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Dasha Mata Vrat Katha: दशा माता की कृपा से राजा नल को भी मिल गया था अपना राज्य, यहां पढ़ें सम्पूर्ण व्रत कथा

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Fri, 13 Mar 2026 12:33 PM IST
सार

Dasha Mata Vrat: आज 13 मार्च, शुक्रवार को दशा माता का व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु दशा माता का व्रत पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ रखता है उसे अपने जीवन में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। आइए यहां पढ़ते हैं दशा माता की सम्पूर्ण व्रत कथा। 

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Dasha Mata Vrat Katha 13 March yahan padhein sampoorn vrat katha in hindi disprj
दशा माता व्रत कथा - फोटो : amar ujala

Dasha Mata Vrat Katha: आज चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। आज के दिन दशा माता का व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दशा माता देवी पार्वती का ही एक स्वरूप हैं जिनका वाहन ऊंट है। इस व्रत में दशा माता के साथ-साथ नीम, पीपल और बरगद  की पूजा भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के  अनुसार ऐसा कहा जाता है कि जो भी भक्त आज के दिन दशा माता का डोरा बांधता है उसको कभी भी धन संपत्ति की कमी नहीं होती। इस व्रत का पूरा लाभ उठाने के लिए दशा माता की व्रत कथा जरूर पढ़नी चाहिए। यहां पढ़ें सम्पूर्ण व्रत कथा। 


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दशा माता व्रत की कथा

प्राचीन काल में नल नाम के एक प्रतापी राजा अपनी पत्नी दमयंती के साथ राज करते थे। रानी दमयंती दशा माता की भक्त थी और पूरी श्रद्धा के साथ उनका व्रत रखती और पूजा अर्चना करती थीं। एक बार राजा नल ने दमयंती के गले में धागा देखकर इसके विषय में पूछा तो रानी ने दशा माता की पूजा अर्चना के बारे में सब उन्हें बता दिया।राजा नल ने उनकी बात पर भरोसा नहीं किया और उनके गले से डोरा निकाल कर फेंक दिया। 

ऐसा करने से दशा माता राजा नल पर कुपित हो गईं। इसके परिणामस्वरुप राजा नल जुए में अपना राजपाठ हार कर वन में भटकने लगे। इतना ही नहीं राजा नल पर चोरी का आरोप भी लगा। रजा-रानी की स्थिति यह हो गई कि उन्हें अपने भरण-पोषण के लिए जंगल से लकड़ी काटकर बेचने लगे।  रानी दमयंती का विश्वासदशा माता पर अटूट था और जब दोबारा से चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि आई तब राजा रानी दोनों ने ही पूरी श्रद्धा के साथ माता का व्रत किया। उसी रात दशा माता ने रानी को स्वप्न में आकर आशीर्वाद दीया। जब रानी ने राजा को यह बात बताई तब राजा ने कहा, मां का आशीर्वाद रहा तो हमारे पुराने दिन अवश्य लौट आएंगे। धीरे-धीरे राजा की स्थिति में सुधरने लगी। और दशा माता की कृपा से राजा नल को अपना खोया राज्य पुनः मिल गया। इसी तरह जो भी महिला-पुरुष ये व्रत करता है उसके जीवन में खुशहाली और सुख-समृद्धि बनी रहती है। इसलिए सभी भक्तों को श्रद्धापूर्वक मां दशा माता की पूजा करनी चाहिए और स्त्रियों को कथा-पूजन कर धागा धारण करना चाहिए।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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