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हाईटेक तकनीक: ऊना समेत अंबाला मंडल की ट्रेनों को 201 करोड़ से मिलेगी सुरक्षा, खास क्या है? जानें सबकुछ
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना/नई दिल्ली।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 16 Jun 2026 12:20 PM IST
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सार
भारतीय रेलवे ने अंबाला मंडल की शेष ब्रॉड गेज लाइनों पर स्वदेशी ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली लगाने को मंजूरी दे दी है। 201 करोड़ रुपये की लागत से 811 रूट किलोमीटर रेलमार्ग को कवर किया जाएगा, जिसमें दौलतपुर चौक-सरहिंद रेलखंड भी शामिल है। यह प्रणाली लाल सिग्नल पार करने, तेज गति और संभावित टक्कर जैसी स्थितियों में स्वतः हस्तक्षेप कर दुर्घटनाओं को रोकने में मदद करेगी। पढ़ें पूरी खबर...
अंबाला मंडल में 'कवच' प्रणाली से रेल सुरक्षा को मिलेगी नई धार
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अंबाला मंडल की शेष ब्रॉड गेज लाइनों पर 'कवच' प्रणाली स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 201 करोड़ रुपये की लागत आएगी और यह 811 रूट किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगी। इस पहल से न केवल अंबाला मंडल बल्कि ऊना सहित हिमाचल प्रदेश के रेल यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
'कवच' प्रणाली: स्वदेशी तकनीक से रेल दुर्घटनाओं पर लगेगी रोक
'कवच' भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यदि लोको पायलट किसी भी कारणवश लाल सिग्नल पार कर देता है, तो यह प्रणाली तुरंत सक्रिय होकर ट्रेन में स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देती है। इससे न केवल मानवीय त्रुटि के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका कम हो जाती है, बल्कि ट्रेन की गति को भी नियंत्रित किया जाता है, खासकर यदि वह तय गति सीमा से अधिक तेज चल रही हो।
टकराव की रोकथाम और खराब मौसम में भी सुरक्षा
'कवच' प्रणाली ट्रेनों के बीच टकराव को रोकने में भी अत्यंत प्रभावी है। यदि दो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने आ जाती हैं, तो यह तकनीक टक्कर को रोकने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त, धुंध, बारिश या कम दृश्यता जैसी खराब मौसम की परिस्थितियों में भी यह तकनीक लगातार ट्रेन संचालन पर नजर बनाए रखती है और चालक की सहायता करती है, जिससे सफर अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनता है।
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'कवच' प्रणाली: स्वदेशी तकनीक से रेल दुर्घटनाओं पर लगेगी रोक
'कवच' भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक स्वदेशी ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यदि लोको पायलट किसी भी कारणवश लाल सिग्नल पार कर देता है, तो यह प्रणाली तुरंत सक्रिय होकर ट्रेन में स्वचालित रूप से ब्रेक लगा देती है। इससे न केवल मानवीय त्रुटि के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की आशंका कम हो जाती है, बल्कि ट्रेन की गति को भी नियंत्रित किया जाता है, खासकर यदि वह तय गति सीमा से अधिक तेज चल रही हो।
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टकराव की रोकथाम और खराब मौसम में भी सुरक्षा
'कवच' प्रणाली ट्रेनों के बीच टकराव को रोकने में भी अत्यंत प्रभावी है। यदि दो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर आमने-सामने आ जाती हैं, तो यह तकनीक टक्कर को रोकने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त, धुंध, बारिश या कम दृश्यता जैसी खराब मौसम की परिस्थितियों में भी यह तकनीक लगातार ट्रेन संचालन पर नजर बनाए रखती है और चालक की सहायता करती है, जिससे सफर अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनता है।
अंबाला मंडल में 'कवच' के तहत आने वाले रेलखंड
इस परियोजना के तहत 811 रूट किलोमीटर रेललाइन को कवर किया जाएगा, जिसमें दौलतपुर चौक-सरहिंद रेलखंड भी शामिल है, जो सीधे ऊना जिले को देश के प्रमुख शहरों से जोड़ता है। अंबाला मंडल में जिन रेलखंडों पर यह प्रणाली स्थापित की जाएगी, उनमें अंबाला कैंट-लुधियाना, कालका-चंडीगढ़-न्यू मोरिंडा-साहनेवाल, सरहिंद-दौलतपुर चौक, राजपुरा-बठिंडा-श्रीगंगानगर और लुधियाना-धूरी-जाखल शामिल हैं। यह प्रणाली एलटीई आधारित संचार नेटवर्क के साथ स्थापित की जाएगी।
यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का अनुभव
रेलवे का यह कदम ऊना सहित हिमाचल के रेल यात्रियों के लिए सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। 'कवच' प्रणाली के लागू होने से सफर की समग्र गुणवत्ता में सुधार होगा और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद यात्रा का अनुभव प्राप्त होगा। यह भारतीय रेलवे की यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
इस परियोजना के तहत 811 रूट किलोमीटर रेललाइन को कवर किया जाएगा, जिसमें दौलतपुर चौक-सरहिंद रेलखंड भी शामिल है, जो सीधे ऊना जिले को देश के प्रमुख शहरों से जोड़ता है। अंबाला मंडल में जिन रेलखंडों पर यह प्रणाली स्थापित की जाएगी, उनमें अंबाला कैंट-लुधियाना, कालका-चंडीगढ़-न्यू मोरिंडा-साहनेवाल, सरहिंद-दौलतपुर चौक, राजपुरा-बठिंडा-श्रीगंगानगर और लुधियाना-धूरी-जाखल शामिल हैं। यह प्रणाली एलटीई आधारित संचार नेटवर्क के साथ स्थापित की जाएगी।
यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद यात्रा का अनुभव
रेलवे का यह कदम ऊना सहित हिमाचल के रेल यात्रियों के लिए सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। 'कवच' प्रणाली के लागू होने से सफर की समग्र गुणवत्ता में सुधार होगा और यात्रियों को अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद यात्रा का अनुभव प्राप्त होगा। यह भारतीय रेलवे की यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।