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अब रोबोट को भी होगा दर्द: वैज्ञानिकों ने बनाई इंसानों जैसी चमड़ी, चोट लगने पर तुरंत खिंच लेगा हाथ
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Sun, 04 Jan 2026 12:03 PM IST
सार
e-Skin For Humanoid Robot: हॉन्गकॉन्ग के वैज्ञानिकों ने रोबोटिक्स की दुनिया में बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ऐसी आर्टिफिशियल स्किन विकसित की है, जो रोबोट्स को इंसानों की तरह स्पर्श और दर्द को महसूस कराएगी।
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इंसानों जैसे दर्द महसूस करेंगे रोबोट्स
- फोटो : AI
तकनीक की मदद से इंसानों ऐसे रोबोट्स बनाने में कामयाब हुए हैं जो बल्कुल इंसानों जैसा सोच और समझ सकते हैं। लेकिन अब तक इंसान और मशीनों के बीच एक बड़ा अंतर ये रहा है कि मशीनें इंसानों जैसे किसी चीज को महसूस नहीं कर सकते। उन्हें न ठंड महसूस होती है न ही चोट लगने पर दर्द होता है और न ही वो किसी चीज को छू कर बता सकते हैं कि वह गर्म है या ठंडा। लेकिन अब इंसान एक ऐसी तकनीक विकसित करने के बहुत करीब आ गए हैं, जो रोबोट्स को भी इंसानों जैसा ही दर्द महसूस कराएगा।
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इंसानी नर्व सिस्टम से प्रेरित है यह तकनीक
- फोटो : AI
इंसानी नर्व सिस्टम से प्रेरित है यह तकनीक
सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के इंजीनियर युयु गाओ (Yuyu Gao) और उनकी टीम ने एक ऐसी न्यूरोमॉर्फिक रोबोटिक स्किन तैयार की है, जो बिल्कुल हमारे नर्व सिस्टम की तरह काम करती है। यह तकनीक रोबोट को यह समझने में मदद करती है कि उसे किसी ने प्यार से छुआ है या फिर कोई ऐसी चीज लगी है जिससे उसे नुकसान पहुंच सकता है। अक्सर साधारण रोबोटिक स्किन सिर्फ दबाव को नापती है, लेकिन यह नई स्किन शारीरिक संपर्क को बिजली के संकेतों में बदल देती है, जो हमारे शरीर की नसों में दौड़ने वाले पल्स की तरह होते हैं।
सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग के इंजीनियर युयु गाओ (Yuyu Gao) और उनकी टीम ने एक ऐसी न्यूरोमॉर्फिक रोबोटिक स्किन तैयार की है, जो बिल्कुल हमारे नर्व सिस्टम की तरह काम करती है। यह तकनीक रोबोट को यह समझने में मदद करती है कि उसे किसी ने प्यार से छुआ है या फिर कोई ऐसी चीज लगी है जिससे उसे नुकसान पहुंच सकता है। अक्सर साधारण रोबोटिक स्किन सिर्फ दबाव को नापती है, लेकिन यह नई स्किन शारीरिक संपर्क को बिजली के संकेतों में बदल देती है, जो हमारे शरीर की नसों में दौड़ने वाले पल्स की तरह होते हैं।
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ह्यू
- फोटो : अमर उजाला
दर्द महसूस होते ही तुरंत करेगा प्रतिक्रिया
इस रोबोटिक स्किन की सबसे खास बात इसका रिफ्लेक्स सिस्टम यानी प्रतिक्रिया करने की क्षमता है। यह स्किन चार अलग-अलग लेयर्स से बनी है, जो इंसानी नसों की तरह काम करती हैं। अगर दबाव सामान्य हो, तो जानकारी रोबोट के सेंट्रल प्रोसेसर तक जाती है, जहां उसका इस्तेमाल चीजों को पकड़ने या इंसानों से इंटरैक्शन के लिए किया जा सकता है। लेकिन जैसे ही दबाव तय दर्द सीमा से ज्यादा होता है, सिस्टम सीधा रोबोट के मोटर्स को हाई-वोल्टेज सिग्नल भेज देता है। इससे रोबोट बिना समय गंवाए तुरंत पीछे हट जाता है, ठीक वैसे ही जैसे इंसान गर्म या नुकीली चीज छूते ही हाथ खींच लेते हैं।
