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Kedarnath Dham Yatra 2026: कब खुलेंगे बाबा केदार के कपाट? जानिए भीष्म श्रृंगार क्यों खास है

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Tue, 21 Apr 2026 10:57 AM IST
सार

केदारनाथ धाम यात्रा 2026 में 22 अप्रैल को कपाट खुलेंगे। जानें चारधाम यात्रा से जुड़ी अपडेट और भीष्म श्रृंगार की खास परंपरा का महत्व।
 

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Kedarnath Dham Yatra 2026 Kedarnath Opening Date and Secrets Behind Bhishma Shringar
भीष्म श्रृंगार - फोटो : amar ujala

Bheeshm Shringar Ka Rahasya: हर साल अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा की शुरुआत होती है। इस यात्रा में गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम शामिल हैं। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट भक्तों के लिए खोल दिए गए हैं, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ मंदिर के द्वार भी दर्शन के लिए खुलने जा रहे हैं। केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलते ही एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसमें सबसे पहले बाबा केदारनाथ का ‘भीष्म श्रृंगार’ हटाया जाता है। सर्दियों के दौरान शिवलिंग की सुरक्षा के लिए किया गया यह श्रृंगार धार्मिक आस्था और परंपरा का अहम हिस्सा माना जाता है। आगे जानते हैं इससे जुड़ी खास बातें। 


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Kedarnath Dham Yatra 2026 Kedarnath Opening Date and Secrets Behind Bhishma Shringar
मंदिर बंद करने से पहले बाबा केदारनाथ के शिवलिंग पर एक विशेष प्रक्रिया की जाती है, जिसे ‘भीष्म श्रृंगार’ कहा जाता है। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

भीष्म श्रृंगार क्या है?
केदारनाथ मंदिर हर साल सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण बंद कर दिया जाता है। मंदिर बंद करने से पहले बाबा केदारनाथ के शिवलिंग पर एक विशेष प्रक्रिया की जाती है, जिसे ‘भीष्म श्रृंगार’ कहा जाता है। इस परंपरा के तहत शिवलिंग पर पर्याप्त मात्रा में शुद्ध घी लगाया जाता है और फिर उसे सफेद सूती कपड़े से अच्छी तरह ढक दिया जाता है। यह परत शिवलिंग को कड़ाके की ठंड और बर्फ के असर से बचाने में मदद करती है। महीनों तक मंदिर बंद रहने के दौरान यही श्रृंगार शिवलिंग की प्राकृतिक अवस्था को सुरक्षित रखता है, इसलिए इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

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Kedarnath Dham Yatra 2026 Kedarnath Opening Date and Secrets Behind Bhishma Shringar
भीष्म श्रृंगार एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है, जिसे हर साल शीतकालीन बंदी से पहले विधि-विधान के साथ किया जाता है। - फोटो : ANI

भीष्म श्रृंगार का रहस्य 
केदारनाथ धाम में भीष्म श्रृंगार एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है, जिसे हर साल शीतकालीन बंदी से पहले विधि-विधान के साथ किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी कर्नाटक के वीरशैव लिंगायत समुदाय के पुजारियों के पास होती है, जो पीढ़ियों से इस सेवा को निभाते आ रहे हैं। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है और इसमें करीब 5 घंटे का समय लगता है। सबसे पहले बाबा केदारनाथ के स्वयंभू शिवलिंग को शुद्ध किया जाता है, जिसके बाद उस पर शुद्ध घी का लेपन किया जाता है। इसके बाद शिवलिंग को सफेद सूती कपड़े से पूरी तरह ढक दिया जाता है। यह परत बर्फ, ठंड और कठोर मौसम से शिवलिंग की रक्षा करने के लिए होती है। श्रृंगार पूरा होने के बाद बाबा केदार को विशेष भोग अर्पित किया जाता है, जिसमें मौसमी फल और ड्राई फ्रूट्स शामिल होते हैं। इस भोग को ‘आर्घा’ कहा जाता है। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं, और बाबा केदारनाथ की डोली को उनके शीतकालीन गद्दीस्थल की ओर ले जाया जाता है।

Kedarnath Dham Yatra 2026 Kedarnath Opening Date and Secrets Behind Bhishma Shringar
कपाट खुलने की प्रक्रिया की शुरुआत भीष्म श्रृंगार को हटाने से होती है। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

केदारनाथ के कपाट कौन खोलता है?
केदारनाथ धाम के कपाट हर वर्ष अक्षय तृतीया के बाद विधि-विधान के साथ खोले जाते हैं। इस पवित्र कार्य को कर्नाटक के वीरशैव लिंगायत समुदाय के पुजारी संपन्न करते हैं, जो परंपरागत रूप से इस सेवा से जुड़े हुए हैं। कपाट खुलने की प्रक्रिया की शुरुआत भीष्म श्रृंगार को हटाने से होती है। इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल से शुद्ध अभिषेक किया जाता है और वैदिक मंत्रों का उच्चारण होता है। फिर पंचामृत स्नान कराया जाता है, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का उपयोग होता है। इसके पश्चात बाबा केदारनाथ को नए फूलों से सजाया जाता है, भस्म का लेप किया जाता है और चंदन का तिलक लगाया जाता है। जब यह विशेष श्रृंगार पूरा हो जाता है, तब मंदिर के द्वार आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं और भक्तों को दर्शन का अवसर मिलता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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