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AI ट्रेनिंग के लिए गूगल पर आवाज चुराने का आरोप: बिना इजाजत इस्तेमाल पर गरमाया विवाद, जानें पूरा मामला

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nitish Kumar Updated Thu, 14 May 2026 03:01 PM IST
सार

Google AI Voice Lawsuit: गूगल एक नए कानूनी विवाद में फंस गया है। अमेरिका में कई पुरस्कार विजेता पत्रकारों, पॉडकास्टर्स और ऑडियोबुक नैरेटर्स ने कंपनी पर आरोप लगाया है कि उसने उनकी आवाज की रिकॉर्डिंग बिना अनुमति AI मॉडल ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल की। मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है और इससे AI इंडस्ट्री में डेटा और प्राइवेसी को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

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गूगल पर आवाज चुराने का आरोप - फोटो : Adobe Stock
टेक दिग्गज गूगल के खिलाफ अमेरिका में एक बड़ा मुकदमा दायर किया गया है। आरोप है कि कंपनी ने पत्रकारों, पॉडकास्टर्स और ऑडियोबुक नैरेटर्स की आवाजों का इस्तेमाल बिना अनुमति अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम को ट्रेन करने के लिए किया। यह मामला इलिनॉय की फेडरल कोर्ट में दायर किया गया है।


मुकदमे में कहा गया है कि गूगल ने हजारों घंटों की रिकॉर्डेड आवाजों का उपयोग उन AI मॉडल्स को विकसित करने में किया, जो गूगल एआई असिस्टेंट, जेमिनी लाइन और अन्य वॉयस-आधारित सिस्टम्स को इंसानों जैसी आवाज में बोलने की क्षमता देते हैं।
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कई चर्चित पत्रकार भी शामिल - फोटो : freepik
कई चर्चित पत्रकार भी शामिल
इस प्रस्तावित क्लास-एक्शन मुकदमे में कई नामी पत्रकार शामिल हैं। इनमें शिकागो की प्रसिद्ध पत्रकार कैरल मारीन के साथ पुलित्जर पुरस्कार विजेता योहानस लाकौर और एलिसन फ्लावर्स भी शामिल हैं। वादियों का आरोप है कि Google ने उनकी सहमति के बिना उनकी रिकॉर्डिंग्स का इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि कंपनी ने इंटरनेट से ऑडियो कंटेंट स्क्रैप करके AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल किया, जबकि इसके लिए न तो अनुमति ली गई और न ही कोई भुगतान किया गया।
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स्टूडियो क्वालिटी रिकॉर्डिंग को बनाया गया ट्रेनिंग डेटा - फोटो : अमर उजाला
स्टूडियो क्वालिटी रिकॉर्डिंग को बनाया गया ट्रेनिंग डेटा
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गूगल ने जानबूझकर इंटरनेट से ऐसे वॉयस डेटा को स्क्रैप (निकाला) किया, जो उसके AI के लिए सबसे सटीक थे। गूगल के अपने दस्तावेजों के अनुसार, AI को ट्रेनिंग देने के लिए "स्टूडियो-क्वालिटी, एक ही व्यक्ति द्वारा बोला गया लंबा कंटेंट और पेशेवर रूप से तैयार ऑडियो" सबसे बेहतर होता है। इन पत्रकारों और लेखकों की आवाजें इस प्रोफाइल में बिल्कुल फिट बैठती थीं।

वादियों ने गूगल पर इलिनॉय कानून के तहत पब्लिसिटी राइट्स और बायोमेट्रिक डेटा प्राइवेसी अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने अदालत से हर्जाने के रूप में आर्थिक मुआवजे की मांग की है, हालांकि रकम का खुलासा नहीं किया गया।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) - फोटो : Freepik
कानूनी दांव-पेंच और पुराने मामले
यह मामला उन कई मुकदमों में से एक है, जो हाल के महीनों में AI कंपनियों के खिलाफ दायर किए गए हैं। लेखकों, न्यूज संगठनों और कंटेंट क्रिएटर्स का आरोप है कि टेक कंपनियां उनके काम का इस्तेमाल बिना अनुमति AI मॉडल ट्रेन करने में कर रही हैं। हालांकि, इस मामले में अभी गूगल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले जनवरी में एनपीआर (NPR) के पूर्व होस्ट डेविड ग्रीन ने कैलिफोर्निया में गूगल पर ऐसा ही केस किया था। न्यूयॉर्क में वॉयस ओवर स्टार्टअप Lovo पर भी कलाकारों ने आवाज के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है।

दुनिया भर में लेखक और मीडिया संस्थान अब टेक कंपनियों के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं, क्योंकि उनकी मेहनत का इस्तेमाल बिना पूछे और बिना किसी मुआवजे के AI को स्मार्ट बनाने में किया जा रहा है।
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