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Satellite: क्या है EO-2 सैटेलाइट? पाकिस्तान को भेजेगा हाई-डेफिनेशन तस्वीरें, क्या भारत की बढ़ेगी टेंशन?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Fri, 13 Feb 2026 02:40 PM IST
सार
What Is EO-2 Satellite: पाकिस्तान ने गुरुवार को अपना दूसरा स्वदेशी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EO-2 सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे चीन के लॉन्च बेस से लॉन्च किया गया। कुछ एक्सपर्ट्स संभावना जता रहे हैं कि इससे पाकिस्तान की भारत पर जासूसी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
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पाकिस्तान ने लॉन्च किया ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट
- फोटो : CGTN
हाल ही में पाकिस्तान ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए एक नया सैटेलाइट लॉन्च किया है। गुरुवार को पाकिस्तान ने दूसरा स्वदेशी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EO-2 अंतरिक्ष में भेजा। इसे चीन के यांगजियांग सीशोर लॉन्च सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इस मिशन को पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी 'स्पेस एंड अपर एटमोस्फेयर रिसर्च कमीशन' (SUPARCO) ने विकसित किया है। आइए जानते हैं इस सैटैलाइट का अंतरिक्ष में क्या काम होगा और क्या भारत को इससे चिंता करने की जरूरत है?
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क्या है EO-2 सैटेलाइट? (सांकेतिक)
- फोटो : AI
क्या है EO-2 सैटेलाइट?
EO-2 एक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सैटेलाइट है, जो अर्थ ऑब्जर्वेशन में काम आएगा। इसे इमेजिंग क्षमताओं को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। यह धरती पर पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी को हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें भेजने का काम करेगा। इससे पहले पाकिस्तान ने अपना पहला EO-1 सैटेलाइट चीन के जिउक्वान लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया था। EO-2 के शामिल होने से पाकिस्तान के सैटेलाइट बेड़े में बढ़ोतरी हुई है, जिससे डेटा कवरेज और सटीकता बेहतर होने की उम्मीद की जा रही है।
EO-2 एक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सैटेलाइट है, जो अर्थ ऑब्जर्वेशन में काम आएगा। इसे इमेजिंग क्षमताओं को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। यह धरती पर पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी को हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरें भेजने का काम करेगा। इससे पहले पाकिस्तान ने अपना पहला EO-1 सैटेलाइट चीन के जिउक्वान लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया था। EO-2 के शामिल होने से पाकिस्तान के सैटेलाइट बेड़े में बढ़ोतरी हुई है, जिससे डेटा कवरेज और सटीकता बेहतर होने की उम्मीद की जा रही है।
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किन क्षेत्रों में होगा इस्तेमाल? (सांकेतिक)
- फोटो : AI
किन क्षेत्रों में होगा इस्तेमाल?
पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी ने लॉन्च के बाद बयान जार कर सैटेलाइट की जानकारी साझा की है। SUPARCO के अनुसार, यह सैटेलाइट विकास योजनाओं, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और शहरी विस्तार की मॉनिटरिंग में मदद करेगा। इसके अलावा, बेहतर शासन, आपदा प्रबंधन, जलवायु विश्लेषण और रणनीतिक निर्णय लेने के लिए भी यह सटीक और समय पर सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराएगा।
पाकिस्तानी स्पेस एजेंसी ने लॉन्च के बाद बयान जार कर सैटेलाइट की जानकारी साझा की है। SUPARCO के अनुसार, यह सैटेलाइट विकास योजनाओं, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और शहरी विस्तार की मॉनिटरिंग में मदद करेगा। इसके अलावा, बेहतर शासन, आपदा प्रबंधन, जलवायु विश्लेषण और रणनीतिक निर्णय लेने के लिए भी यह सटीक और समय पर सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराएगा।
क्या भारत की चिंता बढ़ सकती है? (सांकेतिक)
- फोटो : AI
क्या भारत की चिंता बढ़ सकती है?
यह किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान अपनी तरक्की से ज्यादा भारत के नुकसान के बारे में सोचता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान EO-2 का उपयोग भारत की जासूसी के लिए कर सकता है। रीयल-टाइम इमेजिंग से सीमा क्षेत्रों या सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना संभव हो सकता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को इससे ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। पाकिस्तान का स्पेस प्रोग्राम अभी सीमित है और उसकी क्षमताएं भारत की स्पेस संगठन इसरो (ISRO) की तुलना में काफी पीछे हैं।
यह किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान अपनी तरक्की से ज्यादा भारत के नुकसान के बारे में सोचता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान EO-2 का उपयोग भारत की जासूसी के लिए कर सकता है। रीयल-टाइम इमेजिंग से सीमा क्षेत्रों या सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना संभव हो सकता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत को इससे ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। पाकिस्तान का स्पेस प्रोग्राम अभी सीमित है और उसकी क्षमताएं भारत की स्पेस संगठन इसरो (ISRO) की तुलना में काफी पीछे हैं।
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, ISRO
- फोटो : Adobe Stock
ISRO के सामने कहां ठहरता है SUPARCO?
भारत के पास पहले से ही एडवांस अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स, जैसे कार्टोसैट सीरीज, मौजूद हैं जो 25 से 50 सेंटीमीटर तक की हाई रिजॉल्यूशन इमेजिंग और निरंतर कवरेज प्रदान करते हैं। इस लिहाज से EO-2 भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा।
भारत के पास पहले से ही एडवांस अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स, जैसे कार्टोसैट सीरीज, मौजूद हैं जो 25 से 50 सेंटीमीटर तक की हाई रिजॉल्यूशन इमेजिंग और निरंतर कवरेज प्रदान करते हैं। इस लिहाज से EO-2 भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा नहीं माना जा रहा।