इस रोबोटिक स्किन की सबसे खास बात इसका रिफ्लेक्स सिस्टम यानी प्रतिक्रिया करने की क्षमता है। यह स्किन चार अलग-अलग लेयर्स से बनी है, जो इंसानी नसों की तरह काम करती हैं। अगर दबाव सामान्य हो, तो जानकारी रोबोट के सेंट्रल प्रोसेसर तक जाती है, जहां उसका इस्तेमाल चीजों को पकड़ने या इंसानों से इंटरैक्शन के लिए किया जा सकता है। लेकिन जैसे ही दबाव तय दर्द सीमा से ज्यादा होता है, सिस्टम सीधा रोबोट के मोटर्स को हाई-वोल्टेज सिग्नल भेज देता है। इससे रोबोट बिना समय गंवाए तुरंत पीछे हट जाता है, ठीक वैसे ही जैसे इंसान गर्म या नुकीली चीज छूते ही हाथ खींच लेते हैं।
स्किन से महसूस करेंगे रोबोट्स
- फोटो : AI
तुरंत प्रतिक्रिया से नुकसान होगा कम
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस डायरेक्ट सिग्नल सिस्टम से प्रतिक्रिया का समय काफी कम हो जाता है। इससे न सिर्फ रोबोट खुद को नुकसान से बचा पाता है, बल्कि आसपास मौजूद इंसानों और वस्तुओं की सुरक्षा भी बेहतर होती है। खास बात यह है कि दर्द की प्रतिक्रिया के लिए रोबोट को हर बार सेंट्रल कंप्यूटर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। स्किन खुद ही खतरे को पहचानकर एक्शन ले सकती है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस डायरेक्ट सिग्नल सिस्टम से प्रतिक्रिया का समय काफी कम हो जाता है। इससे न सिर्फ रोबोट खुद को नुकसान से बचा पाता है, बल्कि आसपास मौजूद इंसानों और वस्तुओं की सुरक्षा भी बेहतर होती है। खास बात यह है कि दर्द की प्रतिक्रिया के लिए रोबोट को हर बार सेंट्रल कंप्यूटर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। स्किन खुद ही खतरे को पहचानकर एक्शन ले सकती है।
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खुद को ठीक करेगा स्किन
- फोटो : AI
खुद की खराबी भी पहचान लेगी स्किन
इस स्किन में सेल्फ-मॉनिटरिंग सिस्टम भी मौजूद है। हर सेंसर लगातार एक हल्का सिग्नल भेजता रहता है, जिससे पता चलता है कि वह सही से काम कर रहा है। अगर स्किन का कोई हिस्सा कट जाता है या फट जाता है, तो उस हिस्से का सिग्नल बंद हो जाता है। इससे रोबोट तुरंत यह पहचान लेता है कि नुकसान कहां हुआ है। हालांकि यह स्किन खुद को ठीक नहीं कर सकती, लेकिन इसकी मरम्मत बेहद आसान है। ई-स्किन छोटे-छोटे मैग्नेटिक मॉड्यूल्स से बनी है, जो बिल्डिंग ब्लॉक्स की तरह जुड़े होते हैं। अगर कोई हिस्सा खराब हो जाए, तो उसे सेकंडों में हटाकर नया मॉड्यूल लगाया जा सकता है, बिना पूरे रोबोट को खोलने की जरूरत के।
इस स्किन में सेल्फ-मॉनिटरिंग सिस्टम भी मौजूद है। हर सेंसर लगातार एक हल्का सिग्नल भेजता रहता है, जिससे पता चलता है कि वह सही से काम कर रहा है। अगर स्किन का कोई हिस्सा कट जाता है या फट जाता है, तो उस हिस्से का सिग्नल बंद हो जाता है। इससे रोबोट तुरंत यह पहचान लेता है कि नुकसान कहां हुआ है। हालांकि यह स्किन खुद को ठीक नहीं कर सकती, लेकिन इसकी मरम्मत बेहद आसान है। ई-स्किन छोटे-छोटे मैग्नेटिक मॉड्यूल्स से बनी है, जो बिल्डिंग ब्लॉक्स की तरह जुड़े होते हैं। अगर कोई हिस्सा खराब हो जाए, तो उसे सेकंडों में हटाकर नया मॉड्यूल लगाया जा सकता है, बिना पूरे रोबोट को खोलने की जरूरत के।