{"_id":"6a83dd17ffd2437a2f03c67d","slug":"bribes-fyi-bribe-reporting-website-launched-by-anonymous-creater-in-india-know-details-2026-08-18","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"अब रिश्वतखोर होंगे बेनकाब: ये वेबसाइट बताएगी कब, कहां और किसने ली कितनी घूस, पूरी दुनिया देखेगी रिकॉर्ड","category":{"title":"Tech Diary","title_hn":"टेक डायरी","slug":"tech-diary"}}
अब रिश्वतखोर होंगे बेनकाब: ये वेबसाइट बताएगी कब, कहां और किसने ली कितनी घूस, पूरी दुनिया देखेगी रिकॉर्ड
Tue, 18 Aug 2026 09:51 AM IST
नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 18 Aug 2026 09:51 AM IST
सार
Bribe Reporting Website: भारत में सरकारी कामों के लिए रिश्वतखोरी एक आम समस्या है। लेकिन अब एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया गया है, जहां आप बिना अपनी पहचान बताए घूस मांगने वालों की रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं। जानिए इसके बारे में सबकुछ।
विज्ञापन
वेबसाइट रखता है रिश्वत की हर डिटेल
- फोटो : bribes.fyi
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हम सभी ने कभी न कभी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे हैं। चाहे RTO में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना हो, पुलिस स्टेशन में कोई शिकायत दर्ज करानी हो या फिर नगर निगम का कोई काम हो, आम नागरिक का पाला अक्सर ऐसे कर्मचारियों या अधिकारियों से पड़ जाता है जो काम के बदले रिश्वत की मांग करते हैं। अक्सर लोग डर या झंझट से बचने के लिए पैसे दे देते हैं और ये घटनाएं दबी रह जाती हैं। लेकिन अब भ्रष्टाचार की इन घटनाओं का रिकॉर्ड रखने के लिए एक शानदार डिजिटल पहल शुरू हुई है।
कर्नाटक से सबसे ज्यादा रिश्वत की शिकायतें मिली
- फोटो : bribes.fyi
क्या है bribes.fyi प्लेटफॉर्म?
पुलिस महकमे की सबसे ज्यादा शिकायतें
17 अगस्त तक इस प्लेटफॉर्म पर पूरे भारत से कुल 792 शिकायतें दर्ज की जा चुकी थीं। इनमें से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे काफी हैरान करने वाले हैं:
- वेबसाइट के अनुसार, यह भारत की पहली 'क्राउडसोर्स्ड ब्राइब रजिस्ट्री' यानी आम जनता द्वारा जुटाया गया रिश्वत का डेटाबेस है। इस प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से लोगों की प्राइवेसी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह आम लोगों को मौका देता है कि वे रिश्वत मांगे जाने की घटनाओं को बिना अपना नाम उजागर किए रिपोर्ट कर सकें।
- इस वेबसाइट पर किसी भी तरह का अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं होती। यूजर्स बेझिझक उस विभाग, शहर और घटना की जानकारी साझा कर सकते हैं जहां उनसे घूस मांगी गई। यह प्लेटफॉर्म न सिर्फ दी गई रिश्वत को दर्ज करता है, बल्कि उन मामलों को भी रिकॉर्ड करता है जहां नागरिक ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया।
पुलिस महकमे की सबसे ज्यादा शिकायतें
17 अगस्त तक इस प्लेटफॉर्म पर पूरे भारत से कुल 792 शिकायतें दर्ज की जा चुकी थीं। इनमें से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे काफी हैरान करने वाले हैं:
- सबसे ज्यादा शिकायतें: कुल 792 रिपोर्ट में से 426 शिकायतें अकेले पुलिस विभाग के खिलाफ दर्ज की गई हैं, जो सभी विभागों में सबसे अधिक है।
- राज्यों का हाल: डेटा के मुताबिक, कर्नाटक से सबसे ज्यादा रिश्वत की शिकायतें मिली हैं। हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह है कि कर्नाटक में 11 प्रतिशत लोगों ने रिश्वत देने से मना भी किया।
- सबसे बड़ी घूस: जम्मू और कश्मीर में रिश्वत की औसत रकम सबसे ज्यादा पाई गई है, जो औसतन 19,067 रुपये प्रति मामला दर्ज की गई है।
पुलिस विभाग में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार
- फोटो : bribes.fyi
कौन हैंडल करता है bribes.fyi प्लेटफॉर्म?
