हिमाचल प्रदेश में हर साल लाखों देसी-विदेशी सैलानी यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को निहारने के लिए पहुंचते हैं। शुद्ध आबोहवा और प्राकृतिक नजारों से भरपूर हिमाचल की वादियां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। प्रदेश में घूमने के लिए कई बेहतरीन स्थान हैं। साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए भी यहां अच्छे स्थल है। यहां पर रिवर राफ्टिंग, ट्रैकिंग, वॉटर स्पोर्ट्स और पैराग्लाइडिंग आदि का आनंद ले सकते हैं।
World Tourism Day: जानिए हिमाचल के इन 10 खूबसूरत पर्यटन स्थलों को, जहां घूमकर नहीं भरेगा आपका मन
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ब्रिटिशकाल में देश की ग्रीष्मकालीन राजधानी रही हिल्सक्वीन के नाम से मशहूर शिमला की खूबसूरत वादियां देसी के साथ विदेशी पर्यटकों की भी प्रमुख सैरगाह है। शिमला में ऐतिहासिक मालरोड, रिज, क्राइस्ट चर्च, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान(एडवांस्ड स्टडी), गेयटी थियेटर, राज्य संग्रहालय के अलावा कई ऐतिहासिक इमारतें व दर्शनीय स्थल हैं। वहीं, प्रसिद्ध जाखू हनुमान मंदिर, तारादेवी मंदिर, संकटमोचन मंदिर के अलावा कालीबाड़ी मंदिर शिमला के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। जाखू मंदिर के लिए रोपवे या सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।
वहीं शिमला से करीब 15 किलोमीटर दूर कुफरी पर्यटकों की पसंदीदा सैरगाहों में से एक है। प्राकृतिक नजारों से भरपूर कुफरी में घुड़सवारी, रोप क्लाइबिंग, जिप लाइन का लुत्फ उठाने के अलावा सेब के बगीचे भी निहार सकते हैं। इसके अलावा कुफरी चिड़ियाघर में कई तरह के वन्य जीव आकर्षण का केंद्र रहते हैं। सोलन जिले के चायल, बड़ोग और कसौली में घूम सकते हैं। चंड़ीगढ़ से सीधी बस सेवा या कालका से रेल के जरिये शिमला पहुंचा जा सकता है। वहीं, दिल्ली से एचआरटीसी व पर्यटन निगम की सीधी बस सेवा की भी सुविधा है। इसके अलावा जुब्बड़हट्टी तक हवाई मार्ग से भी सफर किया जा सकता है। फिलहाल हवाई सेवा बंद है।
विश्व धरोहर में शामिल 118 साल पुराना ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग भी पर्यटकों के लिए खास आकर्षण है। पारदर्शी विस्ताडोम कोच में सफर कर वादियों को भी निहार सकते हैं। 9 नवंबर, 1903 को कालका-शिमला रेलमार्ग की शुरुआत हुई थी। अपने 118 वर्षों के सफर में यह रेलमार्ग कई इतिहास संजोए है। देश-विदेश के सैलानी शिमला के लिए इसी रेलमार्ग से टॉय ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाते हैं। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। रेलमार्ग कालका स्टेशन 656 (मीटर) से शिमला (2,076) मीटर तक जाता है। 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 18 स्टेशन है। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।
103 सुरंगें आकर्षण का केंद्र
कालका-शिमला रेललाइन पर 103 सुरंगें सफर को रोमांचक बनाती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है। इसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन ढाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल हैं। पूरे रेलमार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेललाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया था। कनोह रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक आर्च गैलरी पुल 1898 में बना था। शिमला जाते यह पुल 64.76 किमी पर मौजूद है। आर्च शैली में निर्मित चार मंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं।