दशहरा पर्व हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है। इस दिन रावण के पुतले को जलाने की परंपरा है। कहते हैं प्रभु श्रीराम ने आज ही के दिन अहंकारी रावण का वध कर लंका पर विजय पाई थी। इसलिए इस त्योहार को अधर्म पर धर्म की और बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। दशहरा के दिन जहां रावण दहन का आयोजन शहर शहर होता है। वहीं कुछ ऐसे स्थान भी हैं जहां इस दिन रावण की पूजा पूरे अनुष्ठान के साथ की जाती है। आइए जानते हैं कहां पर रावण को दशहरा के दिन पूजा जाता है।
Dussehra 2020: भारत में इन जगहों पर नहीं फूंका जाता है रावण का पुतला, बल्कि होती है पूजा
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महाराष्ट्र, गढ़चिरौली
महाराष्ट्र के अमरावती में स्थित गढ़चिरौली नामक स्थान पर आदिवासी समुदाय द्वारा रावण का पूजन किया जाता है। यहां के आदिवासी समुदाय के लोग रावण को अपना देवता मानकर उसकी आराधना करते हैं।
काकिनाड, आंध्र प्रदेश
आंध्रप्रदेश के काकिनाड में भी रावण की पूजा होती है। यहां रावण का मंदिर बना हुआ है। यहां आने वाले लोग भगवान राम की शक्तियों को मानने से इनकार नहीं करते, लेकिन वे रावण को ही शक्ति सम्राट मानते हैं। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा की जाती है।
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के इस कस्बे में रावण की पूजा की जाती है। मान्यता है कि रावण ने यहां पर भगवान शिव की तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष का वरदान दिया था। यहां के लोग रावण के पुतले का दहन नहीं, बल्कि उसकी पूजा करते हैं।
रावणग्राम, मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के विदिशा में रावन के नाम पर एक गांव है रावणग्राम। यहां पर दशहरा के दिन रावन के पुतले का दहन नहीं किया जाता है, बल्कि यहां के लोग रावण को भगवान के रूप में पूजते हैं। इस गांव में रावण की विशालकाय मूर्ति भी स्थापित है।

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