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Adhikmas 2026: अधिकमास में क्यों है शुभ कार्यों पर रोक, जानें कैसे पड़ा इसका पुरुषोत्तम मास नाम?

धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shweta Singh Updated Sun, 19 Apr 2026 06:43 PM IST
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सार

अधिक मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा, जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। जानें इस पवित्र अवधि का महत्व, क्या करें- क्या न करें और क्यों इसे भगवान विष्णु का विशेष मास माना जाता है।

Adhik Maas 2026 Why is Malmas Called Purushottam Maas Know the Meaning and Importance
अधिक मास 17 मई से होकर 15 जून तक रहेगी। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

Purushottam Maas Significance: इस वर्ष अधिक मास का शुभ और धार्मिक रूप से विशेष महत्व देखने को मिल रहा है। इसकी शुरुआत 17 मई से होकर 15 जून तक रहेगी। हिंदू पंचांग के अनुसार इसे अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह समय पूरी तरह से आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ और भक्ति को समर्पित माना जाता है। इस अवधि में स्नान-दान, यज्ञ, हवन और तप जैसे धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है और मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दौरान विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। दिलचस्प बात यह है कि जिस समय को सामान्य रूप से शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, उसी समय को भगवान विष्णु ने अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास का दर्जा दिया। आइए जानते हैं कि अधिक मास क्यों कहलाता है पुरुषोत्तम मास। 

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Adhik Maas 2026 Why is Malmas Called Purushottam Maas Know the Meaning and Importance
पुरुषोत्तम मास - फोटो : Adobe Stock

क्यों कहलाता है पुरुषोत्तम मास?
हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास एक ऐसा विशेष समय होता है जिसका कोई स्थायी अधिपति देवता नहीं माना जाता। इसी कारण इसे पहले देव-पूजन और मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता था और यह त्याज्य मास के रूप में जाना जाता था। मान्यता के अनुसार जब इस मास को उपेक्षित और अशुभ समझा जाने लगा, तब इसकी पीड़ा देखकर स्वयं भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने इसे अपना संरक्षण प्रदान किया। उन्होंने इस मास को अपना नाम देते हुए पुरुषोत्तम मास घोषित किया और कहा कि अब यह मास भी उन्हीं के नाम से जाना जाएगा। भगवान विष्णु ने यह भी आशीर्वाद दिया कि जो भी भक्त इस अवधि में जप, तप, दान और भक्ति करता है, उसे सामान्य समय की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होगा। इसी दिव्य कृपा के कारण अधिक मास को आज अत्यंत पवित्र और फलदायी समय माना जाता है, जो आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर प्रदान करता है।

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अधिक मास में क्या करें और क्या न करें - फोटो : Adobe Stock

अधिक मास में क्या करें और क्या न करें

  • अधिक मास को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक साधना का समय माना गया है, इसलिए इस दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए और कुछ धार्मिक कार्यों को अपनाना चाहिए।
  • इस अवधि में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई, मुंडन या नामकरण संस्कार करना वर्जित माना गया है।
  • नया घर खरीदना या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य भी इस महीने में टालने की सलाह दी जाती है।
  • मान्यता है कि अधिक मास में कोई नया व्रत या बड़ा संकल्प शुरू नहीं करना चाहिए।
  • वहीं दूसरी ओर यह समय भक्ति और साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • इस दौरान श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करना बहुत पुण्यदायी माना गया है।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष फल देने वाला होता है।
  • दान, दीपदान, पूजा-पाठ और सेवा कार्य करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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