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सिर्फ कोडिंग नहीं, अब जान भी बचाएगा AI: एक्सीडेंट होने से पहले ही भेज देगा अलर्ट! दावोस में हुई अहम चर्चा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 19 Jan 2026 06:55 PM IST
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सार
दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान सेवलाइफ फाउंडेशन के पीयूष तिवारी ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल वीडियो या टेक्स्ट बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सड़क हादसों की भविष्यवाणी कर जान भी बचा सकता है।
रोड एक्सीडेंट (सांकेतिक)
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
आमतौर पर जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में चैटबॉट्स, सुंदर तस्वीरें या वीडियो आते हैं। लेकिन दावोस में चल रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) से एक ऐसी खबर आई है जो सीधे हमारी सुरक्षा से जुड़ी है। सेवलाइफ फाउंडेशन के संस्थापक पीयूष तिवारी का कहना है कि AI अब सड़कों पर होने वाले हादसों को रोकने में "ब्रह्मास्त्र" साबित हो सकता है।
निजी त्रासदी से उपजा 'सेवलाइफ' का मिशन
पीयूष तिवारी ने सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में तब कदम रखा था जब उन्होंने सड़क हादसे में अपने परिवार के एक युवा सदस्य को खो दिया था। आज उनकी संस्था AI का इस्तेमाल कर यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या हम कुछ डेटा पॉइंट्स को जोड़कर यह बता सकते हैं कि अगला हादसा कहां हो सकता है।
भारत सरकार की बड़ी पहल
इस मिशन में भारत सरकार भी पूरी ताकत के साथ खड़ी है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक ऐसी पहल की घोषणा की है, जहां AI का इस्तेमाल सड़क हादसों के डेटा का विश्लेषण करने और जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए किया जाएगा।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
सेवलाइफ फाउंडेशन इस तकनीक पर पिछले 7-8 वर्षों से काम कर रहा है। इस तकनीक में हाईवे पर खड़ी गाड़ियों की पहचान करने के लिए AI कैमरों और ड्रोन का उपयोग किया जाता है। अक्सर पीछे से होने वाली टक्करें खड़ी गाड़ियों के कारण ही होती हैं। चौराहों पर लगे कैमरे यह पहचानते हैं कि गाड़ियां आपस में टकराने से कितनी बार बचीं। इससे एक हीटमैप तैयार होता है, जिससे खतरनाक इलाकों की पहचान पहले ही हो जाती है।
फाउंडर पीयूष तिवारी के अनुसार, जिन सुरक्षा बदलावों को तय करने में महीनों लग जाते थे, AI की मदद से अब वे फैसले कुछ घंटों या मिनटों में लिए जा सकते हैं।
भविष्य की राह
पीयूष तिवारी का मानना है कि AI को आम जनता के लिए सुलभ बनाना होगा। उनका मिशन भी यही है कि तकनीक को जमीनी स्तर पर लाना ताकि सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके। जब डेटा और तकनीक हाथ मिलाएंगे, तो शायद वो दिन दूर नहीं जब हम सड़क हादसों को इतिहास की बात बना देंगे।
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निजी त्रासदी से उपजा 'सेवलाइफ' का मिशन
पीयूष तिवारी ने सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में तब कदम रखा था जब उन्होंने सड़क हादसे में अपने परिवार के एक युवा सदस्य को खो दिया था। आज उनकी संस्था AI का इस्तेमाल कर यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या हम कुछ डेटा पॉइंट्स को जोड़कर यह बता सकते हैं कि अगला हादसा कहां हो सकता है।
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भारत सरकार की बड़ी पहल
इस मिशन में भारत सरकार भी पूरी ताकत के साथ खड़ी है। केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक ऐसी पहल की घोषणा की है, जहां AI का इस्तेमाल सड़क हादसों के डेटा का विश्लेषण करने और जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए किया जाएगा।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
सेवलाइफ फाउंडेशन इस तकनीक पर पिछले 7-8 वर्षों से काम कर रहा है। इस तकनीक में हाईवे पर खड़ी गाड़ियों की पहचान करने के लिए AI कैमरों और ड्रोन का उपयोग किया जाता है। अक्सर पीछे से होने वाली टक्करें खड़ी गाड़ियों के कारण ही होती हैं। चौराहों पर लगे कैमरे यह पहचानते हैं कि गाड़ियां आपस में टकराने से कितनी बार बचीं। इससे एक हीटमैप तैयार होता है, जिससे खतरनाक इलाकों की पहचान पहले ही हो जाती है।
फाउंडर पीयूष तिवारी के अनुसार, जिन सुरक्षा बदलावों को तय करने में महीनों लग जाते थे, AI की मदद से अब वे फैसले कुछ घंटों या मिनटों में लिए जा सकते हैं।
भविष्य की राह
पीयूष तिवारी का मानना है कि AI को आम जनता के लिए सुलभ बनाना होगा। उनका मिशन भी यही है कि तकनीक को जमीनी स्तर पर लाना ताकि सड़कों को सुरक्षित बनाया जा सके। जब डेटा और तकनीक हाथ मिलाएंगे, तो शायद वो दिन दूर नहीं जब हम सड़क हादसों को इतिहास की बात बना देंगे।