अनूपम मित्तल भी हुए वेबसाइट के मुरीद
bribes.fyi की चर्चा अब खबरों से बाहर निकलकर सोशल मीडिया और कारोबारी जगत में भी हो रही है। हाल ही में शादी डॉट कॉम और पीपल ग्रुप के फाउंडर और सीईओ अनुपम मित्तल ने लिंक्डइन पर इस पहल की सराहना की। उन्होंने इसे देश में शासन और जवाबदेही बेहतर करने की क्षमता रखने वाली पहल बताया और आर्यन निषाद के प्रयास की तारीफ की। मित्तल ने उम्मीद जताई कि जेन-जी और अल्फा पीढ़ी के दूसरे युवा भी इसी तरह के प्रयासों के जरिए भारत में सार्थक बदलाव लाने की कोशिश करेंगे।
50 लाख लोगों ने दर्ज की रिश्वतखोरी की शिकायत
मनीष शाहनी ने एक लिंक्डइन पोस्ट के जरिए बताया कि प्लेटफॉर्म के लॉन्च होने के बाद करीब 50 लाख लोगों ने रिश्वतखोरी की शिकायतें दर्ज कराई हैं। वहीं पिछले 48 घंटों में इस वेबसाइट को लगभग 2 लाख नए यूजर्स ने विजिट किया है। फिलहाल ब्राइब्स ने नई सबमिशन और सपोर्ट सेवाओं को रोक दिया गया है। वेबसाइट ने जानकारी दी है कि इसे लंबे समय तक सुचारु रूप से चलाने के लिए कानूनी और वित्तीय ढांचे की समीक्षा की जा रही है जिसके चलते नई शिकायतें कुछ समय के लिए नहीं ली जाएंगी। प्लेटफॉर्म ने बताया कि यह एक स्वैच्छिक और एहतियाती कदम है, किसी शिकायत के जवाब में नहीं।
bribes.fyi पर रिश्वत की रिपोर्ट कैसे दर्ज करें?
- इस प्लेटफॉर्म को आर्यन निषाद ने बनाया है, जो महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में बीटेक के छात्र हैं। वेबसाइट की सबसे अहम विशेषताओं में से एक यूजर की पहचान को सुरक्षित रखना है। आर्यन के अलावा, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट मनीष शाहनी भी इस प्लेटफॉर्म को हैंडल कर रहे हैं।
- प्लेटफॉर्म के मुताबिक, आईपी एड्रेस को सीधे तौर पर स्टोर करने के बजाय उसका हैश तैयार किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिपोर्ट को सीधे यूजर से जोड़ा न जा सके और अलग-अलग दिनों में दर्ज रिपोर्ट के जरिए किसी व्यक्ति की पहचान का पता लगाने की संभावना कम हो।
अनूपम मित्तल भी हुए वेबसाइट के मुरीद
bribes.fyi की चर्चा अब खबरों से बाहर निकलकर सोशल मीडिया और कारोबारी जगत में भी हो रही है। हाल ही में शादी डॉट कॉम और पीपल ग्रुप के फाउंडर और सीईओ अनुपम मित्तल ने लिंक्डइन पर इस पहल की सराहना की। उन्होंने इसे देश में शासन और जवाबदेही बेहतर करने की क्षमता रखने वाली पहल बताया और आर्यन निषाद के प्रयास की तारीफ की। मित्तल ने उम्मीद जताई कि जेन-जी और अल्फा पीढ़ी के दूसरे युवा भी इसी तरह के प्रयासों के जरिए भारत में सार्थक बदलाव लाने की कोशिश करेंगे।
50 लाख लोगों ने दर्ज की रिश्वतखोरी की शिकायत
मनीष शाहनी ने एक लिंक्डइन पोस्ट के जरिए बताया कि प्लेटफॉर्म के लॉन्च होने के बाद करीब 50 लाख लोगों ने रिश्वतखोरी की शिकायतें दर्ज कराई हैं। वहीं पिछले 48 घंटों में इस वेबसाइट को लगभग 2 लाख नए यूजर्स ने विजिट किया है। फिलहाल ब्राइब्स ने नई सबमिशन और सपोर्ट सेवाओं को रोक दिया गया है। वेबसाइट ने जानकारी दी है कि इसे लंबे समय तक सुचारु रूप से चलाने के लिए कानूनी और वित्तीय ढांचे की समीक्षा की जा रही है जिसके चलते नई शिकायतें कुछ समय के लिए नहीं ली जाएंगी। प्लेटफॉर्म ने बताया कि यह एक स्वैच्छिक और एहतियाती कदम है, किसी शिकायत के जवाब में नहीं।
bribes.fyi पर रिश्वत की रिपोर्ट कैसे दर्ज करें?
- इस वेबसाइट पर शिकायत या अनुभव दर्ज करने की प्रक्रिया काफी आसान है। यूजर को अकाउंट बनाने या अपना नाम देने की जरूरत नहीं होती। सिर्फ घटना से जुड़ी जरूरी जानकारी भरनी होती है।
- रिपोर्ट करते समय विभाग, मांगी गई रकम और पूरी घटना का डिटेल देना होता है। इसके बाद डेटा को प्लेटफॉर्म के सार्वजनिक इंडेक्स में शामिल किया जाता है।
- वेबसाइट का दावा है कि जब किसी खास कार्यालय या अधिकारी से जुड़े मामलों का पैटर्न उभरता है, तो उसका एल्गोरिदम ऐसे मामलों को सत्यापित पैटर्न के तौर पर फ्लैग करता है। सत्यापित रिपोर्ट सार्वजनिक इंडेक्स में स्थायी रूप से उपलब्ध रहती हैं और इन्हें राज्य, विभाग, रकम और तारीख के आधार पर खोजा जा सकता है।