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चैत्र नवरात्रि 2018: देवी मां के इस मंदिर में तांबे की पेटी में छिपा है चमत्कारिक प्रकाश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 18 Mar 2018 12:34 PM IST
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varahi devi temple
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18 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही हैं। आइए जानते हैं ऐसे देवी मंदिर के बारे में जो रहस्यों से भरा हुआ है।
devidhura
उत्तराखंड के लोहाघाट से 60 किलोमीटर दूर शक्तिपीठ मां वाराही का मंदिर है जिसे देवीधुरा के नाम से भी जाना जाता हैं। इस मंदिर को 52 पीठों में से एक माना जाता है |
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पौराणिक कथाओं के अनुसार यह स्थान मां काली की उपासना का केन्द्र था। पहले यहां काली के गणों को प्रसन्न करने के लिये नरबलि की प्रथा थी। इस प्रथा को कालान्तर में स्थानीय लोगों द्वारा बन्द कर दिया गया ।
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वर्तमान समय में नर की बलि के स्थान पर 'बग्वाल' की परम्परा शुरू हुई, जिसमें चार खाम उत्तर की ओर से लमगड़िया, दक्षिण की ओर से चम्याल , पश्चिम की ओर से वालिक, पूर्व की ओर से गहडवाल के रणबांकुरे बिना जान की परवाह किये एक इंसान के रक्त निकलने तक युद्ध लड़ते हैं। लेकिन कुछ सालों से यह बग्वाल फल-फूलों से खेला जा रहा है।
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मुख्य मंदिर में तांबे की पेटिका में मां वाराही देवी की मूर्ति है। मगर पेटिका में रखी इस देवी मूर्ति के दर्शन अभी तक किसी ने नहीं किए हैं। यह मान्यता है कि कोई भी व्यक्ति मूर्ति के दर्शन खुली आंखों से नहीं कर सकता है, क्योंकि मूर्ति के तेज से उसकी आंखों की रोशनी चली जाती है। इसी कारण मूर्ति को ताम्रपेटिका में रखा हुआ है।