Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का त्योहार 29 अक्तूबर 2026, गुरुवार को मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाओं के लिए यह दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ करवा माता की पूजा करती हैं। इसके बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ की पूजा संपूर्ण विधि-विधान से करना शुभ माना जाता है। इस दौरान करवा माता की उपासना के साथ चंद्रदेव की पूजा, मंत्र जाप और आरती का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ करने से व्रत का पुण्य फल प्राप्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि करवा चौथ की पूजा के दौरान किन मंत्रों का जाप करना चाहिए और कौन-सी आरती पढ़नी चाहिए।
करवा चौथ 2026: इन आरती-मंत्रों के बिना अधूरा है करवा चौथ का व्रत, पाठ करने से मिलेगा मनचाहा आशीर्वाद
Karwa Chauth 2026: करवा चौथ 29 अक्तूबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है कि करवा माता की पूजा, मंत्र जाप और आरती करने से सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।
- पहला मंत्र: ॐ सोम सोमाय नमः।
- दूसरा मंत्र: ॐ चंद्राय नमः।
करवा माता की आरती
ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया
ॐ जय करवा मैया
सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी
ॐ जय करवा मैया।
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती
दीर्घायु पति होवे, दुख सारे हरती..
ॐ जय करवा मैया
होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे
ॐ जय करवा मैया
करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे
ॐ जय करवा मैया
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अन्धे को आँख देत, कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ।।
'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।