करवाचौथ पर इस बार बहुत अच्छा संयोग बन रहा है। नई नवेली दुल्हनों और पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह करवाचौथ अच्छी मानी जा रही है। महिलाएं इसका उद्यापन भी कर सकती हैं। ज्योतिषों का दावा है कि पहली बार करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत बहुत अच्छा है। इस बार करवाचौथ पर बृहस्पति और शुक्र का अच्छा संयोग बन रहा है। इसके साथ चतुर्थी भी पड़ रही है और यह भगवान गणेश को समर्पित है। इन सभी योगों के एक साथ होने से यह व्रत अत्यंत लाभकारी हो जाता है। इस बार करवाचौथ 17 अक्तूबर को होगी।
पंडित डॉ. प्रियव्रत शर्मा ने कहा कि करवाचौथ का व्रत रखने के लिए महिलाओं को सुबह चार बजे उठकर संकल्प लेना होगा। शाम को व्रत की पूजा का समय 6:48 बजे से शुरू होगा। 6:48 बजे तक भद्रा होने से पहले पूजा नहीं होगी। व्रत का संकल्प लेने के बाद महिलाओं को सात्विक व्यवहार का पालन करना होगा। व्रत को सफल बनाने के लिए दूर्वा और मोदक से गणपति की पूजा करनी होगी। पूरा दिन गणपति के मंत्रों का जप करें। व्रत के दिन फल बांटना भी लाभकारी है। मंदिरों में भिखारियों को वस्त्र और खाना देना चाहिए।
करवाचौथ का चांद इस बार रात 8.12 बजे निकलेगा। राजधानी में रिज मैदान पर इस दिन भारी संख्या में महिलाएं चांद का दीदार करने पहुंचती हैं। शिमला में सबसे पहले चांद रिज से ही नजर आता है। इसलिए शहर के विभिन्न हिस्सों से महिलाएं यहां चांद देखने पहुंचती है। चांद के दीदार के बाद व्रत खोला जाता है। रिज पर प्रशासन ने करवाचौथ पर सुरक्षा को लेकर खास बंदोबस्त किए होते हैं।
करवाचौथ पर साजन के नाम हाथों पर मेहंदी लगाने के लिए महिलाओं ने एडवांस बुकिंग करना शुरू कर दी है। मालरोड और टका बेंच के पास मेहंदी लगाने वाले पहुंच चुके हैं। इस बार मेहंदी के मैरोकन डिजाइन की ज्यादा मांग है। इसमें महिलाओं के हाथों के अलावा आधे बाजूओं तक मेहंदी लगाई जाती है। राजधानी में करवाचौथ को लेकर मेहंदी लगवाने के लिए महिलाओं की इतनी भीड़ होती है कि कई बार नंबर ही नहीं आता। इसलिए महिलाओं ने अभी से कारीगरों के पास बुकिंग करवाना शुरू कर दी है।
मैरोकन डिजाइन में मेहंदी लगाने के लिए महिलाओं को 400 रुपये खर्च करने होंगे। यह डिजाइन महिलाओं को आकर्षित भी कर रहा है। इसके अलवा रोज पैट्रन, लोट्स पैट्रन और सिंपल डिजाइन की भी काफी मांग है। कारीगरों का कहना है कि मेहंदी पानी और चायपत्ती और अन्य नेचुरल तत्वों से तैयार की गई है। इससे महिलाओं के हाथों पर किसी तरह का इंफेक्शन नहीं होगा।