हिमालय में स्थित इस पवित्र झील का पानी अष्टमी के दिन अचानक ही बढ़ने लग जाता है। यही नहीं पानी इतना बढ़ जाता है कि यह झील से बाहर बहना शुरू हो जाता है। ऐसा पूरे साल में सिर्फ अष्टमी के मौके पर ही होता है। यह पवित्र झील हिमाचल के चंबा की मणिमहेश झील है। इसकी कहानी बड़ी ही रोचक है आइए जानते हैं-
अष्टमी के दिन अचानक बढ़ जाता है इस झील का पानी, वैज्ञानिक भी हैरान
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कहते हैं मणिमहेश कैलाश पर भगवान शिव ने सदियों तक तपस्या की थी। बर्फ से ढके इस पहाड़ पर भोलेनाथ का वास होता था। वहीं बर्फ से ढकी चोटियों के बीच यह मनोरम झील बनी हुई है। इसी झील में स्नान करने के बाद पवित्र मणि के दर्शन भी होते हैं।
ऐसा माना जाता है कि माता पार्वती से विवाह करने के बाद भगवान शिव ने मणिमहेश की रचना की थी। यह भगवान शिव की महिमा ही है कि अष्टमी के दिन स्नान से पहले ही झील का पानी बढ़ने लग जाता है। ऐसा क्यों होता है, इसका पता लगाने में वैज्ञानिक भी नाकाम रहे हैं। अष्टमी के बाद इस झील का पानी फिर कम हो जाता है। झील में इतना पानी अचानक कहां से आ जाता है ये रहस्य बरकरार है।
इस बार पवित्र मणिमहेश यात्रा का छोटा स्नान बार जन्माष्टमी के उपलक्ष्य पर 24 अगस्त बुधवार से शुरू होगा। यह स्नान बुधवार रात 10.17 बजे से वीरवार रात 8.08 बजे तक जारी रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु पवित्र स्नान और मणि के दर्शन करेंगे। मणिमहेश का बड़ा स्नान (न्हौण) नौ सितंबर शुक्रवार को सुबह 4.19 बजे शुरू होकर शनिवार सुबह 6.11 बजे पर संपन्न होगा।
पंडित विपिन शर्मा ने बताया कि वैसे तो मणिमहेश यात्रा में स्नान का दौर करीब दो माह तक चलता है। इस अवधि में लाखों लोग यात्रा में शामिल होते हैं, लेकिन शाही स्नान और मणिदर्शन का लुत्फ सिर्फ अष्टमी स्नान पर ही मिलता है।