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Somvati Amavasya 2024: 30 या 31 दिसंबर कब है साल की अंतिम अमावस्या ? यहां जानें तिथि और पूजा विधि
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा कुमारी
Updated Wed, 18 Dec 2024 01:07 PM IST
सार
Somvati Amavasya 2024:अमावस्या तिथि प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है, जिस पर चंद्रमा नहीं दिखाई देता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व है, इस दिन स्नान-दान करने से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती हैं।
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Somvati Amavasya 2024
- फोटो : Amar Ujala
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Somvati Amavasya 2024: अमावस्या तिथि प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है, जिस पर चंद्रमा नहीं दिखाई देता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व है, इस दिन स्नान-दान करने से पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती हैं। मान्यता है कि अमावस्या पर पिंडदान करने पर पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है, जिससे सभी ग्रह दोष समाप्त होते हैं। इस दौरान सभी अमावस्याओं में पौष माह में आने वाली अमावस्या को बेहद खास माना जाता है, क्योंकि इस महीने को छोटा पितृ पक्ष भी कहते हैं। इस वर्ष 30 दिसंबर, 2024 सोमवार को पौष अमावस्या मनाई जाएगी।
सोमवार होने के कारण यह सोमवती अमावस्या होगी। पंचांग के अनुसार सोमवती अमावस्या साल की अंतिम अमावस्या होगी, इसलिए इस दिन भगवान शिव की पूजा करने के साथ-साथ दान से जुड़े कार्य करने पर नववर्ष में मनचाहे परिणामों की प्राप्ति हो सकती हैं। ऐसे में आइए इस दिन के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में जानते हैं।
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पौष अमावस्या तिथि का प्रारंभ 30 दिसंबर को प्रात: 4 बजकर 1 मिनट से होगा
- फोटो : अमर उजाला
सोमवती अमावस्या तिथि
ज्योतिष गणना के अनुसार पौष अमावस्या तिथि का प्रारंभ 30 दिसंबर को प्रात: 4 बजकर 1 मिनट से होगा, इसका समापन 31 दिसंबर 2024 को तड़के 3 बजकर 56 मिनट पर है।
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स्नान-दान मुहूर्त 2024
- फोटो : अमर उजाला
स्नान-दान मुहूर्त 2024
पंचांग के अनुसार 30 दिसंबर 2024 को सोमवती अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05 बजकर 24 से सुबह ही 06:19 मिनट तक है। यह समय स्नान के लिए बेहद शुभ है।
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सोमवती अमावस्या पर वृद्धि योग का निर्माण होगा, जो प्रात:काल से लेकर रात 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगा
- फोटो : अमर उजाला
शुभ योग
सोमवती अमावस्या पर वृद्धि योग का निर्माण होगा, जो प्रात:काल से लेकर रात 8 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इस दौरान मूल नक्षत्र भी बनेगा, जो रात 23:57 मिनट तक बना रहेगा। आप इस अवधि में महादेव और अपने पितरों की आत्मशांति के लिए पूजा पाठ कर सकते हैं।
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पौष अमावस्या पर पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर लें
- फोटो : freepik
पूजा विधि
पौष अमावस्या पर पूजा करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर लें।
स्नान के बाद साफ वस्त्रों को धारण करें और तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करें।
इस दौरान ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जाप करें।
इसके बाद खीर बनाकर उपले का कोर जलाएं।
उसपर खीर का भोग लगाएं।
इस दौरान एक लोटे में जल लेकर दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके पितरों का तर्पण करें।
अंत में सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे।
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