Ganesh Chaturthi 2022: 31 अगस्त से गणेशोत्सव का पर्व आरंभ होने वाला है। भाद्रपद माह के शु्क्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश उत्सव शुरू हो जाएगा और शुभ योग व मुहूर्त में घर-घर गणपति विराजेंगे। अनंत चतुर्दशी तिथि पर गणेश विसर्जन के साथ गणेशोत्सव का समापन होगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देवता माने गए हैं। भगवान श्रीगणेश विघ्न विनाशक और मंगलकारी देवता हैं। जहां श्रीगणेश का नित पूजन-अर्चन होता है वहां रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ का वास होता है। भवन के वास्तुदोष निवारण एवं सुख-शांति के लिए देवताओं में प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश को महत्वपूर्ण स्थान प्रदान किया गया है।
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Ganesh Chaturthi 2022: गणेश चतुर्थी पर वास्तु अनुसार ही घर लाएं भगवान गणेश की मूर्ति, हमेशा रहेगी सुख-समृद्धि
अनीता जैन ,वास्तुविद
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 25 Aug 2022 11:58 AM IST
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ganesh chaturthi 2022: मान्यता है भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन नहीं करना चाहिए। इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने पर कलंक का भागी बना पड़ता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है।
- फोटो : amar ujala
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गणपति मंदिर
- फोटो : Pixabay
सुख-समृद्धि देंगे ये गणेश-
सर्वमंगल की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना अनुकूल रहती है। सुख,शांति,समृद्धि की चाह रखने वालों को सफेद रंग के विनायक की मूर्ति लाना चाहिए। साथ ही,घर में इनका एक स्थाई चित्र भी लगाना चाहिए। घर में पूजा के लिए गणेश जी की शयन या बैठी मुद्रा हो तो अधिक शुभ होती है। यदि कला या अन्य शिक्षा के प्रयोजन से पूजन करना हो तो नृत्य गणेश की प्रतिमा या तस्वीर का पूजन लाभकारी है।
सर्वमंगल की कामना करने वालों के लिए सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना अनुकूल रहती है। सुख,शांति,समृद्धि की चाह रखने वालों को सफेद रंग के विनायक की मूर्ति लाना चाहिए। साथ ही,घर में इनका एक स्थाई चित्र भी लगाना चाहिए। घर में पूजा के लिए गणेश जी की शयन या बैठी मुद्रा हो तो अधिक शुभ होती है। यदि कला या अन्य शिक्षा के प्रयोजन से पूजन करना हो तो नृत्य गणेश की प्रतिमा या तस्वीर का पूजन लाभकारी है।
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बायीं सूंड वाले गणेश-
घर में बैठे हुए और बायीं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी विराजित करना चाहिए। दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं और उनकी साधना-आराधना कठिन होती है। वे देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं। इन्हें मंदिर में स्थापित किया जाता है।
घर में बैठे हुए और बायीं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी विराजित करना चाहिए। दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं और उनकी साधना-आराधना कठिन होती है। वे देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं। इन्हें मंदिर में स्थापित किया जाता है।
गणेश प्रतिमा को अंतिम रूप देता कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
काम में लगेगा मन-
कार्यस्थल पर गणेश जी की मूर्ति विराजित कर रहे हों तो खड़े हुए गणेश जी की मूर्ति लगाएं। इससे कार्यस्थल पर स्फूर्ति और काम करने की उमंग हमेशा बनी रहती है। ध्यान रहे कि खड़े हुए श्रीगणेश जी के दोनों पैर जमीन को स्पर्श करते हुए हों,इससे कार्य में स्थिरता आती है। कार्यक्षेत्र पर किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की प्रतिमा या चित्र लगाए जा सकते हैं,लेकिन यह ध्यान जरूर रखना चाहिए कि किसी भी स्थिति में इनका मुंह दक्षिण दिशा या नैऋय कोण में नहीं होना चाहिए।
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Ganesh Chaturthi
वास्तुदोष निवारण के लिए-
यदि घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है।
यदि घर के मुख्य द्वार पर एकदंत की प्रतिमा या चित्र लगाया गया हो तो उसके दूसरी तरफ ठीक उसी जगह पर दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे इस प्रकार से दूसरी प्रतिमा या चित्र लगाने से वास्तु दोषों का शमन होता है।
