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Jagnnath Rath Yatra 2026: कब से शुरू हो रही है जगन्नाथ रथ यात्रा? जानें तिथि, महत्व और अनोखी परंपराएं

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Mon, 20 Apr 2026 06:42 AM IST
सार

ओडिशा राज्य के पुरी शहर में स्थित जगन्नाथ मन्दिर से प्रारंभ होता है और भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा देवी को समर्पित होता है। इस अवसर पर तीनों देवताओं की दिव्य प्रतिमाओं को अत्यंत सुंदर और भव्य रूप से सजाए गए विशाल रथों में विराजमान किया जाता है। 

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Jagannath Rath Yatra 2026  Date Significance and Traditions in hindi
जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : amar ujala

Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के अत्यंत प्राचीन और पवित्र धार्मिक उत्सवों में से एक है, जो आस्था, भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। यह भव्य पर्व मुख्य रूप से ओडिशा राज्य के पुरी शहर में स्थित जगन्नाथ मन्दिर से प्रारंभ होता है और भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा देवी को समर्पित होता है। इस अवसर पर तीनों देवताओं की दिव्य प्रतिमाओं को अत्यंत सुंदर और भव्य रूप से सजाए गए विशाल रथों में विराजमान किया जाता है और उन्हें नगर भ्रमण कराते हुए गुंडीचा मन्दिर  तक ले जाया जाता है जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है। यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। इसमें लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से शामिल होते हैं। भक्त रथों की रस्सियों को खींचकर स्वयं को भगवान की सेवा से जोड़ने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र यात्रा में भाग लेने या दर्शन मात्र से व्यक्ति के जीवन में पुण्य की प्राप्ति होती है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। आइए जानते हैं जगन्नाथ रथ यात्रा कब से शुरू हो रही है। 

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Jagannath Rath Yatra 2026  Date Significance and Traditions in hindi
जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का आयोजन इस वर्ष जुलाई माह में बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ किया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पवित्र यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई गुरुवार को होगी। द्वितीया तिथि 15 जुलाई प्रातः 11:50 बजे से शुरू होकर 16 जुलाई प्रातः 08:52 बजे तक रहेगी। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी को रथों में विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। इस भव्य उत्सव का समापन बहुदा यात्रा यानी वापसी यात्रा के साथ होगा, जो 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को आयोजित की जाएगी।  यह पूरी यात्रा भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और पुण्यकारी मानी जाती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान के दर्शन और रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

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Jagannath Rath Yatra 2026  Date Significance and Traditions in hindi
जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock

भगवान का नगर भ्रमण
जगन्नाथ रथ यात्रा में यह मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए जगन्नाथ मंदिर से बाहर आते हैं। वे अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करते हैं। यह अवसर भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि इसमें उन्हें प्रत्यक्ष रूप से भगवान के दर्शन का सौभाग्य मिलता है।

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जगन्नाथ रथ यात्रा - फोटो : Adobe Stock

तीन दिव्य रथों की विशेषता
इस यात्रा में तीनों देवताओं के लिए अलग-अलग भव्य रथ बनाए जाते हैं। भगवान जगन्नाथ का रथ नंदी घोष 16 पहियों का होता है, बलभद्र जी का रथ ‘तालध्वज’ 14 पहियों वाला होता है, और सुभद्रा जी का रथ ‘दर्पदलन’ 12 पहियों का होता है। इन रथों को अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ भक्तों द्वारा खींचा जाता है, जो भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

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Jagannath Rath Yatra - फोटो : adobe stock

छेरा पहनरा परंपरा
यात्रा शुरू होने से पहले एक महत्वपूर्ण परंपरा ‘छेरा पहनरा’ निभाई जाती है। इसमें ओडिशा के गजपति राजा स्वयं सोने की झाड़ू से रथों की सफाई करते हैं। यह परंपरा विनम्रता और समानता का संदेश देती है कि भगवान के सामने सभी समान हैं, चाहे वह राजा हो या आम भक्त।

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