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इंटरनेट पर 'टोल टैक्स' लगाने की तैयारी में ईरान: Netflix-YouTube देखना पड़ सकता है महंगा; घट सकती है स्पीड
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Wed, 13 May 2026 07:16 PM IST
सार
Iran Internet Toll Tax: दुनिया की तेल सप्लाई के लिए अहम माने जाने वाले हॉर्मुज स्ट्रेट को अब ईरान एक नए “डिजिटल हथियार” में बदलना चाहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स पर टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर सिर्फ टेक कंपनियों पर नहीं बल्कि आम इंटरनेट यूजर्स की जेब और स्पीड दोनों पर पड़ सकता है।
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अब ईरान की नजर इंटरनेट पर
- फोटो : एआई जनरेटेड
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान की पाबंदियों के वजह से पहले ही दुनियाभर में तेल और गैस की कीमतें उफान पर हैं। अब ईरान की नजर इस इलाके में समुद्र के अंदर बिछे इंटरनेट केबल तक भी पहुंच गई है।
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समुद्री इंटरनेट पर कर सकता है कंट्रोल
- फोटो : एआई जनरेटेड
इंटरनेट पर 'डिजिटल टोल' की तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने सरकार से हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली अंडरसी इंटरनेट केबल्स पर “डिजिटल टोल” लगाने की मांग की है। ईरान इन केबल्स को “हिडन हाईवे” बता रहा है, जहां से हर दिन 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन गुजरते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने सरकार से हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाली अंडरसी इंटरनेट केबल्स पर “डिजिटल टोल” लगाने की मांग की है। ईरान इन केबल्स को “हिडन हाईवे” बता रहा है, जहां से हर दिन 10 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन गुजरते हैं।
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क्या है ईरान का तीन-स्टेप प्लान?
- फोटो : AI
क्या है ईरान का तीन-स्टेप प्लान?
तस्निम और फार्स न्यूज एजेंसियों की रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इस डिजिटल कंट्रोल के लिए तीन बड़े कदम सुझाए हैं। पहला, Meta, Amazon, Microsoft और दूसरी विदेशी टेक कंपनियों से अंडरसी केबल्स के लिए ट्रांजिट टैक्स या सालाना टोल वसूला जा सकता है।
दूसरा, अगर इन कंपनियों का डेटा ईरान के जलक्षेत्र से गुजरता है, तो उन्हें ईरानी कानूनों के तहत काम करना पड़ सकता है। तीसरा, इंटरनेट केबल्स की मरम्मत और मेंटेनेंस का पूरा कंट्रोल ईरानी कंपनियों को दिया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ दिनों के लिए भी इन केबल्स में रुकावट आने पर दुनिया को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो सकता है।
तस्निम और फार्स न्यूज एजेंसियों की रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इस डिजिटल कंट्रोल के लिए तीन बड़े कदम सुझाए हैं। पहला, Meta, Amazon, Microsoft और दूसरी विदेशी टेक कंपनियों से अंडरसी केबल्स के लिए ट्रांजिट टैक्स या सालाना टोल वसूला जा सकता है।
दूसरा, अगर इन कंपनियों का डेटा ईरान के जलक्षेत्र से गुजरता है, तो उन्हें ईरानी कानूनों के तहत काम करना पड़ सकता है। तीसरा, इंटरनेट केबल्स की मरम्मत और मेंटेनेंस का पूरा कंट्रोल ईरानी कंपनियों को दिया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ दिनों के लिए भी इन केबल्स में रुकावट आने पर दुनिया को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो सकता है।
आम इंटरनेट यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?
- फोटो : X
आम इंटरनेट यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?
अगर ईरान इस प्लान को लागू करता है, तो इसका असर पूरी दुनिया के इंटरनेट यूजर्स पर दिख सकता है। टेक कंपनियां नए खर्च का बोझ यूजर्स पर डाल सकती हैं। ऐसे में Google One, Microsoft 365 और दूसरी क्लाउड या सब्सक्रिप्शन सेवाएं महंगी हो सकती हैं।
इसके अलावा अगर कंपनियां हॉर्मुज स्ट्रेट से डेटा रूट करने से बचना चाहेंगी, तो उन्हें लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे इंटरनेट लेटेंसी बढ़ सकती है। यानी ऑनलाइन गेमिंग में लैग, वीडियो कॉल में देरी और 4K वीडियो स्ट्रीमिंग स्लो होने जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
अगर ईरान इस प्लान को लागू करता है, तो इसका असर पूरी दुनिया के इंटरनेट यूजर्स पर दिख सकता है। टेक कंपनियां नए खर्च का बोझ यूजर्स पर डाल सकती हैं। ऐसे में Google One, Microsoft 365 और दूसरी क्लाउड या सब्सक्रिप्शन सेवाएं महंगी हो सकती हैं।
इसके अलावा अगर कंपनियां हॉर्मुज स्ट्रेट से डेटा रूट करने से बचना चाहेंगी, तो उन्हें लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे इंटरनेट लेटेंसी बढ़ सकती है। यानी ऑनलाइन गेमिंग में लैग, वीडियो कॉल में देरी और 4K वीडियो स्ट्रीमिंग स्लो होने जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
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डेटा प्राइवेसी को लेकर भी चिंता
- फोटो : AI
डेटा प्राइवेसी को लेकर भी चिंता
ईरान का कहना है कि उसकी समुद्री सीमा से गुजरने वाली केबल्स पर उसका कानूनी अधिकार बनता है। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर कंपनियों को स्थानीय कानून मानने पड़े, तो यूजर्स के डेटा की प्राइवेसी और निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।
ईरान का कहना है कि उसकी समुद्री सीमा से गुजरने वाली केबल्स पर उसका कानूनी अधिकार बनता है। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर कंपनियों को स्थानीय कानून मानने पड़े, तो यूजर्स के डेटा की प्राइवेसी और निगरानी को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं।