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Who is Gukesh: भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर हैं गुकेश, कार्लसन को भी हरा चुके, विश्व खिताब से बस कुछ कदम दूर
Mon, 22 Apr 2024 10:46 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 22 Apr 2024 10:46 AM IST
सार
शतरंज की दुनिया की नई सनसनी 17 वर्षीय गुकेश ने अपने करियर में कई बार दुनिया को चौंकाया है। वह इस छोटी सी उम्र में कई रिकॉर्ड बना चुके हैं। वह 12 साल, सात महीने, 17 दिन की उम्र में भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए थे और दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर का टैग केवल 17 दिनों से चूक गए थे।
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गुकेश
- फोटो : PTI
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चेन्नई के 17 वर्षीय डी गुकेश ने प्रतिष्ठित कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी के रूप में हिस्सा लिया था। हालांकि, अब कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट के अंतिम दौर में हिकारू नाकामुरा के खिलाफ ड्रॉ खेलने के बाद वह इस टूर्नामेंट के सबसे कम उम्र के विजेता बन गए हैं। इतना ही नहीं, वह विश्व शतरंज चैंपियनशिप में प्रतिस्पर्धा करने वाला सबसे कम उम्र का खिलाड़ी भी बन गए हैं। वह कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट जीतने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी भी बन गए और विश्वनाथन आनंद के बाद यह टूर्नामेंट जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए।
गुकेश
- फोटो : PTI
दुनिया को कई बार चौंका चुके गुकेश
शतरंज की दुनिया की नई सनसनी 17 वर्षीय गुकेश ने अपने करियर में कई बार दुनिया को चौंकाया है। वह इस छोटी सी उम्र में कई रिकॉर्ड बना चुके हैं। वह 12 साल, सात महीने, 17 दिन की उम्र में भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए थे और दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर का टैग केवल 17 दिनों से चूक गए थे। उन्होंने पिछले साल पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद को पछाड़कर 36 साल बाद पहली बार देश के शीर्ष रैंकिंग खिलाड़ी के रूप में प्रवेश किया। अब उन्होंने उस प्रभावशाली सूची में एक और उपलब्धि जोड़ दी है।
कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट जीतने के साथ ही गुकेश 40 साल पहले महान गैरी कास्पारोव द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को तोड़ते हुए विश्व खिताब के लिए सबसे कम उम्र के चैलेंजर बन गए। रूस के पूर्व महान कास्पारोव 22 साल के थे जब उन्होंने 1984 में हमवतन अनातोली कारपोव के साथ भिड़ने के लिए क्वालिफाई किया था। अब गुकेश इस साल के आखिर में विश्व चैंपियन चीन के डिंग लिरेन को चुनौती पेश करेंगे।
शतरंज की दुनिया की नई सनसनी 17 वर्षीय गुकेश ने अपने करियर में कई बार दुनिया को चौंकाया है। वह इस छोटी सी उम्र में कई रिकॉर्ड बना चुके हैं। वह 12 साल, सात महीने, 17 दिन की उम्र में भारत के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बन गए थे और दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर का टैग केवल 17 दिनों से चूक गए थे। उन्होंने पिछले साल पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद को पछाड़कर 36 साल बाद पहली बार देश के शीर्ष रैंकिंग खिलाड़ी के रूप में प्रवेश किया। अब उन्होंने उस प्रभावशाली सूची में एक और उपलब्धि जोड़ दी है।
कैंडिडेट्स शतरंज टूर्नामेंट जीतने के साथ ही गुकेश 40 साल पहले महान गैरी कास्पारोव द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को तोड़ते हुए विश्व खिताब के लिए सबसे कम उम्र के चैलेंजर बन गए। रूस के पूर्व महान कास्पारोव 22 साल के थे जब उन्होंने 1984 में हमवतन अनातोली कारपोव के साथ भिड़ने के लिए क्वालिफाई किया था। अब गुकेश इस साल के आखिर में विश्व चैंपियन चीन के डिंग लिरेन को चुनौती पेश करेंगे।
डी गुकेश ने कैंडिडेट्स शतरंज का खिताब जीता
- फोटो : PTI
तकनीकी इंजनों से दूर रहे गुकेश, ऐसे की तैयारी
भारत में कम उपलब्धि पर ही स्टारडम हासिल करने वाले खिलाड़ियों के बीच गुकेश की पहचान तब तक छुपी रही जब तक उन्होंने अपने करियर में 2500 की रेटिंग पार नहीं कर ली। वह तकनीकी इंजनों से दूर रहे और अपनी तैयारी के लिए कंप्यूटर का कम से कम इस्तेमाल किया। गुकेश के इस तरीके की भारत के महानतम चेस खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने भी तारीफ की थी।
उन्होंने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था- गुकेश इस तरह की सोच रखने वाले दुनिया के चुनिंदा खिलाड़ियों में हैं, जो अपने खेल के शीर्ष पर होने के बावजूद स्टार नहीं थे। यह एक बहुत ही स्वस्थ दृष्टिकोण है। महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन्होंने सीधे किसी तरह का दृष्टिकोण नहीं अपनाया बल्कि अपने ट्रेनर की मदद ली। ऐसा ही होना चाहिए। एक खिलाड़ी को खेलने के स्किल पर ध्यान देना चाहिए और ट्रेनर उन्हें सबसे अच्छी जानकारी दे सकता है।
