यह पहला मौका है जब किसी बीमारी की वजह से खेलों का महाकुंभ कहलाए जाने वाला ओलंपिक टाल दिया गया है। प्राणघातक बन चुके कोरोनावायरस के चलते अब 23 जुलाई 2020 से शुरू होने वाले यह खेल 2021 में होंगे। इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी यानी IOC अंत तक कोशिश करती रही कि खेल तय समय पर शुरू हो जाए, लेकिन ऐसा हो न सका और मंगलवार को जापानी पीएम शिंजो आबे ने ओलंपिक को टालने का अधिकारिक एलान कर ही दिया।
पहली बार किसी वायरस ने टाला ओलंपिक, सिर्फ विश्व युद्ध ने ही तीन बार रद्द किए थे खेल
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विश्व युद्ध की वजह से तीन बार रद्द हुए ओलंपिक खेल
1896 में ग्रीस की राजधानी एथेंस से शुरू हुए ओलंपिक खेल अब तक 30 बार हो चुके हैं। हालांकि इस दौरान तीन बार पूरी तैयारी होने के बावजूद ओलंपिक को रद्द भी करना पड़ा। विश्व युद्ध छिड़ जाने के कारण 1916, 1940 और 1944 में ओलंपिक खेल आयोजित नहीं कराए गए। तैयारी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति को इन खेलों का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
प्रथम विश्व युद्ध छिड़ने के कारण 1916 में बर्लिन में होने वाले ओलंपिक खेल रद्द कर दिए गए। 1940 में जापान की राजधानी टोक्यो में ओलंपिक खेलों का आयोजन होना था, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध शुरू होने के कारण ये खेल नहीं कराए गए।
दूसरा विश्व युद्ध 1939 से 1945 यानी छह वर्षों तक चला, जिसकी वजह से दो बार ओलंपिक खेलों को स्थगित करना पड़ा। 1944 में लंदन में होने वाले ओलंपिक खेल इसी के चलते रद्द किए गए। फिर साल 1948 में लंदन को मेजबानी का मौका मिला। जर्मनी और जापान को खेलों से अलग रखा गया था। वहीं ओलंपिक समिति से मान्यता न मिलने के कारण सोवियत रूस के खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया।
| वर्ष | जगह |
| 1916 | बर्लिन, जर्मनी |
| 1940 | टोक्यो, जापान |
| 1944 | लंदन, इंग्लैंड |
आधुनिक ओलंपिक और समस्याएं
1896 में पहली बार आधुनिक ओलंपिक खेलों का आयोजन ग्रीस की राजधानी एथेंस में हुआ। 6 से 15 अप्रैल 1896 के दौरान यूनान की राजधानी एथेंस में हुए इन खेलों में 14 देशों के 241 खिलाड़ियों ने इन खेलों में भाग लिया। 9 खेलों के 43 इवेंट इस ओलंपिक में हुए। 43 प्रतियोगिताओं में पहली बार मैराथन दौड़ को भी शामिल किया गया। ज्यादातर मुकाबलों में मेजबान देश के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। प्रमुख मुकाबलों में शामिल थे- टेनिस, ट्रैक एंड फील्ड, भारोत्तोलन, साइकिलिंग, कुश्ती, तीरंदाजी, तैराकी और जिम्नास्टिक। क्रिकेट और फुटबॉल प्रतियोगिताएं इसलिए रद्द कर दीं गईं क्योंकि इन मुकाबलों में हिस्सा लेने वाली टीमों की कमी थी। इन खेलों की कुल लागत 37,40,000 ड्रैकमस (यूनानी करेंसी) की थी।