पहाड़ की इस बेटी की आज हर कोई मिसाल दे रहा है। बहादुर बेटी ऐसा काम कर रही है जो आज तक कोई नहीं कर पाया। कहानी जानकर आप भी इसे सलाम करेंगे। आइए जानते हैं इस बहादुर बेटी की पूरी कहानी-
पिता लाचार, बेसहारा परिवार, घर चलाने के लिए नगाड़ा बजाती है ये बेटी
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जो लोग बेटी पैदा होने पर शोक मनाते हैं, उन्हें नेहा के जज्बे से सीख लेनी चाहिए। ज्वालाजी मंदिर में नगाड़ा बजाकर नेहा पूरा परिवार पालने के साथ साथ खुद अपनी और अपने भाई बहन की पढ़ाई का जिम्मा भी उठा रही है। यही नहीं पहले पिता के इलाज का जिम्मा भी नेहा ने ही उठाया।
नेहा ने बताया कि उनके पिता करीब तीन साल पहले एक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इससे इनका चलना-फिरना बंद हो गया। घर में कमाने वाला और कोई नहीं था। ऐसे में दो वक्त की रोटी कमाने का जिम्मा बड़ी बेटी नेहा पर आ गया।
तब से नेहा ने पिता का काम संभाल लिया। नेहा अपने पिता की जगह मंदिर में नगाड़ा बजाने के लिए जाने लगी। पहले रिश्तेदारों और समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया लेकिन परिवार की जरूरतों को देखते हुए नेहा ने यह काम जारी रखा।
नेहा कहती हैं कि वह अपनी खुशी से बुजुर्गों की इस परंपरा को निभाने के लिए तैयार हुई हैं। उन पर परिवार का कोई दबाव नहीं है। यह मेरे लिए फख्र की बात है कि मैं मुश्किल घड़ी में परिवार के काम आ सकूं। नेहा के पिता काफी समय से मंदिर में नगाड़ा बजाते थे। मगर अब उनकी जगह एक बेटी ने ले ली। ऐसा पहली बार हुआ जब किसी बेटी ने ये काम हाथ में लिया। मंदिर जाने वाला हर कोई नेहा की कहानी सुनकर उसे शाबाशी भी देता है।