भारत में कम उपलब्धि पर ही स्टारडम हासिल करने वाले खिलाड़ियों के बीच गुकेश की पहचान तब तक छुपी रही जब तक उन्होंने अपने करियर में 2500 की रेटिंग पार नहीं कर ली। वह तकनीकी इंजनों से दूर रहे और अपनी तैयारी के लिए कंप्यूटर का कम से कम इस्तेमाल किया। गुकेश के इस तरीके की भारत के महानतम चेस खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने भी तारीफ की थी।
उन्होंने एक बार एक इंटरव्यू में कहा था- गुकेश इस तरह की सोच रखने वाले दुनिया के चुनिंदा खिलाड़ियों में हैं, जो अपने खेल के शीर्ष पर होने के बावजूद स्टार नहीं थे। यह एक बहुत ही स्वस्थ दृष्टिकोण है। महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन्होंने सीधे किसी तरह का दृष्टिकोण नहीं अपनाया बल्कि अपने ट्रेनर की मदद ली। ऐसा ही होना चाहिए। एक खिलाड़ी को खेलने के स्किल पर ध्यान देना चाहिए और ट्रेनर उन्हें सबसे अच्छी जानकारी दे सकता है।
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गुकेश (दाएं)
- फोटो : FIDE/Michal Walusza
विष्णु ने गुकेश को दिलाई विश्वस्तरीय पहचान
गुकेश को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने वाले विष्णु प्रसन्ना खुद भी स्वीकार करते हैं कि यह एक जोखिम भरा कदम था। वह कहते हैं कि हमारा उद्देश्य बहुत सटीक होना और शतरंज के लिए अपने खुद के स्किल को विकसित करना था। जब आप खेल खेल रहे होते हैं, तो आप हमेशा पूरी तरह से निश्चित नहीं होते हैं। लेकिन अगर आप हमेशा कंप्यूटर से जांच कर रहे हैं तो यह आपको एक स्पष्ट परिभाषा देता है कि कोई कदम अच्छा है या बुरा। उस भ्रमित मानसिकता को दूर रखने के लिए हमने वह तरीका अपनाया। यह एक प्रयोग था। हमें नहीं पता था कि यह कैसे काम करेगा। मैंने सोचा कि यह एक उपयोगी प्रयोग होगा और चूंकि वह कभी स्थिर नहीं हुआ, इसलिए हमने इसे जारी रखा।
गुकेश को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने वाले विष्णु प्रसन्ना खुद भी स्वीकार करते हैं कि यह एक जोखिम भरा कदम था। वह कहते हैं कि हमारा उद्देश्य बहुत सटीक होना और शतरंज के लिए अपने खुद के स्किल को विकसित करना था। जब आप खेल खेल रहे होते हैं, तो आप हमेशा पूरी तरह से निश्चित नहीं होते हैं। लेकिन अगर आप हमेशा कंप्यूटर से जांच कर रहे हैं तो यह आपको एक स्पष्ट परिभाषा देता है कि कोई कदम अच्छा है या बुरा। उस भ्रमित मानसिकता को दूर रखने के लिए हमने वह तरीका अपनाया। यह एक प्रयोग था। हमें नहीं पता था कि यह कैसे काम करेगा। मैंने सोचा कि यह एक उपयोगी प्रयोग होगा और चूंकि वह कभी स्थिर नहीं हुआ, इसलिए हमने इसे जारी रखा।
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गुकेश
- फोटो : FIDE/Maria Emelianova via Chess dot com
गुकेश का नंबर वन बनने का जुनून
विष्णु ने कहा- हमें कोई परेशानी नहीं हुई। वह दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बनने के काफी करीब थे। यह कहना मुश्किल है कि इंजनों (कंप्यूटर) के साथ काम करने से हमारे अवसरों में सुधार होता या नहीं (दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बनने का रिकॉर्ड जो गुकेश 17 दिनों से चूक गए)। हमें लगा कि वह अच्छा खेल रहा है। उस रिकॉर्ड के इतने करीब पहुंचना अपने आप में यह सबूत है कि वह अच्छा कर रहे थे।
इसके अलावा वे कौन से पहलू हैं जो गुकेश को इतना अच्छा बनाते हैं? इस बारे में बताते हुए विष्णु ने कहा- वह अपने खेल के प्रति बेहद जुनूनी हैं। वह किसी और चीज के बारे में नहीं सोचते। बस एक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। यह एक निश्चित जुनून है। मैंने जितने भी बच्चों के साथ काम किया है, उनमें से किसी ने भी वह जुनून नहीं दिखाया है जो गुकेश ने दिखाया है। खेल के बारे में जुनून और नंबर एक बनने की सनक।
विष्णु ने कहा- हमें कोई परेशानी नहीं हुई। वह दुनिया के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर बनने के काफी करीब थे। यह कहना मुश्किल है कि इंजनों (कंप्यूटर) के साथ काम करने से हमारे अवसरों में सुधार होता या नहीं (दुनिया के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बनने का रिकॉर्ड जो गुकेश 17 दिनों से चूक गए)। हमें लगा कि वह अच्छा खेल रहा है। उस रिकॉर्ड के इतने करीब पहुंचना अपने आप में यह सबूत है कि वह अच्छा कर रहे थे।
इसके अलावा वे कौन से पहलू हैं जो गुकेश को इतना अच्छा बनाते हैं? इस बारे में बताते हुए विष्णु ने कहा- वह अपने खेल के प्रति बेहद जुनूनी हैं। वह किसी और चीज के बारे में नहीं सोचते। बस एक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया। यह एक निश्चित जुनून है। मैंने जितने भी बच्चों के साथ काम किया है, उनमें से किसी ने भी वह जुनून नहीं दिखाया है जो गुकेश ने दिखाया है। खेल के बारे में जुनून और नंबर एक बनने की सनक।