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न सिलिंडर का झंझट न, आग का डर: बिना गैस आखिर कैसे काम करता है इंडक्शन चूल्हा? यहां समझे पूरी तकनीक
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jagriti
Updated Sat, 14 Mar 2026 10:06 AM IST
सार
How Induction Works: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारतीयों की रसोई का हाल बिगाड़ दिया है। एलपीजी की किल्लत और आसामान छूते दामों के बीच देश में इंडक्शन कुकटॉप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में एक सवाल अक्सर लोगों के मन में उठता है कि बिना आग के खाना पकाने वाली ये मशीन आखिर काम कैसे करती है? इसमें पीछे क्या तकनीक है और क्या वाकई ये गैस की तुलना में करीब 300 प्रति महीना के हिसाब से सस्ती पड़ती है। आइए सबकुछ समझते हैं इस लेख में...
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induction
- फोटो : Adobe Stock
देश के कई हिस्सों में इन दिनों गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही है। लोग गैस के लिए घंटो-घंटो लाइन में लग रहे हैं और बुकिंग के बाद आसमान छूते दामों के बीच देरी से डिलीवर हो रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित होने से भारत में घरेलू गैस की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में अब इंडक्शन कुकटॉप जैसे इलेक्ट्रिक किचन उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है। खासकर छोटे घरों, किराए के मकानों, होस्टल और ऑफिस किचन में इंडक्शन चूल्हा एक आसान और सस्ता विकल्प बनता जा रहा है। अब सबसे पहले सवाल पर आते हैं कि ये काम कैसे करता है?
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इंडक्शन कुकर
- फोटो : एआई जनरेटेड
इंडक्शन चूल्हा कैसे काम करता है?
इंडक्शन कुकिंग तकनीक पारंपरिक गैस चूल्हे से बिल्कुल अलग होती है। इसमें खाना पकाने के लिए गैस की लौ का इस्तेमाल नहीं होता। इंडक्शन कुकटॉप के अंदर एक तांबे की कॉइल लगी होती है। जब इसमें बिजली प्रवाहित होती है तो यह कॉइल एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड यानी विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा पैदा करती है। यह ऊर्जा सीधे बर्तन के तले तक पहुंचती है और उसे गर्म कर देती है। इस प्रक्रिया में गर्मी सीधे बर्तन में पैदा होती है। चूल्हे की सतह बहुत ज्यादा गर्म नहीं होती और ऊर्जा का नुकसान भी कम होता है। यही वजह है कि इंडक्शन पर खाना अक्सर गैस की तुलना में तेजी से पक जाता है।
ये भी पढ़े: Induction Cooktop: इंडक्शन चूल्हें पर पानी गिरने से क्या वाकई करंट लगता है? जानिए क्या है सच
इंडक्शन कुकिंग तकनीक पारंपरिक गैस चूल्हे से बिल्कुल अलग होती है। इसमें खाना पकाने के लिए गैस की लौ का इस्तेमाल नहीं होता। इंडक्शन कुकटॉप के अंदर एक तांबे की कॉइल लगी होती है। जब इसमें बिजली प्रवाहित होती है तो यह कॉइल एक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड यानी विद्युत-चुंबकीय ऊर्जा पैदा करती है। यह ऊर्जा सीधे बर्तन के तले तक पहुंचती है और उसे गर्म कर देती है। इस प्रक्रिया में गर्मी सीधे बर्तन में पैदा होती है। चूल्हे की सतह बहुत ज्यादा गर्म नहीं होती और ऊर्जा का नुकसान भी कम होता है। यही वजह है कि इंडक्शन पर खाना अक्सर गैस की तुलना में तेजी से पक जाता है।
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एलपीजी और इंडक्शन
- फोटो : एआई जनरेटेड
गैस और इलेक्ट्रिक चूल्हे से कितना अलग
गैस चूल्हे में खुली लौ से बर्तन गर्म होता है, जबकि इलेक्ट्रिक कुकटॉप में पहले हीटिंग एलिमेंट गर्म होता है और फिर बर्तन को गर्म करता है, लेकिन इंडक्शन में ऊर्जा सीधे बर्तन में पहुंचती है। इससे कुकिंग ज्यादा तेज और ऊर्जा-कुशल हो जाती है।
अब दूसरा सवाल कि क्या इंडक्शन कुकिंग के फायदे भी हैं?
