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Paris Olympics: मनु भाकर की उपलब्धि से लेकर विनेश फोगाट के विवाद तक, कुछ इस तरह याद किया जाएगा पेरिस ओलंपिक
Mon, 12 Aug 2024 05:38 AM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Mon, 12 Aug 2024 05:38 AM IST
सार
करीब दो सप्ताह से अधिक समय तक चलने वाला खेलों का महाकुंभ भारत के लिए अच्छा और बुरा दोनों रहा। भारत ने एक रजत और पांच कांस्य सहित कुल छह पदक अपने नाम किए। हालांकि, भारत इन खेलों में एक भी स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर सका।
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पेरिस ओलंपिक 2024
- फोटो : अमर उजाला
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पेरिस ओलंपिक का समापन रविवार को हो गया। करीब दो सप्ताह से अधिक समय तक चलने वाला खेलों का महाकुंभ भारत के लिए अच्छा और बुरा दोनों रहा। भारत ने एक रजत और पांच कांस्य सहित कुल छह पदक अपने नाम किए। हालांकि, भारत इन खेलों में एक भी स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर सका। भारत के लिए पेरिस ओलंपिक मनु भाकर की उपलब्धियों से लेकर विनेश फोगाट के विवाद के लिए याद किया जाएगा। टोक्यो में भारत ने अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था और एक स्वर्ण, दो रजत, चार कांस्य सहित कुल सात पदक जीते थे। भारत टोक्यो में 48वें स्थान पर रहा था, लेकिन इस बार वह पदक तालिका में 71वें स्थान पर रहा।
पेरिस ओलंपिक
- फोटो : Twitter
पेरिस ओलंपिक में भाला फेंक सुपरस्टार नीरज चोपड़ा का रजत पदक उम्मीदों से कमतर रहा, जबकि विनेश फोगाट का फाइनल से पहले अयोग्य ठहराया जाना निराशाजनक रहा जिसमें छह खिलाड़ियों के चौथे स्थान नासूर रहे। ओलंपिक के शुरू में पदक तालिका में दोहरे पदकों तक पहुंचना बहुत महत्वाकांक्षी लग रहा था लेकिन कई खिलाड़ियों के करीब से चूकने का काफी असर पड़ा। इन सभी चीजों ने काफी सवाल खड़े किए क्योंकि इस बार देश को एथलीटों से दोहरे अंक में पदक लाने की उम्मीद थी, लेकिन भारतीय दल टोक्यो ओलंपिक के प्रदर्शन की भी बराबरी नहीं कर सका।
पेरिस ओलंपिक 2024
- फोटो : अमर उजाला
भारत की झोली में आ सकते थे कुछ और पदक
भारत की झोली में कुछ और पदक आ सकते थे, लेकिन छह खिलाड़ी चौथे स्थान पर रहे और देश के लिए कांस्य लाने से चूक गए। बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन कांस्य पदक मैच में हार गए थे, जूबकि मीराबाई चानू सिर्फ एक किलोग्राम से कांस्य पदक लाने से चूक गई थीं। किसी को उम्मीद नहीं थी कि सात्विकसाईराज रेंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी पदक के बिना विदा होंगे। देश के 117 सदस्यीय दल में महज छह पदक आना आदर्श नहीं हैं लेकिन भारत के लिए इस दौरान खुशी, उम्मीद, निराशा और दुख के पल भी आए। अगर चौथे स्थान पर रहने वाले छह खिलाड़ी पदक जीतने में सफल रहते तो तालिका में दोहरे पदकों की संख्या संभव थी। आइए जानते हैं पेरिस खेलों में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा...
भारत की झोली में कुछ और पदक आ सकते थे, लेकिन छह खिलाड़ी चौथे स्थान पर रहे और देश के लिए कांस्य लाने से चूक गए। बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन कांस्य पदक मैच में हार गए थे, जूबकि मीराबाई चानू सिर्फ एक किलोग्राम से कांस्य पदक लाने से चूक गई थीं। किसी को उम्मीद नहीं थी कि सात्विकसाईराज रेंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी पदक के बिना विदा होंगे। देश के 117 सदस्यीय दल में महज छह पदक आना आदर्श नहीं हैं लेकिन भारत के लिए इस दौरान खुशी, उम्मीद, निराशा और दुख के पल भी आए। अगर चौथे स्थान पर रहने वाले छह खिलाड़ी पदक जीतने में सफल रहते तो तालिका में दोहरे पदकों की संख्या संभव थी। आइए जानते हैं पेरिस खेलों में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा...
