Shukra Pradosh 2026 Katha In Hindi: शुक्र प्रदोष व्रत 12 जून को यानी आज रखा जाएगा। यह अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ रहा है, जिसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा के लिए 1 घंटा 44 मिनट का शुभ समय मिलेगा, जो शाम 7:36 बजे से प्रारंभ होगी और 09:20 बजे तक रहेगी। इस पावन मुहूर्त में बेलपत्र, भांग, धतूरा, गंगाजल, अक्षत, पुष्प, फल और चंदन से भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। पूजा के उपरांत प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। मान्यता है कि कथा सुनने से व्रत पूर्ण होता है और साधक को उपवास का पूर्ण फल प्राप्त होता है। भगवान शिव की कृपा से जीवन के कार्य सिद्ध होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
Pradosh Vrat Katha: प्रदोष व्रत पर शाम की पूजा में करें इस कथा का पाठ, मिलेगा शिव जी का आशीर्वाद
Shukra Pradosh Vrat Katha: आज शुक्र प्रदोष है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता के अनुसार, पूजा के उपरांत प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। मान्यता है कि कथा सुनने से व्रत पूर्ण होता है और साधक को उपवास का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
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शुक्र प्रदोष व्रत कथा
प्राचीन समय में एक नगर में तीन घनिष्ठ मित्र रहते थे, एक राजा का पुत्र, दूसरा धनी व्यापारी का बेटा और तीसरा ब्राह्मण का पुत्र। तीनों का विवाह हो चुका था, लेकिन व्यापारी के बेटे की पत्नी का गौना अभी नहीं हुआ था, जबकि बाकी दोनों मित्र अपने वैवाहिक जीवन में सुखी थे।
एक दिन तीनों मित्र आपस में बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान ब्राह्मण मित्र ने कहा कि जिस घर में स्त्री का वास नहीं होता, वह स्थान सूना और नीरस हो जाता है। यह बात सुनकर व्यापारी का बेटा सोच में पड़ गया और उसने अपनी पत्नी को ससुराल से लाने का निर्णय कर लिया। उसने घर जाकर अपने पिता से यह इच्छा जाहिर की।
पिता ने उसे समझाया कि उस समय शुक्र अस्त चल रहा है, और इस अवधि में बहू-बेटी की विदाई शुभ नहीं मानी जाती। उन्होंने बेटे को सलाह दी कि शुक्र उदय होने के बाद ही पत्नी को घर लाए, लेकिन युवक ने उनकी बात अनसुनी कर दी और ससुराल चला गया।
वहां पहुंचकर उसने सास-ससुर से पत्नी को विदा करने का आग्रह किया। उन्होंने भी उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसके हठ के आगे झुकना पड़ा और अंततः बेटी को उसके साथ विदा कर दिया गया। जैसे ही वे दोनों नगर से बाहर निकले, बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और एक बैल घायल हो गया। इस हादसे में पत्नी को भी चोट आई।
इसके बावजूद युवक नहीं रुका और आगे बढ़ता रहा। रास्ते में कुछ डाकुओं ने उन्हें घेर लिया और सारा धन लूटकर भाग गए। किसी तरह वे घर पहुंचे, लेकिन दुर्भाग्य यहीं समाप्त नहीं हुआ, घर पहुंचते ही युवक को सांप ने काट लिया।
स्थिति गंभीर हो गई तो पिता ने तुरंत वैद्य को बुलाया। वैद्य ने बताया कि युवक तीन दिनों से अधिक जीवित नहीं रह पाएगा। उसी समय उसका ब्राह्मण मित्र वहां पहुंचा और उसने सेठ को सलाह दी कि बहू को बेटे के साथ उसके मायके भेज दें, क्योंकि शुक्र अस्त में बहू को घर लाने का परिणाम ही यह विपत्ति है। संभव है कि ऐसा करने से उसकी जान बच जाए।
सेठ ने यह सलाह मान ली और तुरंत ही बेटे को बहू के साथ उसके मायके भेज दिया। जैसे ही युवक ससुराल पहुंचा, उसकी तबीयत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। सांप के विष का असर समाप्त हो गया और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया।
जब शुक्र देव का उदय हुआ, तब वह अपनी पत्नी के साथ पुनः अपने घर लौटा और दोनों ने सुखपूर्वक जीवन व्यतीत किया। अंततः उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। मान्यता है कि जो श्रद्धा भाव से इस व्रत की कथा पढ़ता या सुनता है, उसे भी इसी प्रकार शुभ फल की प्राप्ति होती है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।