एक्सपर्ट्स कहते हैं हां..इसके कुछ फायदे भी हैं। जैसे:
तेजी से खाना बनता है
इंडक्शन चूल्हे पर पानी उबालना या सब्जी पकाना काफी जल्दी हो जाता है क्योंकि ऊर्जा सीधे बर्तन तक पहुंचती है।
किफायती
आज के दौर में 14.2 किलो का सिलिंडर के भाव हजारों रुपये के हो गए हैं, जबकि उतनी ही कुकिंग अगर इंडक्शन पर की जाए, तो बिजली का बिल औसतन ₹500-600 ही बढ़ता है।
तापमान तुरंत कंट्रोल
गैस की तरह फ्लेम एडजस्ट करने की जरूरत नहीं होती। तापमान तुरंत कम या ज्यादा किया जा सकता है।
ये भी पढ़े: LPG: एक तरफ रसोई गैस की किल्लत, दूसरी ओर से ठगों ने ऑनलाइन बिछाया जाल, जानिए 'एलपीजी स्कैम' से कैसे बचें
सफाई आसान
कुकटॉप की सतह ज्यादा गर्म नहीं होती, इसलिए खाना गिरने पर जलता नहीं और इसे साफ करना आसान रहता है।
ऊर्जा की बचत
ऊर्जा एक्सपर्ट्स के मुताबिक इंडक्शन कुकिंग गैस कुकिंग की तुलना में ज्यादा ऊर्जा कुशल हो सकती है।
ज्यादा सुरक्षित
खुली आग न होने की वजह से आग लगने का खतरा कम होता है।
गैस चूल्हे में खुली लौ से बर्तन गर्म होता है, जबकि इलेक्ट्रिक कुकटॉप में पहले हीटिंग एलिमेंट गर्म होता है और फिर बर्तन को गर्म करता है, लेकिन इंडक्शन में ऊर्जा सीधे बर्तन में पहुंचती है। इससे कुकिंग ज्यादा तेज और ऊर्जा-कुशल हो जाती है।
अब दूसरा सवाल कि क्या इंडक्शन कुकिंग के फायदे भी हैं?
एक्सपर्ट्स कहते हैं हां..इसके कुछ फायदे भी हैं। जैसे:
तेजी से खाना बनता है
इंडक्शन चूल्हे पर पानी उबालना या सब्जी पकाना काफी जल्दी हो जाता है क्योंकि ऊर्जा सीधे बर्तन तक पहुंचती है।
किफायती
आज के दौर में 14.2 किलो का सिलिंडर के भाव हजारों रुपये के हो गए हैं, जबकि उतनी ही कुकिंग अगर इंडक्शन पर की जाए, तो बिजली का बिल औसतन ₹500-600 ही बढ़ता है।
तापमान तुरंत कंट्रोल
गैस की तरह फ्लेम एडजस्ट करने की जरूरत नहीं होती। तापमान तुरंत कम या ज्यादा किया जा सकता है।
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सफाई आसान
कुकटॉप की सतह ज्यादा गर्म नहीं होती, इसलिए खाना गिरने पर जलता नहीं और इसे साफ करना आसान रहता है।
ऊर्जा की बचत
ऊर्जा एक्सपर्ट्स के मुताबिक इंडक्शन कुकिंग गैस कुकिंग की तुलना में ज्यादा ऊर्जा कुशल हो सकती है।
ज्यादा सुरक्षित
खुली आग न होने की वजह से आग लगने का खतरा कम होता है।
induction cooking
- फोटो : Adobe stock
तीसरा सवाल: क्या हर बर्तन इंडक्शन पर काम करेगा?
इंडक्शन चूल्हे पर वही बर्तन काम करते हैं जिनका तला मैग्नेटिक मेटल से बना होता है, जैसे स्टेनलेस स्टील, कास्ट आयरन और साधारण एल्यूमिनियम या तांबे के बर्तन आमतौर पर इंडक्शन पर काम नहीं करते।
इंडक्शन चूल्हे पर वही बर्तन काम करते हैं जिनका तला मैग्नेटिक मेटल से बना होता है, जैसे स्टेनलेस स्टील, कास्ट आयरन और साधारण एल्यूमिनियम या तांबे के बर्तन आमतौर पर इंडक्शन पर काम नहीं करते।
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induction cooking
- फोटो : Adobe stock
तो अब क्यों बढ़ रही है इंडक्शन कुकटॉप की मांग?
देश में गैस की कीमतों और ऊर्जा लागत को लेकर चर्चा के बीच लोग ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो सस्ते, सुरक्षित और सुविधाजनक हों। बिजली की बेहतर उपलब्धता और किचन टेक्नोलॉजी के विकास के कारण इंडक्शन कुकटॉप तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट किचन उपकरणों के साथ-साथ इंडक्शन कुकिंग भारतीय घरों में और ज्यादा आम हो सकती है। ध्यान रहे कि इंडक्शन पर केवल वही बर्तन काम करते हैं जिनमें चुंबकीय क्षमता हो (जैसे स्टेनलेस स्टील, कास्ट आयरन)। चेक करने के लिए बर्तन के नीचे चुम्बक सटाकर देखें। इसके लिए अगर चिपक जाए, तो वह इंडक्शन के लिए परफेक्ट है।
देश में गैस की कीमतों और ऊर्जा लागत को लेकर चर्चा के बीच लोग ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं जो सस्ते, सुरक्षित और सुविधाजनक हों। बिजली की बेहतर उपलब्धता और किचन टेक्नोलॉजी के विकास के कारण इंडक्शन कुकटॉप तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले वर्षों में स्मार्ट किचन उपकरणों के साथ-साथ इंडक्शन कुकिंग भारतीय घरों में और ज्यादा आम हो सकती है। ध्यान रहे कि इंडक्शन पर केवल वही बर्तन काम करते हैं जिनमें चुंबकीय क्षमता हो (जैसे स्टेनलेस स्टील, कास्ट आयरन)। चेक करने के लिए बर्तन के नीचे चुम्बक सटाकर देखें। इसके लिए अगर चिपक जाए, तो वह इंडक्शन के लिए परफेक्ट है।