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AI की जंग: अमेरिका के गले तक पहुंचा चीन! गूगल डीपमाइंड के CEO बोले- अब फासला साल का नहीं, महीनों का है
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Tue, 20 Jan 2026 09:12 AM IST
सार
गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हसाबिस के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में चीन अब अमेरिका से वर्षों नहीं, बल्कि महज कुछ महीने ही पीछे रह गया है। हालांकि चीन के पास बेहतरीन इंजीनियरिंग है, लेकिन असली चुनौती अब नई खोज और आविष्कार करने की है।
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एआई
- फोटो : AI
अभी तक दुनिया भर में यह माना जा रहा था कि चीन AI तकनीक के मामले में अमेरिका और पश्चिमी देशों से काफी पीछे है। लेकिन गूगल की AI लैब DeepMind के प्रमुख डेमिस हसाबिस ने इस धारणा को बदल दिया है। एक हालिया पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि चीन अब हमारी सोच से कहीं ज्यादा करीब है। उनका मानना है कि एआई की रेस में चीन अब अमेरिका से सिर्फ कुछ ही महीने पीछे रह गया है।
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DeepSeek ने बदला खेल
हसाबिस ने बताया कि करीब एक साल पहले जब चीनी लैब DeepSeek ने अपना मॉडल पेश किया, तो पूरी दुनिया के बाजार में हलचल मच गई। चौंकाने वाली बात यह थी कि चीन ने यह मॉडल कम बजट और पुरानी तकनीक वाले चिप्स का इस्तेमाल करके बनाया था, फिर भी इसकी परफॉर्मेंस अमेरिकी मॉडल्स के बराबर थी। अब अलीबाबा (Alibaba), मूनशॉट (Moonshot) और झिपु (Zhipu) जैसी चीनी कंपनियां भी लगातार बेहतरीन तकनीक पेश कर रही हैं।
हसाबिस ने बताया कि करीब एक साल पहले जब चीनी लैब DeepSeek ने अपना मॉडल पेश किया, तो पूरी दुनिया के बाजार में हलचल मच गई। चौंकाने वाली बात यह थी कि चीन ने यह मॉडल कम बजट और पुरानी तकनीक वाले चिप्स का इस्तेमाल करके बनाया था, फिर भी इसकी परफॉर्मेंस अमेरिकी मॉडल्स के बराबर थी। अब अलीबाबा (Alibaba), मूनशॉट (Moonshot) और झिपु (Zhipu) जैसी चीनी कंपनियां भी लगातार बेहतरीन तकनीक पेश कर रही हैं।
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OpenAI
- फोटो : Adobe Stock
इनोवेशन पर अभी सवाल
हालांकि हासाबिस का मानना है कि चीन ने यह साबित कर दिया है कि वह तेजी से बराबरी कर सकता है, लेकिन असली चुनौती कुछ बिल्कुल नया विकसित करने की है। उनके अनुसार, अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि चीनी कंपनियां AI में कोई बड़ा वैज्ञानिक ब्रेकथ्रू कर पाई हैं या नहीं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में Google द्वारा विकसित किया गया ‘ट्रांसफॉर्मर’ AI की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था, जिस पर आज ChatGPT और Gemini जैसे बड़े मॉडल आधारित हैं। सवाल यह है कि क्या चीन ऐसा ही कोई नया विचार पेश कर पाएगा?
हालांकि हासाबिस का मानना है कि चीन ने यह साबित कर दिया है कि वह तेजी से बराबरी कर सकता है, लेकिन असली चुनौती कुछ बिल्कुल नया विकसित करने की है। उनके अनुसार, अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि चीनी कंपनियां AI में कोई बड़ा वैज्ञानिक ब्रेकथ्रू कर पाई हैं या नहीं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2017 में Google द्वारा विकसित किया गया ‘ट्रांसफॉर्मर’ AI की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था, जिस पर आज ChatGPT और Gemini जैसे बड़े मॉडल आधारित हैं। सवाल यह है कि क्या चीन ऐसा ही कोई नया विचार पेश कर पाएगा?
एनवीडिया चिप
- फोटो : adobestock
दूसरे दिग्गजों की राय
AI रेस में चीन की प्रगति को लेकर Nvidia के CEO जेनसन हुआंग भी पहले बयान दे चुके हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका चिप्स में आगे है, लेकिन चीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और AI मॉडल्स में काफी करीब है। चीन की टेक कंपनियों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत एडवांस सेमीकंडक्टर तक पहुंच की है। अमेरिका ने Nvidia की हाई-एंड चिप्स के चीन को निर्यात पर रोक लगा रखी है, जो उन्नत AI मॉडल ट्रेन करने के लिए जरूरी होती हैं।
हालांकि व्हाइट हाउस ने Nvidia की H200 चिप को चीन को बेचने की मंजूरी देने के संकेत दिए हैं, लेकिन यह कंपनी की सबसे उन्नत चिप नहीं है। Huawei जैसी चीनी कंपनियां घरेलू चिप्स के जरिए इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन प्रदर्शन के मामले में वे अभी Nvidia से पीछे हैं।
AI रेस में चीन की प्रगति को लेकर Nvidia के CEO जेनसन हुआंग भी पहले बयान दे चुके हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका चिप्स में आगे है, लेकिन चीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और AI मॉडल्स में काफी करीब है। चीन की टेक कंपनियों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत एडवांस सेमीकंडक्टर तक पहुंच की है। अमेरिका ने Nvidia की हाई-एंड चिप्स के चीन को निर्यात पर रोक लगा रखी है, जो उन्नत AI मॉडल ट्रेन करने के लिए जरूरी होती हैं।
हालांकि व्हाइट हाउस ने Nvidia की H200 चिप को चीन को बेचने की मंजूरी देने के संकेत दिए हैं, लेकिन यह कंपनी की सबसे उन्नत चिप नहीं है। Huawei जैसी चीनी कंपनियां घरेलू चिप्स के जरिए इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन प्रदर्शन के मामले में वे अभी Nvidia से पीछे हैं।
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गूगल एआई चिप
- फोटो : Google
आगे बढ़ेगा या घटेगा फासला?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय में चिप्स की कमी की वजह से अमेरिका और चीन के AI मॉडल्स के बीच अंतर और बढ़ सकता है। Janus Henderson के पोर्टफोलियो मैनेजर रिचर्ड क्लोड का कहना है कि आने वाले वर्षों में अमेरिकी AI इंफ्रास्ट्रक्चर ज्यादा तेजी से आगे बढ़ेगा। खुद चीनी कंपनियां भी इस चुनौती को स्वीकार कर रही हैं। अलीबाबा के विशेषज्ञों का भी कहना है कि अगले 3-5 साल में अमेरिका को पछाड़ने की संभावना केवल 20% है, क्योंकि अमेरिका के पास कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत बड़ा जाल है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय में चिप्स की कमी की वजह से अमेरिका और चीन के AI मॉडल्स के बीच अंतर और बढ़ सकता है। Janus Henderson के पोर्टफोलियो मैनेजर रिचर्ड क्लोड का कहना है कि आने वाले वर्षों में अमेरिकी AI इंफ्रास्ट्रक्चर ज्यादा तेजी से आगे बढ़ेगा। खुद चीनी कंपनियां भी इस चुनौती को स्वीकार कर रही हैं। अलीबाबा के विशेषज्ञों का भी कहना है कि अगले 3-5 साल में अमेरिका को पछाड़ने की संभावना केवल 20% है, क्योंकि अमेरिका के पास कंप्यूटर इंफ्रास्ट्रक्चर का बहुत बड़ा जाल है।