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इंटरनेट स्पीड में नया वर्ल्ड रिकॉर्ड: 430Tbps की मिली रफ्तार, पलक झपकने से पहले डाउनलोड हो जाएगी फाइल
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 19 Jan 2026 02:58 PM IST
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सार
New Internet Speed Record: इंटरनेट की दुनिया में नया इतिहास रचते हुए वैज्ञानिकों ने 430Tbps की रिकॉर्ड स्पीड हासिल की है। यह रफ्तार इतनी तेज है कि 80GB का भारी गेम को सेकेंड के सौंवे हिस्से में डाउनलोड किया जा सकता है। यह भविष्य के 7G नेटवर्क की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
इंटरनेट स्पीड में बना नया वर्ल्ड रिकॉर्ड
- फोटो : AI जनरेटेड
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विस्तार
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि जितना समय आपको अपनी पलक झपकाने में लगता है, उससे भी 100 गुना कम समय में आप एक पूरी फिल्म या भारी-भरकम गेम डाउनलोड कर लें? ब्रिटेन की एस्टन यूनिवर्सिटी और जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशंस टेक्नोलॉजी (NICT) के शोधकर्ताओं ने यह कारनामा कर दिखाया है। उन्होंने 4,30,000 Gbps की अविश्वसनीय डेटा ट्रांसफर स्पीड हासिल कर नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। यह रफ्तार इतनी तेज है कि 80GB के भारी गेम को महज 1 मिलीसेकंड यानी सेकेंड के 1000वें हिस्से के बराबर समय में डाउनलोड किया जा सकता है। बते दें कि इंसान को पलक झपकने में 100 से 400 मिलीसेकेंड का समय लगता है।
बिना नए केबल बिछाए बढ़ेगी इंटरनेट की रफ्तार
इस खोज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसी खास या नए तरह के केबल की जरूरत नहीं पड़ी। वैज्ञानिकों ने उन्हीं 'स्टैंडर्ड ऑप्टिक फाइबर' केबल्स का इस्तेमाल किया, जो आज दुनिया भर में इंटरनेट चलाने के लिए जमीन के नीचे बिछी हुई हैं। वैज्ञानिकों ने केबल्स को बदलने के बजाय डेटा भेजने के तरीके में बदलाव किया। उन्होंने लाइट वेव्स के उन हिस्सों का इस्तेमाल किया जिन्हें पहले बेकार छोड़ दिया जाता था। इस तकनीक से कम बैंडविड्थ में भी कहीं ज्यादा डेटा भेजा जा सका।
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बिना नए केबल बिछाए बढ़ेगी इंटरनेट की रफ्तार
इस खोज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसी खास या नए तरह के केबल की जरूरत नहीं पड़ी। वैज्ञानिकों ने उन्हीं 'स्टैंडर्ड ऑप्टिक फाइबर' केबल्स का इस्तेमाल किया, जो आज दुनिया भर में इंटरनेट चलाने के लिए जमीन के नीचे बिछी हुई हैं। वैज्ञानिकों ने केबल्स को बदलने के बजाय डेटा भेजने के तरीके में बदलाव किया। उन्होंने लाइट वेव्स के उन हिस्सों का इस्तेमाल किया जिन्हें पहले बेकार छोड़ दिया जाता था। इस तकनीक से कम बैंडविड्थ में भी कहीं ज्यादा डेटा भेजा जा सका।
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टूटे पिछले सभी रिकॉर्ड
- फोटो : AI जनरेटेड
पिछले रिकॉर्ड भी टूटे
यह उन्हीं वैज्ञानिकों की टीम है जिसने पहले 402 Tbps की रफ़्तार का रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा जापान में ही एक अन्य टेस्ट में 1.02 पेटाबिट्स की स्पीड हासिल की गई थी, लेकिन वह बहुत लंबी दूरी (1,808 किमी) के लिए थी। नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने तो बिना केबल के, हवा में लाइट बीम के जरिए 5.7 Tbps की स्पीड का भी सफल परीक्षण किया है।
7G रिसर्च के लिए क्यों अहम
डेनमार्क में हुई 51वीं ऑप्टिकल कम्यूनिकेशन कॉन्फ्रेंस में पेश इस रिसर्च से संकेत मिलता है कि मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर में अभी भी जबरदस्त संभावनाएं छिपी हैं। यही वजह है कि इसे भविष्य की वायरलेस टेक्नोलॉजी, खासतौर पर 7G रिसर्च, के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी साफ किया कि ये सभी नतीजे कंट्रोल्ड लैब कंडीशन्स में हासिल हुए हैं। इन्हें सस्ती, टिकाऊ और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली नेटवर्क तकनीक में बदलना अभी एक लंबी प्रक्रिया है।
यह उन्हीं वैज्ञानिकों की टीम है जिसने पहले 402 Tbps की रफ़्तार का रिकॉर्ड बनाया था। इसके अलावा जापान में ही एक अन्य टेस्ट में 1.02 पेटाबिट्स की स्पीड हासिल की गई थी, लेकिन वह बहुत लंबी दूरी (1,808 किमी) के लिए थी। नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने तो बिना केबल के, हवा में लाइट बीम के जरिए 5.7 Tbps की स्पीड का भी सफल परीक्षण किया है।
7G रिसर्च के लिए क्यों अहम
डेनमार्क में हुई 51वीं ऑप्टिकल कम्यूनिकेशन कॉन्फ्रेंस में पेश इस रिसर्च से संकेत मिलता है कि मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर में अभी भी जबरदस्त संभावनाएं छिपी हैं। यही वजह है कि इसे भविष्य की वायरलेस टेक्नोलॉजी, खासतौर पर 7G रिसर्च, के लिए अहम माना जा रहा है। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी साफ किया कि ये सभी नतीजे कंट्रोल्ड लैब कंडीशन्स में हासिल हुए हैं। इन्हें सस्ती, टिकाऊ और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाली नेटवर्क तकनीक में बदलना अभी एक लंबी प्रक्रिया है।