चैत्र माह में पड़ने वाली अमावस्या को चैत्र अमावस्या भी कहा जाता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सही पूजन विधि और मुहूर्त जानने के लिए क्लिक करें।
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शनैश्चरी अमावस्या 2018: यह है शनिदेव का प्रसन्न करने की सही पूजन विधि एवं शुभ मुहूर्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 17 Mar 2018 05:40 PM IST
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शनि-सिग्नापुर
पंडित विपिन चंद्र जोशी ने बताया कि इस दिन का पूजन बेहद फलकारी और शनिदोष से मुक्ति देने वाला होता है। सहस्त्र गुना फलदायी इस अमावस्या का पूजन शुभ मुहूर्त में करना अहम है।
शनि अमावस्या
शनि अमावस्या के दिन सूर्योदय से पहले उठकर शनिदेव का ध्यान करें। इसके बाद जल पात्र में गुड़ और तिल डालकर उसे पीपल के वृक्ष को अर्पित करें और सरसों के तेल में दिया जलाएं। फिर अपनी मनोकामना का ध्यान करते हुए पीपल के वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें।
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17 मार्च 2018 को पड़ रही शनि अमावस्या के दिन शाम 6:13 मिनट से शाम 7:13 मिनट तक शुभ मुहूर्त है। इस वक्त में आप शनि देव को प्रसन्न कर शनि दोष से मुक्ति पा सकते हैं।
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ऐसा माना जाता है कि शनि अमावस्या के दिन विशेष पूजन, स्नान, उपाय व उपवास से पितृगण को तृप्ति मिलती है, साथ ही शनि दोष से मुक्ति मिलती है। घर की पश्चिम दिशा में काले कपड़े पर शनिदेव की मूर्ति या उनका चित्र स्थापित करें।