हिंदू धर्म में हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। यह दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। सावन महीने में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को गजानन संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने पर जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख, शांति व समृद्धि का आगमन होता है। इस वर्ष यह व्रत 2 अगस्त को रखा जाएगा।
Sankashti Chaturthi: सावन में आ रही है गजानन संकष्टी चतुर्थी, इस दिन की पूजा से खुल सकते हैं तरक्की के रास्ते
*Sawan Sankashti Chaturthi: सावन महीने की संकष्टी चतुर्थी 2 अगस्त 2026 शनिवार को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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जीवन में आने वाली बाधाएं होती हैं दूर
द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 1 अगस्त की रात 11:07 बजे शुरू होगी और 2 अगस्त को सुबह 11:15 बजे समाप्त होगी। हालांकि, उदया तिथि और चंद्रोदय को ध्यान में रखते हुए संकष्टी चतुर्थी का व्रत 2 अगस्त को ही किया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों को विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं।
नोट कर लें समय
अगर पूजा के शुभ समय की बात करें तो सुबह 7:24 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक का समय शुभ माना गया है। वहीं, व्यापार या कारोबार में तरक्की की कामना रखने वाले लोग सुबह 9:05 बजे से 10:46 बजे के बीच पूजा कर सकते हैं। सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक अमृत मुहूर्त रहेगा, जिसे पूजा के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त और अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसे करें गणेश जी की पूजा
व्रत के दिन सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। शाम के समय पूजा स्थान पर चौकी बिछाकर उस पर लाल वस्त्र रखें और गणेश जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद दीपक और धूप जलाएं। भगवान गणेश को रोली, चंदन और फूल अर्पित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाएं और पूजा में दुर्वा जरूर चढ़ाएं, क्योंकि यह गणेश जी को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। पूजा के बाद संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें और आरती करें। रात में चंद्रमा निकलने पर जल, दूध, अक्षत और फूल मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत का पारण करें।
सारे विघ्न होते हैं दूर
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
धार्मिक मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से भगवान गणेश भक्तों के सभी विघ्न दूर करते हैं। खासकर सावन महीने में इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है। नियमित रूप से यह व्रत करने वाले लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं, मानसिक तनाव कम होता है, नए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है और परिवार में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहती है।
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