिव्य मानव ज्योति सेवा ट्रस्ट का शुभारंभ किया। आज इस संस्था का अपना परिसर है। इसमें 200 बच्चों के लिए समस्त आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस समय संस्था में 99 बच्चे हैं, जिन्हें प्राथमिक स्तर से महाविद्यालय स्तर की शिक्षा दी जा रही है। संस्था पात्र कन्याओं को आर्थिक सहायता देती है। पहली से दसवीं तक 300 रुपये प्रति महीना और ग्यारहवीं से आगे 500 रुपये प्रति महीना सहायता राशि दी जाती है।

इस समय 89 कन्याओं को यह सहायता दी जा रही है।  सत्य प्रकाश शर्मा ने महज एक वर्ष की आयु में पिता गोवर्धन पाल और 4 वर्ष की आयु में माता बसंत देवी को खो दिया। इनकी बड़ी बहन भीमा देवी ने डैहर में पालन पोषण किया। 1960 में क्लर्क के रूप में सरकारी नौकरी पर लगे। फिर अध्यापन शुरू किया और 31 मई 2001 को मुख्य अध्यापक के पद से सेवानिवृत्त हुए। इलाके के अनाथों के लिए एक अच्छी जिंदगी देने का संकल्प 47 साल पहले गुरु स्वामी स्वतंत्रानंद महाराज भौण (सुकेत) के आशीर्वाद से लिया। उसे आज तक निभा रहे हैं। सत्य प्रकाश शर्मा ने संस्था के जरिये अब तक सात सौ से ज्यादा बच्चों को नई राह दिखाई है। उनके संस्थान में 779 बच्चों ने प्रवेश लिया। 684 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर चले गए। विचलित हो जाता था। मैंने अपने गुरु से प्रेरणा लेकर 46 साल पहले ट्रस्ट की शुरुआत तीन अनाथ बच्चों से की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Guardians of the Republic Some are fighting war against drugs others are helping abandoned cattle and children
नीरज और अंबिका - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
अंबिका और नीरज श्याम बनीं लावारिस गोवंश के लिए सहारा
अंबिका श्याम और नीरज श्याम शुक्ला की दो बहनों की जोड़ी ने निस्वार्थ भाव से गोसेवा करने की मिसाल पेश की है। दोनों बहनों ने आज 130 गोवंश को सहारा दिया है। अंबिका श्याम और नीरज श्याम शुक्ला सैकड़ों लावारिस मवेशियों का का सहारा बनी हैं। इनका यह सफर 2008 से चल रहा है। दोनों मूल रूप से कुमारसैन से संबंध रखती है। इनके पिता सेना में थे। उन्होंने ब्रो में जमीन ली थी।

1987 के बाद ये ब्रो में ही रह रहे हैं। नीरज श्याम शुक्ला डीएवी रामपुर में शिक्षक के रूप में भी कार्य कर रही हैं। अंबिका श्याम ने बताया कि काफी साल पहले उनके सामने एक बछड़े पर एक गाड़ी चढ़ गई। उन्होंने उसकी देखभाल की, लेकिन सात दिन के बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने निर्णय लिया की जितना हो सके वह गोवंश की रक्षा के लिए कार्य करेंगी। 2012 में बजीर बाबड़ी में चोटिल गोवंश उपचार देना शुरू किया। वहां कई तरह की परेशानियों का सामना भी करना पड़ा। गोवंश को जंगली जानवरों से खतरा हो गया था

