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Krishna Janmashtami 2026: 4 या 5 सितंबर कब है कृष्ण जन्माष्टमी? जानें सही तिथि और निशीथ काल पूजा मुहूर्त

Sat, 18 Jul 2026 10:29 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 18 Jul 2026 10:29 AM IST
सार

Janmashtami 2026 Date: वर्ष 2026 में जन्माष्टमी की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम है कि यह पर्व 4 या 5 सितंबर को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी की सही तिथि, व्रत का समय और पूजा का शुभ मुहूर्त।

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Krishna Janmashtami 2026 When Will Janmashtami Be Celebrated 4 or 5 September Know the Date and Puja Muhurat
कृष्ण जन्माष्टमी 2026 - फोटो : amar ujala

Krishna Janmasthami 2026 Date: सनातन परंपरा में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे कृष्ण जन्माष्टमी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार इसी शुभ तिथि पर द्वापर युग में देवकीनंदन श्रीकृष्ण ने मथुरा में अवतार लिया था। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु विधि-विधानपूर्वक भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं, व्रत रखते हैं और निशिता काल में उनके जन्मोत्सव का आनंद मनाते हैं। देशभर के मंदिरों में इस दिन भक्तिमय वातावरण छाया रहता है, कृष्ण लीलाओं का मंचन किया जाता है तथा दही हांडी के उल्लासपूर्ण आयोजन होते हैं। किंतु वर्ष 2026 में जन्माष्टमी की सही तिथि को लेकर भक्तों के मध्य असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आइए पंचांग के आधार पर इस विषय में स्पष्टता प्राप्त करें।


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कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुभ तिथि - फोटो : instagram

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 शुभ तिथि
ज्योतिष गणना के अनुसार, भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 4 सितंबर की रात्रि 2 बजकर 25 मिनट पर होगा, तथा इसका समापन अगले दिन, अर्थात 5 सितंबर को रात्रि 12 बजकर 13 मिनट पर होगा। सनातन परंपरा में किसी भी पर्व के निर्धारण में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है, और साथ ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के निशिता मुहूर्त को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इन दोनों धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार, इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व 4 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। इस शुभ तिथि पर संपूर्ण भारतवर्ष में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास का दिव्य वातावरण देखने को मिलेगा।

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पूजन का शुभ मुहूर्त एवं निशिता काल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

पूजन का शुभ मुहूर्त एवं निशिता काल
भगवान श्रीकृष्ण की उपासना का सर्वाधिक फलदायी समय निशिता काल माना गया है, क्योंकि इसी घड़ी में उनका अवतरण हुआ था। इस वर्ष निशिता पूजन का शुभ मुहूर्त 4 सितंबर की रात्रि 11 बजकर 57 मिनट से आरंभ होकर मध्यरात्रि 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस दिव्य मुहूर्त में ही भगवान बाल गोपाल के जन्मोत्सव का उत्सव भक्तिभाव से मनाया जाएगा। जो साधक जन्माष्टमी का व्रत धारण करेंगे, उनके लिए व्रत पारण का शुभ समय 5 सितंबर की प्रातः 6 बजकर 1 मिनट निर्धारित किया गया है।

 

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जन्माष्टमी की रात्रि पूजन विधि - फोटो : अमर उजाला

जन्माष्टमी की रात्रि पूजन विधि

  • सर्वप्रथम पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा अथवा चित्र को एक स्वच्छ आसन पर विराजमान करें।
  • भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के शुभ क्षण अर्थात ठीक मध्यरात्रि 12 बजे बाल गोपाल की प्रतिमा को पंचामृत, अर्थात दूध, दही, शहद, घी और शुद्ध जल से स्नान कराएं।
  • पंचामृत स्नान के पश्चात शुद्ध जल से पुनः स्नान कराकर नए वस्त्र एवं आभूषण धारण कराएं।
  • स्नान के पश्चात शंखनाद करें और घंटी-घड़ियाल बजाकर संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय एवं दिव्य बनाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
  • श्रद्धापूर्वक वैदिक मंत्रों, श्रीकृष्ण स्तुति तथा "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
  • भगवान बाल गोपाल को झूला झुलाएं और उनकी आरती उतारें।
  • श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, धनिया की पंजीरी तथा विविध प्रकार के भोग अर्पित करें, क्योंकि माखन-मिश्री भगवान को अत्यंत प्रिय माना जाता है।
  • अंत में भगवान से क्षमा प्रार्थना करते हुए आरती करें और प्रसाद को परिवार तथा अन्य भक्तों में वितरित करें।
  • इस पावन विधि का श्रद्धापूर्वक पालन करते हुए भक्तजन व्रत एवं पूजन सम्पन्न करें, तथा अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण करें।
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जन्माष्टमी व्रत के नियम - फोटो : instagram

जन्माष्टमी व्रत के नियम

  • व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान श्रीकृष्ण के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • दिनभर फलाहार अथवा निर्जल व्रत रखें, जैसा भक्त की शक्ति एवं परंपरा हो।
  • दिनभर भगवान श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन, मंत्र जाप एवं श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें।
  • निशिता काल में विधिवत पूजा करने के पश्चात ही व्रत का पारण करें।
  • व्रत के दौरान क्रोध, वाद-विवाद और तामसिक विचारों से दूर रहें, तथा मन को सात्विक बनाए रखें।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।   

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