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Sawan Putrada Ekadashi 2026: पुत्रदा एकादशी कब है? जानें डेट, पूजा मुहूर्त और महत्व

Wed, 19 Aug 2026 10:47 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 19 Aug 2026 10:47 AM IST
सार

Putrada Ekadashi Vrat: श्रावण पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है। इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इसकी सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।

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Shravan Putrada Ekadashi 2026 Date Puja Muhurat and Religious Significance
Sawan Putrada Ekadashi 2026 - फोटो : अमर उजाला

Shravan Putrada Ekadashi: श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी या पवित्रा एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से संतान सुख, संतान के उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना पूरी हो सकती है। इस साल श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त, रविवार को रखा जाएगा। माना जाता है कि इस पवित्र तिथि पर सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-पूजन करने से भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और मन को भी सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। आइए जानते हैं इस एकादशी की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और इसके धार्मिक महत्व के बारे में।

Shravan Putrada Ekadashi 2026 Date Puja Muhurat and Religious Significance
श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026, रविवार को मनाई जाएगी। - फोटो : Adobe Stock

एकादशी तिथि और विष्णु पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, श्रावण पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026, रविवार को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 2:00 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त को सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ समय सुबह 7:32 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक बताया गया है। भक्त इस अवधि में स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी के दिन श्रद्धापूर्वक श्रीहरि का स्मरण और पूजन करने से मन को शांति मिलती है और परिवार में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

Shravan Putrada Ekadashi 2026 Date Puja Muhurat and Religious Significance
श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व - फोटो : freepik

श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व 
श्रावण पुत्रदा एकादशी को संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, पद्म पुराण में इस एकादशी से जुड़ी कथा का वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में राजा महीजित और राजा सुकेतुमान ने ऋषियों की सलाह पर इस व्रत का पालन किया था। भगवान विष्णु की भक्ति और एकादशी व्रत के प्रभाव से उन्हें योग्य और यशस्वी संतान का सुख प्राप्त हुआ। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत करने से संतान की उन्नति, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना पूरी होती है। साथ ही, भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। ऐसा भी माना जाता है कि श्रद्धा और नियम के साथ इस व्रत का पालन करने से व्यक्ति को अपने पुराने कर्मों के नकारात्मक प्रभाव से मुक्ति मिलती है और जीवन की परेशानियां कम होने लगती हैं।

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Shravan Putrada Ekadashi 2026 Date Puja Muhurat and Religious Significance
पुत्रदा एकादशी व्रत की पूजा विधि - फोटो : adobe

पुत्रदा एकादशी व्रत की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लें।
  • घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करने के बाद एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • भगवान विष्णु के सामने दीपक और धूप जलाएं और उन्हें फूल, माला आदि अर्पित करें।
  • पूजा में रोली, कुमकुम, नैवेद्य सहित अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन सामग्री चढ़ाएं।
  • भगवान विष्णु को तुलसी दल जरूर अर्पित करें, क्योंकि विष्णु पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है।
  • इसके बाद पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
  • पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि व संतान के कल्याण की प्रार्थना करें।
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व्रत का पारण कब करें? - फोटो : adobe stock

व्रत का पारण कब करें?
एकादशी व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करने के बाद माना जाता है। 23 अगस्त को रखा गया श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत 24 अगस्त 2026 को खोला जाएगा। पारण का समय दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक बताया गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को इसी अवधि में पारण करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत में तिथि और पारण के समय का विशेष ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है। श्रद्धा, संयम और विधि-विधान के साथ व्रत पूरा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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