Satuvai Amavasya Date and Muhurat: वैशाख माह की अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इसे विशेष रूप से पितरों की शांति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए मनाया जाता है। इस अमावस्या को सतुवाई अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने पूर्वजों को याद कर उनका तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का यह दिन पितृ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस अवसर पर लोग दान-पुण्य करते हैं । पूजा पाठ करते हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा तथा शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। आइए जानते हैं सतुवाई अमावस्या की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।
Satuvai Amavasya 2026: सतुवाई अमावस्या कब है? जानें मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Vaishakh Amavasya; वैशाख माह की अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। इस अमावस्या को सतुवाई अमावस्या भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का यह दिन पितृ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
सतुवाई अमावस्या तिथि और मुहूर्त
- वैशाख कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 अप्रैल रात्रि 08:11 बजे से
- वैशाख कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि समाप्त: 17 अप्रैल, सायं 05:21 बजे पर
- उदयातिथि के अनुसार वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को मनाई जाएगी।
- अभिजित मुहूर्त- प्रातः 11:55 से दोपहर 12:47 तक
- अमृत काल- प्रातः 09:50 से प्रातः 11:18 तक
सतुवाई अमावस्या का महत्व
सतुवाई अमावस्या हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इसे वैशाख अमावस्या के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है। ऐसा करने से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं । इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना, जैसे गंगा स्नान, बहुत शुभ माना जाता है। इससे पापों का नाश होता है और मन को शुद्धि मिलती है। गर्मी के मौसम की शुरुआत होने के कारण इस दिन सत्तू, घड़ा या मटका और पंखा जैसी वस्तुओं का दान करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है । इस दिन लोग सात्विक भोजन करते हैं और सत्तू, तिल, गुड़ और जल से तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किए गए पितृ कार्यों से घर में सुख शांति समृद्धि और मानसिक संतोष बना रहता है।
सतुवाई अमावस्या पर क्या करें
- सतुवाई अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करें।यदि संभव न हो तो घर के स्नान जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए
- स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और फूल डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
- इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के नाम से जल और काले तिल अर्पित करने चाहिए।
- इसके बाद ॐ पितृभ्य नमः मंत्र का जाप करना चाहिए।
- मिट्टी के कलश में जल भरकर उसके ऊपर सत्तू का पात्र रखकर दान करना शुभ माना जाता है।
- इस दिन मौसमी फल और वस्त्रों का दान करना भी अत्यंत फलदायी होता है।
- ब्राह्मणों को भोजन कराना और उनका आशीर्वाद लेना विशेष पुण्य प्रदान करता है।
- 8 जरूरतमंद लोगों को कच्चा अनाज यानी सीधा दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है।
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