पूर्व में रहे एसडीएम रामपुर ने उन्हें सुझाव दिया कि कोई जगह चिह्नित कर वहां पर यह काम आप कर सकते हैं। उसी के चलते उन्होंने महिषासुर मर्दनी मंदिर खोपड़ी के नीचे जगह देखी, जहां पर गोवंश की सेवा कर रही हैं। उन्होंने श्री हरि कृष्ण गो सेवा पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट 2014 में बनाया। 
Guardians of the Republic Some are fighting war against drugs others are helping abandoned cattle and children
250 बच्चों को नर्सरी में दे रहीं मुफ्त कोचिंग - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
स्नेह लता ने हैंडबाल को बना लिया जिंदगी  
हिमाचल प्रदेश के खेल जगत में बिलासपुर के गांव बच्छड़ी (मोरसिंघी) की स्नेह लता एक ऐसी मिसाल बनकर उभरी हैं, जिन्होंने अपना जीवन हैंडबाल की प्रतिभाओं को तराशने के लिए समर्पित कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय हैंडबाल कोच स्नेह लता अपनी मोरसिंघी हैंडबाल नर्सरी के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा रही हैं। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी स्नेह लता ने अपने कोचिंग कॅरिअर की शुरुआत साल 2010 में की। वर्तमान में वह कुल 250 बच्चों को हैंडबाल की बारीकियां सिखा रही हैं।

स्नेह लता निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। उनके पास प्रशिक्षण ले रहे कुल बच्चों में से 82 बच्चे उनकी नर्सरी में ही रहते हैं।   उन्होंने अब तक 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किए हैं। उनकी नर्सरी से निकले 200 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं। राष्ट्रीय गेम्स 2023 में स्वर्ण पदक जीतने वाली हिमाचल महिला हैंडबाल टीम की वह मुख्य कोच थीं। इसमें 15 खिलाड़ी उन्हीं की नर्सरी से थीं। एशियन गेम्स 2023 की एशियाई खेलों में गई भारतीय टीम में मोरसिंघी नर्सरी की सात खिलाड़ी शामिल रहीं। दीक्षा ठाकुर को उप कप्तान बनने का गौरव प्राप्त हुआ। स्नेह लता केवल मैदान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित 75 खिलाड़ी अब तक विभिन्न क्षेत्रों में सम्मानजनक सरकारी व अन्य नौकरियां प्राप्त कर चुके हैं। 
विज्ञापन
Guardians of the Republic Some are fighting war against drugs others are helping abandoned cattle and children
कुल्लू के विशाल शर्मा - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
नशे की जंजीरें काटकर दूसरों का जीवन संवार रहे विशाल
प्रदेश को नशा मुक्त बनाने के लिए सरकार, प्रशासन, पुलिस समाज सेवी संस्थाएं प्रयासरत हैं। कुल्लू के विशाल शर्मा भी नशे के आदी हो चुके युवाओं को राह दिखा रहे हैं। वह स्वयं दस साल तक नशे की गिरफ्त में रहे। स्कूली दौर में नशे की चपेट में फंसे, लेकिन समय रहते और दृढ़ इच्छा शक्ति से स्वयं को नशे के इस दलदल से निकाल पाए। इतना ही नहीं अब देश और प्रदेश के युवाओं को नशे की चपेट से बाहर निकालने का कार्य कर रहे हैं। वह य रहते और दृढ़ इच्छा शक्ति से स्वयं को नशे के इस दलदल से निकाल पाए। इतना ही नहीं अब देश और प्रदेश के युवाओं को नशे की चपेट से बाहर निकालने का कार्य कर रहे हैं। वह जिला में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र चला रहे हैं और पिछले आठ साल में अब तक 320 युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचा चुके हैं। उन्होंने अपने नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र का नाम भी संकल्प फाउंडेशन ही रखा है। जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित बाशिंग में वे नशे की लत में फंस चुके मरीजों का उपचार और काउंसलिंग कर रहे हैं। 

बाशिंग में साल 2018 से नशा निवारण एवं पुनर्वास केंद्र संचालित किया जा रहा है। इसके माध्यम से देशभर के 320 से अधिक युवाओं को मुख्य धारा से जोड़ा गया है। संकल्प उनकी टीम की मदद से यह कार्य सफल हो रहा है। वर्तमान में केंद्र में दो चिकित्सकों समेत 15 सदस्यों का स्टाफ तैनात है। इनमें एक साइकोलॉजिस्ट, एक एमबीबीएस चिकित्सक व तीन स्टाफ नर्स सेवा दे रहीं रहे हैं। -विशाल शर्मा,  संस्थापक, संकल्प फाउंडेशन
विज्ञापन
अगली फोटो गैलरी देखें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed