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Kajri Teej 2019: जानें कजरी तीज का शुभ मुहूर्त, कैसे करें पूजा

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत राय Updated Sun, 18 Aug 2019 02:16 PM IST
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Kajri teej 2019 date and significance time of puja and vrat
- फोटो : अमर उजाला

कजरी तीज, जिसे कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है। कजरी तीज भादो मास में कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक यह तिथि जुलाई व अगस्त के महीने में आती है। यह त्योहार मुख्य रूप से महिलाओं का पर्व है। हरियाली जीत, हरितालिका तीज की तरह कजरी तीज भी सुहागिन महिलाओं के लिए अहम पर्व है। 

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Kajri teej 2019 date and significance time of puja and vrat
- फोटो : अमर उजाला

कजरी तीज के मौके पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए कजरी तीज का व्रत रखते हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए यह व्रत रखती है। कजरी तीज के मौके पर जौ, गेहूं, चने और चावल के सत्तू में घी और मेवा को मिलाकर तरह-तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं। इस दिन महिलाएं चंद्रोदय के बाद भोजन करके व्रत तोड़ती हैं। 

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Kajri teej 2019 date and significance time of puja and vrat
- फोटो : अमर उजाला

कजरी तीज के मौके पर गायों की विशेष रूप से पूजा की जाती है। आटे की सात लोइयां बनाकर उनपर घी, गुड़ रखकर गाय को खिलाने के बाद भोजन किया जाता है। कजरी तीज के मौके पर झूले डाले जाते हैं और महिलाएं एकत्रित होकर नाचती-गाती हैं। 

Kajri teej 2019 date and significance time of puja and vrat

कजरी तीज 18 अगस्त को मनाई जाएगी। कजरी तीज की शुभ मुहूर्त 17 अगस्त के रात 10 बजकर 48 मिनट से शुरू होकर 18 अगस्त के 1 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। कजरी तीज के दिन नीमड़ी मां की पूजा की जाती है। पूजन से पहले मिट्टी व गोबर से दीवार के सहारे एक तालाब जैसी आकृति बनाई जाती है। और उसके पास नीम की टहनी को रोप देते हैं। तालाब में कच्चा दूध और जल डालते हैं और उसके किनारे दीया जलाकर रखते हैं। 

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Kajri teej 2019 date and significance time of puja and vrat
- फोटो : Amar Ujala

सबसे पहले नीमड़ी माता को जल व रोली के छींटे दें और चावल चढ़ाएं। इसके बाद नीमड़ी माता के पीछे दीवार पर मेहंदी, रोली और काजल की 13-13 बिंदिया ऊंगली से लगाएं। मेंहदी, रोली की बिंदी अनामिका अंगुली से लगाएं और काजल की बिंदी तर्जनी अंगुली से लगानी चाहिए। फिर नीमड़ी माता को मोली चढ़ाने के बाद मेहंदी, काजल और वस्त्र चढ़ाएं। दीवार पर लगी बिंदियों के सहारे लच्छा लगा दें। नीमड़ी माता को कोई फल चढ़ाएं और पूजा के कलश पर रोली से टीका लगाकर लच्छा बांधें। पूजा स्थल पर बने तालाब के किनारे पर रखे दीपक के उजाले में नींबू, ककड़ी, नीम की डाली, नाक की नथ, साड़ी का पल्ला आदि देखें। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें।

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