{"_id":"6794878be143bcb1a109e656","slug":"kumbh-mela-2025-panchkoshi-parikrama-and-importance-panchkoshi-parikrama-karne-ke-labh-2025-01-25","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Maha Kumbh 2025: महाकुंभ स्नान के साथ पंचकोसी परिक्रमा जरूर करें, बनेंगे दोगुने पुण्य के भागी","category":{"title":"Maha Kumbh","title_hn":"महाकुंभ","slug":"maha-kumbh"}}
Maha Kumbh 2025: महाकुंभ स्नान के साथ पंचकोसी परिक्रमा जरूर करें, बनेंगे दोगुने पुण्य के भागी
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Sun, 26 Jan 2025 07:39 AM IST
सार
माना जाता है कि महाकुंभ में संगम में स्नान के साथ ही पंचकोसी परिक्रमा करने से आत्मा की शुद्धि होती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं पंचकोसी यात्रा और इसके लाभों के बारे में।
विज्ञापन
महाकुंभ क्या है पंचकोसी परिक्रमा?
- फोटो : Amar Ujala
Panchkoshi Parikrama: प्रयागराज में महाकुंभ का शुभारंभ 13 जनवरी से हो चुका है, जिसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान के लिए पहुंच रहे हैं। महाकुंभ में संगम में स्नान का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस पवित्र जल में डुबकी लगाने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही पंचकोसी परिक्रमा करने से आत्मा की शुद्धि होती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। ऐसे में आइए जानते हैं पंचकोसी यात्रा और इसके लाभों के बारे में।
Trending Videos
पंचकोसी परिक्रमा के लाभ
- फोटो : Amar Ujala
पंचकोसी परिक्रमा के लाभ
पंचकोसी परिक्रमा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और पवित्रता का अनुभव होता है। यह पांच विकारों काम, क्रोध, मोह, मद और लोभ से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। इसे करने से सभी तीर्थों के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है।
पंचकोसी परिक्रमा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और पवित्रता का अनुभव होता है। यह पांच विकारों काम, क्रोध, मोह, मद और लोभ से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। इसे करने से सभी तीर्थों के दर्शन का पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है।
PM Modi Kumbh Snan: प्रधानमंत्री मोदी ने क्यों चुना कुंभ स्नान के लिए 5 फरवरी का दिन? जानें इस तिथि का महत्व
Mahakumbh 2025: महाकुंभ स्नान के दौरान करें इन मंत्रों का जाप, मिलेगी समस्त पापों से मुक्ति
विज्ञापन
विज्ञापन
महाकुंभ में पंचकोसी परिक्रमा का महत्व
- फोटो : पीटीआई
महाकुंभ में पंचकोसी परिक्रमा का महत्व
2025 का महाकुंभ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसा दुर्लभ योग 144 वर्षों के बाद आया है। महाकुंभ में संगम में स्नान और पंचकोसी परिक्रमा करने से न केवल व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि उनके परिवार और पितरों को भी पुण्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि यह परिक्रमा करने से व्यक्ति को जीवन के अंतिम समय में सद्गति प्राप्त होती है।
2025 का महाकुंभ विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसा दुर्लभ योग 144 वर्षों के बाद आया है। महाकुंभ में संगम में स्नान और पंचकोसी परिक्रमा करने से न केवल व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिलता है, बल्कि उनके परिवार और पितरों को भी पुण्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि यह परिक्रमा करने से व्यक्ति को जीवन के अंतिम समय में सद्गति प्राप्त होती है।
साधु-संतों की भागीदारी
- फोटो : Adobe Stock
साधु-संतों की भागीदारी
पंचकोसी परिक्रमा साधु-संतों के लिए भी अत्यधिक महत्व रखती है। नागा साधु और अखाड़ों के संत भी इस परिक्रमा में भाग लेते हैं। इस दौरान तीर्थ स्थलों के दर्शन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है, जो ज्ञान, विवेक और आत्मबल को बढ़ाने में सहायक होता है।
पंचकोसी परिक्रमा साधु-संतों के लिए भी अत्यधिक महत्व रखती है। नागा साधु और अखाड़ों के संत भी इस परिक्रमा में भाग लेते हैं। इस दौरान तीर्थ स्थलों के दर्शन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है, जो ज्ञान, विवेक और आत्मबल को बढ़ाने में सहायक होता है।
विज्ञापन
आध्यात्मिक लाभ के लिए करें परिक्रमा
- फोटो : adobe stock
आध्यात्मिक लाभ के लिए करें परिक्रमा
महाकुंभ में संगम में डुबकी लगाने के साथ पंचकोसी परिक्रमा अवश्य करें। यह यात्रा न केवल आत्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
महाकुंभ में संगम में डुबकी लगाने के साथ पंचकोसी परिक्रमा अवश्य करें। यह यात्रा न केवल आत्मिक शांति प्रदान करती है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

कमेंट
कमेंट X