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दुर्लभ योग के साथ शुरू होगा सावन, भूलकर भी न करें ये 10 काम, भगवान शिव को पसंद नहीं
नीरज कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 23 Jul 2018 11:50 AM IST
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भगवान शिव की पूजा
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28 जुलाई से शुरू हो रहे सावन के महीने में दुर्लभ योग बन रहा है। यह भगवान शिव को मनाने का बहुत अच्छा समय है, लेकिन कुछ सावधानियों के साथ वरना नाराज हो जाएंगे।
सावन का सोमवार
- फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ में सेक्टर 30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि इस बार सावन में भगवान शिव की पूजा में अधिक ध्यान लगाना होगा। इस साल सावन का शुभारंभ 28 जुलाई से हो रहा है और समापन 26 अगस्त को होगा। कई सालों के बाद राजसी योग लग रहा है। पूरे 30 दिनों का सावन है और इस बार चार सोमवार होंगे। शुरुआत शनिवार और अंत रविवार को हो रहा है। पहले दिन 28 जुलाई को सूर्योदय 5 बजकर 42 मिनट पर होगा।
सावन का सोमवार
सेक्टर-30 स्थित शिव शक्ति मंदिर के प्रमुख पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री बताते हैं कि सावन का शुभारंभ श्रवण नक्षत्र, मकर राशि और कर्क लग्न में हो रहा है। मकर राशि का स्वामी शनि है। कर्क का स्वामी चंद्रमा है। चंद्रमा और शनि सम शत्रु है, इसलिए सावन का शुभांरभ राजसी योग में हो रहा है। राजसी योग में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और जप करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। पार्वती ने भी सावन में शिव जी को प्रसन्न करके उन्हें पति रूप में पाया था। इसलिए लड़कियां भी मनचाहा वर पा सकती हैं, बस सावन के महीने में सोमवार के व्रत रखने होंगे।
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Lord Shiva
अगर निर्जल व्रत नहीं रख सकते तो फलाहर के साथ व्रत रखा जा सकता है। शिव पुराण का पाठ करें। इस पुराण में बताया गया है कि सावन में इसका पाठ और श्रवण मुक्तिदायी होता है। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र शामिल करें। तांबे का नाग भगवान शिव को अर्पित करें। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार इससे कालसर्प, सर्प योग और राहु केतु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है। सूर्योदय से पहले उठकर भगवान शिव का ध्यान करें और नियमित शिवलिंग का जल से अभिषेक करें।
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Lord Shiva
- फोटो : File Photo
पुराणों के अनुसार सावन में किया गया जलाभिषेक अन्य दिनों में की अपेक्षा अधिक फलदायी होता है। धतूरा और भांग भगवान शिव को अर्पित करें। मिट्टी से शिवलिंग बनाकर नियमित इसकी पूजा करें। दूध दान करें। शाम के समय भगवान शिव की आरती पूजा करें। सावन के महीने में मांस-मदिरा आदि के सेवन नहीं करना चाहिए। शादी जैसा शुभ कार्य नहीं करने चाहिए। इसके अलावा ब्रह्मचर्य व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। सावन के महीने में एक व्रती को हरी सब्जियां और साग नहीं खाना चाहिए।