Paris Olympics: मुक्केबाज कारिनी से मिलीं इटली की PM मेलोनी, जानें दुती चंद ने लैंगिक योग्यता को लेकर क्या कहा
मेलोनी ने कारिनी से सपनों को पीछा न छोड़ने का आग्रह भी किया है। यह बैठक तब हुई जब इटली की प्रधानमंत्री उनके समर्थन में उतर आई थीं और कहा था कि खेलीफ और कारिनी का मुकाबला बराबरी के लोगों के बीच लड़ाई नहीं है।
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मेलोनी ने कहा था, 'मुझे लगता है कि पुरुष आनुवंशिक विशेषताओं वाले एथलीटों को महिलाओं की प्रतियोगिताओं में भर्ती नहीं किया जाना चाहिए।' इस विवाद ने खेलों में लिंग पात्रता नियमों पर व्यापक बहस छेड़ दी है। पिछले साल खेलीफ और ताइवान की लिन यू-तिंग को लिंग पात्रता परीक्षा में विफल होने के कारण नई दिल्ली में महिला विश्व चैंपियनशिप से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। आईबीए के अध्यक्ष उमर क्रेमलेव ने कहा था कि अयोग्यता इसलिए थी क्योंकि यह साबित हो गया था कि उनके पास एक्सवाई गुणसूत्र (क्रोमोसोम्स) हैं।
IOC ने दी मान्यता
हालांकि, आईबीए ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि मुक्केबाज लिंग पात्रता परीक्षण में विफल क्यों रहे, लेकिन यह बताया कि दोनों में से किसी ने भी टेस्टोस्टेरोन परीक्षण में हिस्सा नहीं लिया। यह भी बात सामने आई थी कि खेलीफ ट्रांसजेंडर के रूप में खुद को संबोधित नहीं करती हैं। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने खेलीफ को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने के अपने फैसले पर कायम रहते हुए कहा कि महिला वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाला हर कोई प्रतियोगिता पात्रता नियमों का पालन कर रहा है। वे अपने पासपोर्ट में महिलाएं हैं।
पेरिस ओलंपिक में खेलीफ का अगला मुक्केबाजी मैच हंगरी की अन्ना लुका हमोरी के खिलाफ होगा। पेरिस ओलंपिक में महिला मुक्केबाजी प्रतियोगिता में खेलीफ की भागीदारी को लेखक जेके राउलिंग और एलोन मस्क जैसी प्रमुख हस्तियों की आलोचना का सामना करना पड़ा है। उन्होंने तर्क दिया है कि पुरुष गुणसूत्रों वाले एथलीटों को महिलाओं के खेलों में प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए।
भारतीय फर्राटा धाविका दुती चंद ने मुक्केबाजी विवाद के बीच अल्जीरियाई मुक्केबाज इमाने खेलीफ का समर्थन किया है। दुती चंद ने अपने करियर में इसी तरह की जांच का सामना किया है। उन्होंने विवाद के बारे में बात की। चंद का स्वाभाविक रूप से उच्च टेस्टोस्टेरोन स्तर वाले एथलीटों से संबंधित आईओसी के नियमों को चुनौती देने का इतिहास रहा है। 2014 में उन्होंने सफलतापूर्वक एक नियम लड़ा जिसने एथलीटों को प्रतिस्पर्धा से ऊंचा टेस्टोस्टेरोन के साथ खेलने से रोक दिया था। उनकी ओर से यह तर्क दिया गया था कि इस तरह के जैविक अंतर जरूरी अनुचित लाभ प्रदान नहीं करते हैं। खेलीफ और कारिनी की घटना ने भी लैंगिक योग्यता के मुद्दों को बढ़ा दिया है और दुती चंद वाले विवादों की याद दिलाता है।
दुती चंद ने पीटीआई से कहा, '2014 में मैंने आईओसी के उस नियम को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि टेस्टोस्टेरोन के उच्च स्तर वाले व्यक्ति को स्विट्जरलैंड में खेल पंचाट में भाग नहीं लेना चाहिए। यह नोट किया गया था कि हार्मोनल स्तर एथलेटिक प्रदर्शन को नहीं बढ़ा सकता है। मुझे उस समय बहुत कष्ट हुआ। मुझे अपने लिंग को लेकर बहुत विवादों का सामना करना पड़ा। गुरुवार को ओलंपिक मैच के दौरान, (एंजेला) कारिनी ने हार मान ली और अब वह उच्च टेस्टोस्टेरोन के स्तर के कारण अल्जीरियाई मुक्केबाज के बारे में शिकायत कर रही हैं। जब आप ओलंपिक में खेलते हैं, तो आपको कई परीक्षणों से गुजरना पड़ता है। मुझे नहीं लगता कि इस सोशल मीडिया के बारे में विवाद पैदा करना सही है।
VIDEO | Here's what Indian athlete Dutee Chand said on Imene Khelif vs Angela Carini controversy.
— Press Trust of India (@PTI_News) August 2, 2024
"In 2014, I challenged the IOC's rule that a person with a higher testosterone level should not participate in the Court of Arbitration for Sport in Switzerland. It was noted… pic.twitter.com/2DYm1w07o2
अगले ओलंपिक में मुक्केबाजी का संचालन करने की उम्मीद लगाने वाले शासी निकाय विश्व मुक्केबाजी के प्रमुख बोरिस वान डेर वोर्स्ट ने कहा कि वह पेरिस ओलंपिक में आईओसी (अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति) की पात्रता नीतियों का समर्थन करते हैं। उन्होंने लैंगिक मुद्दों की गहरी समझ नहीं रखने वालों से इस पर फैसला करने के लिए चिकित्सा पेशेवरों और वैज्ञानिकों पर भरोसा करने की सलाह दी।
विश्व मुक्केबाजी के अध्यक्ष वोर्स्ट ने गुरुवार को बताया कि उनका संगठन स्वास्थ्य और लिंग पर अपनी नीतियों को विकसित करने में हमेशा एथलीटों की सुरक्षा को पहले स्थान पर रखेगा। आईओसी का कार्यबल टोक्यो ओलंपिक के बाद पेरिस में भी मुक्केबाजी का संचालन कर रहा है। विश्व मुक्केबाजी से अभी सीमित संख्या में देश जुड़े है लेकिन उसे 2026 में डकार, सेनेगल में युवा ओलंपिक और 2028 में लॉस एंजिल्स में इस खेल के संचालन का अधिकार मिलने की उम्मीद है।
वोर्स्ट आईओसी के ओलंपिक मुक्केबाजी के संचालन के आलोचकों से भी असहमत हैं। उन्होंने अल्जीरिया की महिला मुक्केबाज इमाने खेलीफ और ताइवान की लिन यू-टिंग की पात्रता के मामले में आईओसी का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि जब लोग यहां प्रतिस्पर्धा करने के योग्य हों तो हमें उनका सम्मान करना होगा। यह सभी मुक्केबाजों, यहां शामिल सभी लोगों के लिए बहुत दुखद स्थिति है।' ताइवान और अल्जीरिया दोनों अभी भी आईबीए के सदस्य हैं, लेकिन लिन ने प्यूब्लो ( कोलोराडो) में विश्व मुक्केबाजी के आमंत्रण टूर्नामेंट में भाग लिया था। वह अपना पहला मुकाबला ब्राजील की ओलंपियन जूसिएलेन रोमू से हार गईं थी।