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भारत में डीपफेक मामलों में 900% उछाल: ज्यादातर महिलाएं बन रहीं निशाना; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Mon, 16 Mar 2026 12:10 PM IST
सार
नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में डीपफेक कंटेंट तेजी से बढ़ रहा है और हाल के वर्षों में इसमें 900% की बढ़ोतरी हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि ऑनलाइन फैल रहे 90% से ज्यादा आपत्तिजनक डीपफेक वीडियो महिलाओं को निशाना बनाते हैं।
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डीपफेक कंटेंट में हुआ इजाफा
- फोटो : Freepik
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तकनीकी कंपनी पाई-लैब्स की 2026 की रिपोर्ट में भारत में बढ़ते डीपफेक खतरे को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में डीपफेक कंटेंट में करीब 900 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसे “डिजिटल धोखे की महामारी” बताया गया है।
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महिलाओं को बनाया जा रहा निशाना
- फोटो : freepik
महिलाओं को बनाया जा रहा निशाना
रिपोर्ट में सामने आया कि इंटरनेट पर फैल रहे आपत्तिजनक डीपफेक कंटेंट में 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में महिलाएं निशाना बनती हैं। जनरेटिव एआई तकनीक का इस्तेमाल कर बिना सहमति के अश्लील तस्वीरें बनाना, इमेज मॉर्फिंग करना और पहचान से छेड़छाड़ जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
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साइबर अपराध मामलों में भी बढ़ोतरी
- फोटो : freepik
साइबर अपराध मामलों में भी बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार महिलाओं से जुड़े साइबर अपराध के मामलों में भी तेज वृद्धि हुई है। 2024 में ऐसे करीब 50 हजार शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो 2026 तक बढ़कर करीब 80 हजार तक पहुंच गईं। यानी दो साल में लगभग 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
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हजारों AI टूल्स से बढ़ा खतरा
- फोटो : Adobe stock
हजारों AI टूल्स से बढ़ा खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक इंटरनेट पर करीब 5,000 फेस-स्वैप एप्स और 1,000 से अधिक वॉयस-क्लोनिंग टूल्स आम लोगों के लिए उपलब्ध हैं। इसी कारण डीपफेक कंटेंट बनाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। सर्वे में यह भी पाया गया कि भारत की 65 प्रतिशत कंपनियों ने 2026 में डीपफेक से जुड़े किसी न किसी साइबर हमले का सामना किया।
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खुद को सुरक्षित रखें
- फोटो : एआई जनरेटेड
खुद को कैसे सुरक्षित रखें
विशेषज्ञों ने लोगों को सोशल मीडिया पर अपनी प्राइवेसी को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लोग अपनी हाई-क्वालिटी तस्वीरें और ऑडियो क्लिप्स सार्वजनिक रूप से कम साझा करें, क्योंकि यही डेटा एआई मॉडल के लिए “रॉ मटेरियल” बनता है। इसके अलावा सोशल मीडिया अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत रखने और बॉट्स द्वारा डेटा स्क्रैपिंग से बचाव करने की भी सलाह दी गई है।
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