‘पूरी पीढ़ी को बर्बाद नहीं होने दे सकते’: अश्लील एप्स पर दिल्ली हाई कोर्ट ने Google-Apple को लगाई फटकार
Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल और एपल को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद अश्लील कंटेंट वाले एप्स पर तुरंत लगाम लगाने के सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' के नाम पर देश की पूरी युवा पीढ़ी को बर्बाद होने की छूट नहीं दी जा सकती। टेक कंपनियों को अब केवल शिकायतों का इंतजार करने के बजाय, एप अपलोड होते ही ऐसे कंटेंट को रोकने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
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विस्तार
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को टेक दिग्गज गूगल और एपल को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि वे अपने प्लेटफॉर्म जैसे गूगल प्ले स्टोर और एपल एप स्टोर पर मौजूद अश्लील और वल्गर कंटेंट परोसने वाले मोबाइल एप्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि इंटरनेट पर मौजूद इस तरह के कंटेंट से पूरी की पूरी पीढ़ी को बर्बाद होने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने बेहद सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे देश की पूरी एक पीढ़ी को इस तरह के कंटेंट की वजह से बर्बाद होते हुए नहीं देख सकते। बेंच ने आगे विस्तार देते हुए कहा कि हालांकि वे संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिलने वाली अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा सम्मान करते हैं। लेकिन इस आजादी का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि किसी को भी अश्लील सामग्री फैलाने की खुली छूट दे दी जाए।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला रुबिका थापा नाम की एक महिला के जरिए हाई कोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। इस याचिका में गूगल और एपल के प्लेटफॉर्म पर मौजूद उन एप्स पर रोक लगाने की मांग की गई है, जो यूजर्स को लुभाने के लिए अश्लील लाइव स्ट्रीमिंग का सहारा लेते हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि इन एप्स तक बच्चों की पहुंच बहुत आसान है और इन्हें किसी भी मोबाइल में आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है।
इतना ही नहीं, इन एप्स का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और हनी-ट्रैप जैसे गंभीर अपराधों को अंजाम देने के लिए भी किया जा रहा है। वकील ने इस बात पर भी चिंता जताई कि इनमें से ज्यादातर एप्स विदेशी हैं, जो भारतीय कानूनों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए भारत से करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे हैं।
टेक कंपनियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कानूनी ढांचे के भीतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और टेक कंपनियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि कंपनियों को केवल किसी की शिकायत मिलने का इंतजार नहीं करना चाहिए। बल्कि अपनी तकनीक का उपयोग कर एक ऐसा मजबूत सिस्टम विकसित करना चाहिए।इससे कंटेंट या एप अपलोड होते समय ही उनकी गहन जांच हो सके। इसके साथ ही, कोर्ट ने गूगल, एपल और केंद्र सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे 2021 के आईटी नियमों का पालन सुनिश्चित करें ताकि डिजिटल स्पेस को सुरक्षित बनाया जा सके।
इस मामले पर सरकार का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने भी माना कि इस बढ़ते खतरे पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही हर हाल में तय होनी चाहिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, गूगल, एपल और CERT-In को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। इन सभी पक्षों से 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' मांगी गई है।
इसमें उन्हें यह विस्तार से बताना होगा कि इस दिशा में अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी। इसमें कोर्ट इन कंपनियों द्वारा दी गई रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।