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Smartphone: सस्ते स्मार्टफोन का दौर खत्म? क्यों भारतीय बाजार में अब बजट फोन की जगह प्रीमियम का बढ़ रहा है क्रेज

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Mon, 16 Mar 2026 09:44 AM IST
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सार

भारतीय स्मार्टफोन बाजार अब तेजी से महंगे डिवाइस की ओर शिफ्ट हो रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, बाजार अब बजट फोंस से हटकर प्रीमियम सेगमेंट की ओर बढ़ रहा है। बढ़ती लागत और कंपनियों की मुनाफे वाली रणनीति ने सस्ते फोंस को रेस से लगभग बाहर कर दिया है।

india smartphone market shift Premium phones budget segment decline
सस्ते फोन्स का बाजार घटा - फोटो : एआई जनरेटेड
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विस्तार

मार्केट इंटेलिजेंस फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। कैलेंडर वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में, ₹45,000 से ऊपर वाले अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट ने बाजार में 17% हिस्सेदारी हासिल की है, जो अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। इस रेस में iPhone 16 सबसे आगे रहा, जो दिसंबर 2025 को समाप्त हुई लगातार तीसरी तिमाही में भारत का सबसे ज्यादा शिप किया जाने वाला डिवाइस बन गया है।
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सस्ते फोन्स का बाजार घटा
प्रीमियम स्मार्टफोन्स का यह उभार अचानक नहीं हुआ है। 2025 की तीसरी तिमाही में ₹30,000 से ऊपर के फोन्स की शिपमेंट में सालाना आधार पर 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। वहीं दूसरी तिमाही में अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट में 37 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई। डेटा के मुताबिक ₹20,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स की वैल्यू हिस्सेदारी 2025 में घटकर 29 प्रतिशत रह गई, जबकि दो साल पहले यह करीब 38 प्रतिशत थी। 
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बजट फोन की मांग कम होने की 3 बड़ी वजहें
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बदलाव केवल ग्राहकों की बढ़ती मांग की वजह से नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ गहरी व्यापारिक वजहें भी हैं:

पार्ट्स की बढ़ती कीमतें: स्मार्टफोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कंपोनेंट्स, जैसे मेमोरी (RAM) और डिस्प्ले, के दाम आसमान छू रहे हैं। IDC के अनुसार, 2026 तक वैश्विक स्तर पर स्मार्टफोन्स की औसत कीमत (ASP) 14% तक बढ़कर करीब $523 (लगभग ₹43,000) हो सकती है।

मुनाफे पर फोकस: कंपनियां अब केवल बिक्री बढ़ाने के बजाय मुनाफे पर ध्यान दे रही हैं। सस्ते फोंस में मार्जिन बहुत कम होता है, इसलिए ओईएम अब किफायती फोंस के बजाय महंगे फोंस लॉन्च करना ज्यादा फायदेमंद मान रहे हैं।

बदलती सप्लाई रणनीति: लावा इंटरनेशनल के प्रोडक्ट हेड सुमित सिंह के अनुसार, "प्रीमियमइजेशन" केवल मांग में बदलाव नहीं बल्कि एक सोची-समझी बिजनेस स्ट्रैटेजी है। लागत बढ़ने की वजह से कंपनियां अब उच्च मूल्य वाले सेगमेंट में अपना पोर्टफोलियो बढ़ा रही हैं।

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बजट फोन्स की लॉन्चिंग में आई भारी गिरावट
आंकड़ों में यह साफ दिखता है कि ₹20,000 से कम कीमत वाले फोंस की वैल्यू शेयर दो साल पहले 38% थी, जो 2025 में गिरकर केवल 29% रह गई है। जनवरी 2026 में केवल 13 नए मॉडल लॉन्च हुए, जबकि पिछले वर्षों में यह संख्या 19 के करीब रहती थी। दिलचस्प बात यह है कि ओप्पो, वीवो और रेडमी जैसे ब्रांड्स ने भी ₹15,000 से कम वाले सेगमेंट में हाथ पीछे खींच लिए हैं।



फ्लैगशिप किलर्स का राज
2026 तक ₹10,000 से कम वाले फोंस की शिपमेंट हिस्सेदारी गिरकर 12-13% रह जाने का अनुमान है। अब असली मुकाबला ₹25,000 से ₹60,000 के 'फ्लैगशिप किलर' सेगमेंट में होगा। जहां चीनी कंपनियां इस मिड-रेंज मार्केट को निशाना बना रही हैं, वहीं एपल और सैमसंग ₹60,000 से ऊपर के प्रीमियम टियर पर अपना कब्जा जमाए हुए हैं।
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