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पीआर श्रीजेश 2020 टोक्यो ओलंपिक के दौरान और 2024 पेरिस ओलंपिक के दौरान
- फोटो : Twitter
स्वर्ण से चूके, कांस्य लाने में सफल रही हॉकी टीम
पुरुष हॉकी टीम के ओलंपिक में लगातार दूसरा पदक जीतने की क्षमता पर सवाल बने हुए थे। टीम टोक्यो में जीते गए पदक के रंग को बेहतर नहीं कर सकी, लेकिन जिस तरह से उसने ऑस्ट्रेलिया को हराया, बेल्जियम के खिलाफ मुकाबला खेला और जर्मनी और ब्रिटेन के खिलाफ दबाव झेला, उससे पता चलता है कि हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली यह टीम मानसिक रूप से कितनी मजबूत हो गई है। भारतीय टीम अंडरडॉग की तरह शामिल हुई लेकिन चैंपियन की तरह खेली। गोलकीपर पीआर श्रीजेश के लिए संन्यास लेने के लिए यह बिलकुल सही समय था, जिन्होंने टोक्यो कांस्य से पहले अपनी पहचान हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे खेल के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
पुरुष हॉकी टीम के ओलंपिक में लगातार दूसरा पदक जीतने की क्षमता पर सवाल बने हुए थे। टीम टोक्यो में जीते गए पदक के रंग को बेहतर नहीं कर सकी, लेकिन जिस तरह से उसने ऑस्ट्रेलिया को हराया, बेल्जियम के खिलाफ मुकाबला खेला और जर्मनी और ब्रिटेन के खिलाफ दबाव झेला, उससे पता चलता है कि हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली यह टीम मानसिक रूप से कितनी मजबूत हो गई है। भारतीय टीम अंडरडॉग की तरह शामिल हुई लेकिन चैंपियन की तरह खेली। गोलकीपर पीआर श्रीजेश के लिए संन्यास लेने के लिए यह बिलकुल सही समय था, जिन्होंने टोक्यो कांस्य से पहले अपनी पहचान हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे खेल के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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विनेश फोगाट
- फोटो : Twitter
विनेश के दिल को झकझोर देने वाला ओलंपिक
भाग्य ने श्रीजेश को शानदार विदाई दी, लेकिन पहलवान विनेश फोगाट अपनी आत्मा पर कभी नहीं भरने वाला घाव लेकर मंच से चली गईं। एक मुश्किल मुकाबले के बाद एक मामूली हार और एक चुनौतीपूर्ण हार दोनों ही हो सकती है, लेकिन उनके मामले में वह जीतने के बावजूद हार गईं। यह उनकी काबिलियत या कौशल का सवाल नहीं था बल्कि तकनीकी पक्ष था जिसने उनसे पदक छीन लिया। उनकी वापसी में न तो कम तैयारी और न ही युई सुसाकी बाधा बन सकीं लेकिन उनका अपना 100 ग्राम का वजन इन सब पर पानी फेर गया। विनेश ने इस घटना के बाद खेल से संन्यास की घोषणा कर दी और अब वह अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ अपनी अपील पर फैसले का इंतजार कर रही हैं।
भाग्य ने श्रीजेश को शानदार विदाई दी, लेकिन पहलवान विनेश फोगाट अपनी आत्मा पर कभी नहीं भरने वाला घाव लेकर मंच से चली गईं। एक मुश्किल मुकाबले के बाद एक मामूली हार और एक चुनौतीपूर्ण हार दोनों ही हो सकती है, लेकिन उनके मामले में वह जीतने के बावजूद हार गईं। यह उनकी काबिलियत या कौशल का सवाल नहीं था बल्कि तकनीकी पक्ष था जिसने उनसे पदक छीन लिया। उनकी वापसी में न तो कम तैयारी और न ही युई सुसाकी बाधा बन सकीं लेकिन उनका अपना 100 ग्राम का वजन इन सब पर पानी फेर गया। विनेश ने इस घटना के बाद खेल से संन्यास की घोषणा कर दी और अब वह अयोग्य ठहराए जाने के खिलाफ अपनी अपील पर फैसले का इंतजार कर रही हैं।